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रामायण की पवित्र कथाएँ

रामायण की पवित्र कथाएँ

महर्षि वाल्मीकि द्वारा रचित रामायण भगवान श्रीराम के जीवन, आदर्शों, संघर्षों और धर्म की विजय का महान महाकाव्य है।

वाल्मीकि रामायण में श्रीराम के जन्म से लेकर वनवास, सीता हरण, हनुमान जी की भक्ति, लंका विजय और श्रीराम के आदर्श जीवन तक की संपूर्ण कथा का वर्णन मिलता है। रामायण केवल एक कथा नहीं, बल्कि धर्म, सत्य, मर्यादा, त्याग, कर्तव्य और आदर्श जीवन का मार्गदर्शन भी है।

नवीनतम लेख

वाल्मीकि रामायण, बालकाण्ड , सर्ग 22 : राम का विश्वामित्र के साथ जाना और विश्वामित्र से बला और अतिबला नामक विद्या की प्राप्ति

वाल्मीकि रामायण

वाल्मीकि रामायण, बालकाण्ड , सर्ग 22 : राम का विश्वामित्र के साथ जाना और विश्वामित्र से बला और अतिबला नामक विद्या की प्राप्ति

वाल्मीकि रामायण के बालकाण्ड के सर्ग 22 में श्रीराम और लक्ष्मण का विश्वामित्र के साथ प्रस्थान, बला-अतिबला विद्या की प्राप्ति और सरयू तट पर रात्रि विश्राम का प्रसंग है।

वाल्मीकि रामायण, बालकाण्ड, सर्ग 21 : विश्वामित्र के क्रोध से क्यों घबराए दशरथ? वसिष्ठ ने समझाया धर्म का मार्ग

वाल्मीकि रामायण

वाल्मीकि रामायण, बालकाण्ड, सर्ग 21 : विश्वामित्र के क्रोध से क्यों घबराए दशरथ? वसिष्ठ ने समझाया धर्म का मार्ग

वाल्मीकि रामायण बालकाण्ड सर्ग 21 में विश्वामित्र के रोषपूर्ण वचन, वसिष्ठ द्वारा राजा दशरथ को दिया धर्म और वचन पालन का उपदेश तथा श्रीराम को विश्वामित्र के साथ भेजने का निर्णय बताया गया है।

वाल्मीकि रामायण, बालकाण्ड, सर्ग 20 : राजा दशरथ का विश्वामित्र को अपना पुत्र देने से इनकार करना और विश्वामित्र का कुपित होना

वाल्मीकि रामायण

वाल्मीकि रामायण, बालकाण्ड, सर्ग 20 : राजा दशरथ का विश्वामित्र को अपना पुत्र देने से इनकार करना और विश्वामित्र का कुपित होना

वाल्मीकि रामायण बालकाण्ड सर्ग 20 में राजा दशरथ श्रीराम को विश्वामित्र के साथ भेजने से इनकार करते हैं। जानिए दशरथ की चिंता, रावण का प्रभाव और विश्वामित्र के क्रोध की कथा।

वाल्मीकि रामायण, बालकाण्ड, सर्ग 19 : विश्वामित्र के मुख से श्रीराम को साथ ले जाने की माँग सुनकर राजा दशरथ का दुःखित एवं मूर्च्छित होना

वाल्मीकि रामायण

वाल्मीकि रामायण, बालकाण्ड, सर्ग 19 : विश्वामित्र के मुख से श्रीराम को साथ ले जाने की माँग सुनकर राजा दशरथ का दुःखित एवं मूर्च्छित होना

वाल्मीकि रामायण बालकाण्ड सर्ग 19 में विश्वामित्र राजा दशरथ से यज्ञ की रक्षा के लिए श्रीराम को साथ ले जाने की मांग करते हैं, जिसे सुनकर दशरथ पुत्र-वियोग के भय से मूर्छित हो जाते हैं।

वाल्मीकि रामायण, बालकाण्ड, सर्ग 18 : श्रीराम, भरत, लक्ष्मण तथा शत्रुघ्न के जन्म ! राजा के दरबार में विश्वामित्र का आगमन और उनका सत्कार

वाल्मीकि रामायण

वाल्मीकि रामायण, बालकाण्ड, सर्ग 18 : श्रीराम, भरत, लक्ष्मण तथा शत्रुघ्न के जन्म ! राजा के दरबार में विश्वामित्र का आगमन और उनका सत्कार

वाल्मीकि रामायण बालकाण्ड सर्ग 18 में श्रीराम, भरत, लक्ष्मण और शत्रुघ्न के जन्म, नामकरण, बाल्यकाल और महर्षि विश्वामित्र के अयोध्या आगमन का वर्णन है।

वाल्मीकि रामायण, बालकाण्ड, सर्ग 17 : ब्रह्माजी की प्रेरणा से देवता आदि के द्वारा विभिन्न वानरयूथपतियों की उत्पत्ति

वाल्मीकि रामायण

वाल्मीकि रामायण, बालकाण्ड, सर्ग 17 : ब्रह्माजी की प्रेरणा से देवता आदि के द्वारा विभिन्न वानरयूथपतियों की उत्पत्ति

वाल्मीकि रामायण बालकाण्ड सर्ग 17 में भगवान श्रीराम की सहायता के लिए ब्रह्माजी की प्रेरणा से विभिन्न देवताओं द्वारा वानर यूथपतियों की उत्पत्ति और उनके अद्भुत पराक्रम का वर्णन है।

वाल्मीकि रामायण, बालकाण्ड , सर्ग 16 : श्रीहरि का अवतार संकल्प और पुत्रेष्टि यज्ञ से मिली दिव्य खीर

वाल्मीकि रामायण

वाल्मीकि रामायण, बालकाण्ड , सर्ग 16 : श्रीहरि का अवतार संकल्प और पुत्रेष्टि यज्ञ से मिली दिव्य खीर

वाल्मीकि रामायण बालकाण्ड सर्ग 16 में रावण वध के लिए भगवान विष्णु के मनुष्य रूप में अवतार लेने का संकल्प, दशरथ की पुत्रेष्टि यज्ञ और दिव्य खीर मिलने का प्रसंग है।

वाल्मीकि रामायण, बालकाण्ड, सर्ग 15 : ऋष्यशृंग द्वारा राजा दशरथ के पुत्रेष्टि यज्ञ का आरम्भ, ब्रह्माजी का रावण के वध का उपाय ढूँढ़ निकालना

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वाल्मीकि रामायण, बालकाण्ड, सर्ग 15 : ऋष्यशृंग द्वारा राजा दशरथ के पुत्रेष्टि यज्ञ का आरम्भ, ब्रह्माजी का रावण के वध का उपाय ढूँढ़ निकालना

वाल्मीकि रामायण बालकाण्ड सर्ग 15 में ऋष्यशृंग ने दशरथ के पुत्रेष्टि यज्ञ का आरम्भ किया। इसी समय ब्रह्मा ने रावण वध का उपाय बताया और भगवान विष्णु के अवतार का संकल्प हुआ।

वाल्मीकि रामायण, बालकाण्ड, सर्ग 14 : महाराज दशरथ के द्वारा अश्वमेध यज्ञ का अनुष्ठान करना

वाल्मीकि रामायण

वाल्मीकि रामायण, बालकाण्ड, सर्ग 14 : महाराज दशरथ के द्वारा अश्वमेध यज्ञ का अनुष्ठान करना

वाल्मीकि रामायण बालकाण्ड सर्ग 14 में महाराज दशरथ के अश्वमेध यज्ञ की पूर्णाहुति, ब्राह्मणों को दान और ऋष्यशृंग द्वारा चार पुत्रों के जन्म का आशीर्वाद देने का प्रसंग है।

वाल्मीकि रामायण, बालकाण्ड, सर्ग 13 : यज्ञ में राजाओं को बुलाने के आदेश तथा पत्नियों सहित राजा दशरथ का यज्ञ की दीक्षा लेना

वाल्मीकि रामायण

वाल्मीकि रामायण, बालकाण्ड, सर्ग 13 : यज्ञ में राजाओं को बुलाने के आदेश तथा पत्नियों सहित राजा दशरथ का यज्ञ की दीक्षा लेना

वाल्मीकि रामायण बालकाण्ड सर्ग 13 में राजा दशरथ के अश्वमेध यज्ञ की तैयारियों, राजाओं को निमंत्रण देने और पत्नियों सहित यज्ञ की दीक्षा लेने का प्रसंग है।

वाल्मीकि रामायण, बालकाण्ड, सर्ग 12 : ऋषियों का दशरथ को और दशरथ का मन्त्रियों को यज्ञ की आवश्यक तैयारी करने के लिये आदेश देना

वाल्मीकि रामायण

वाल्मीकि रामायण, बालकाण्ड, सर्ग 12 : ऋषियों का दशरथ को और दशरथ का मन्त्रियों को यज्ञ की आवश्यक तैयारी करने के लिये आदेश देना

वाल्मीकि रामायण बालकाण्ड सर्ग 12 में ऋष्यशृंग ने राजा दशरथ को पुत्र-प्राप्ति यज्ञ की तैयारी का आदेश दिया। दशरथ ने मंत्रियों को यज्ञ की सभी आवश्यक व्यवस्थाएं करने को कहा।

वाल्मीकि रामायण, बालकाण्ड, सर्ग 11 : राजा दशरथ का सपरिवार अंगराज के यहाँ जाकर वहाँ से शान्ता और ऋष्यश्रृंग को अपने घर ले आना

वाल्मीकि रामायण

वाल्मीकि रामायण, बालकाण्ड, सर्ग 11 : राजा दशरथ का सपरिवार अंगराज के यहाँ जाकर वहाँ से शान्ता और ऋष्यश्रृंग को अपने घर ले आना

वाल्मीकि रामायण के बालकाण्ड सर्ग 11 में राजा दशरथ अंगदेश जाकर राजा रोमपाद से मिलते हैं और ऋष्यश्रृंग मुनि को शान्ता सहित अयोध्या लाते हैं। जानिए इस प्रसंग की पूरी कथा।

वाल्मीकि रामायण, बालकाण्ड, सर्ग 10 : अंगदेश में ऋष्यश्रृंग के आने तथा शान्ता के साथ विवाह होने के प्रसंग का वर्णन

वाल्मीकि रामायण

वाल्मीकि रामायण, बालकाण्ड, सर्ग 10 : अंगदेश में ऋष्यश्रृंग के आने तथा शान्ता के साथ विवाह होने के प्रसंग का वर्णन

वाल्मीकि रामायण के बालकाण्ड सर्ग 10 में ऋष्यशृंग मुनि को अंगदेश लाने, उनके आगमन पर वर्षा होने और राजा रोमपाद द्वारा पुत्री शान्ता से उनका विवाह कराने का वर्णन है।

वाल्मीकि रामायण, बालकाण्ड, सर्ग 9 :  सुमन्त्र का दशरथ को ऋष्यशृंग मुनि को बुलाने की सलाह और शान्ता से विवाह का प्रसंग सुनाना

वाल्मीकि रामायण

वाल्मीकि रामायण, बालकाण्ड, सर्ग 9 : सुमन्त्र का दशरथ को ऋष्यशृंग मुनि को बुलाने की सलाह और शान्ता से विवाह का प्रसंग सुनाना

वाल्मीकि रामायण के बालकाण्ड सर्ग 9 में सुमन्त्र राजा दशरथ को ऋष्यशृंग मुनि की कथा सुनाते हैं और बताते हैं कि शान्ता से उनके विवाह तथा पुत्रेष्टि यज्ञ से पुत्र प्राप्ति का मार्ग कैसे जुड़ा था।

वाल्मीकि रामायण, बालकाण्ड, सर्ग 8 : राजा दशरथ का पुत्र के लिये अश्वमेधयज्ञ का प्रस्ताव और मन्त्रियों तथा ब्राह्मणों द्वारा उनका अनुमोदन

वाल्मीकि रामायण

वाल्मीकि रामायण, बालकाण्ड, सर्ग 8 : राजा दशरथ का पुत्र के लिये अश्वमेधयज्ञ का प्रस्ताव और मन्त्रियों तथा ब्राह्मणों द्वारा उनका अनुमोदन

वाल्मीकि रामायण के बालकाण्ड सर्ग 8 में पुत्र प्राप्ति की इच्छा से राजा दशरथ द्वारा अश्वमेध यज्ञ का प्रस्ताव रखने और ऋषियों तथा मंत्रियों द्वारा उसका अनुमोदन करने का वर्णन है।

वाल्मीकि रामायण, बालकाण्ड, सर्ग 7 : राजा दशरथ के आठ राजमन्त्रियों के गुण और नीति का वर्णन

वाल्मीकि रामायण

वाल्मीकि रामायण, बालकाण्ड, सर्ग 7 : राजा दशरथ के आठ राजमन्त्रियों के गुण और नीति का वर्णन

वाल्मीकि रामायण के बालकाण्ड सर्ग 7 में राजा दशरथ की मंत्रिपरिषद के गुण, नीति, न्याय, गुप्तचर व्यवस्था और राज्य संचालन में मंत्रियों की महत्वपूर्ण भूमिका का विस्तार से वर्णन है।

वाल्मीकि रामायण, बालकाण्ड , सर्ग 6 : राजा दशरथ के शासनकाल में अयोध्या और वहाँ के नागरिकों की उत्तम स्थिति का वर्णन

वाल्मीकि रामायण

वाल्मीकि रामायण, बालकाण्ड , सर्ग 6 : राजा दशरथ के शासनकाल में अयोध्या और वहाँ के नागरिकों की उत्तम स्थिति का वर्णन

वाल्मीकि रामायण के बालकाण्ड सर्ग 6 में राजा दशरथ के शासनकाल की अयोध्या का वर्णन है, जहां प्रजा समृद्ध, धर्मपरायण, संतुष्ट और भयमुक्त जीवन जीती थी।

वाल्मीकि रामायण, बालकाण्ड , सर्ग 5 : राजा दशरथ द्वारा सुरक्षित अयोध्यापुरी का वर्णन

वाल्मीकि रामायण

वाल्मीकि रामायण, बालकाण्ड , सर्ग 5 : राजा दशरथ द्वारा सुरक्षित अयोध्यापुरी का वर्णन

वाल्मीकि रामायण के बालकाण्ड सर्ग 5 में राजा दशरथ के समय अयोध्या नगरी के वैभव, समृद्धि, राजमार्ग, उद्यान, संस्कृति और धर्मपरायण निवासियों का सुंदर वर्णन मिलता है।

वाल्मीकि रामायण, बालकाण्ड, सर्ग 4 : महर्षि वाल्मीकि का रामायण का निर्माण करना , लव-कुश का अयोध्या में रामायण गान सुनाना

वाल्मीकि रामायण

वाल्मीकि रामायण, बालकाण्ड, सर्ग 4 : महर्षि वाल्मीकि का रामायण का निर्माण करना , लव-कुश का अयोध्या में रामायण गान सुनाना

वाल्मीकि रामायण के बालकाण्ड सर्ग 4 में महर्षि वाल्मीकि ने लव-कुश को रामायण का अध्ययन कराया। दोनों ने अयोध्या में श्रीराम और उनकी सभा के सामने मधुर स्वर में रामायण का गान सुनाया।

वाल्मीकि रामायण , बालकाण्ड , सर्ग 3 : महर्षि वाल्मीकि के द्वारा रामायण काव्य को पूर्ण करना

वाल्मीकि रामायण

वाल्मीकि रामायण , बालकाण्ड , सर्ग 3 : महर्षि वाल्मीकि के द्वारा रामायण काव्य को पूर्ण करना

वाल्मीकि रामायण के बालकाण्ड सर्ग 3 में महर्षि वाल्मीकि ने योगबल और दिव्य दृष्टि से श्रीराम के संपूर्ण जीवन का साक्षात्कार किया और 24,000 श्लोकों वाले महाकाव्य की रचना की।

वाल्मीकि रामायण ,बालकाण्ड , सर्ग 2 : क्रौञ्चवध से संतप्त हुए महर्षि वाल्मीकि, ब्रह्माजी का उन्हें रामचरित्रमय काव्य के निर्माण का आदेश देना

वाल्मीकि रामायण

वाल्मीकि रामायण ,बालकाण्ड , सर्ग 2 : क्रौञ्चवध से संतप्त हुए महर्षि वाल्मीकि, ब्रह्माजी का उन्हें रामचरित्रमय काव्य के निर्माण का आदेश देना

वाल्मीकि रामायण के बालकाण्ड सर्ग 2 में क्रौञ्चवध से महर्षि वाल्मीकि के मुख से पहला श्लोक निकला। इसके बाद ब्रह्माजी ने उन्हें श्रीराम के चरित्र पर महाकाव्य रचने का आदेश दिया।

वाल्मीकि रामायण, बालकाण्ड, सर्ग 1 : नारदजी का वाल्मीकि मुनि को संक्षेप से श्रीरामचरित्र सुनाना

वाल्मीकि रामायण

वाल्मीकि रामायण, बालकाण्ड, सर्ग 1 : नारदजी का वाल्मीकि मुनि को संक्षेप से श्रीरामचरित्र सुनाना

वाल्मीकि रामायण के बालकाण्ड के प्रथम सर्ग में महर्षि वाल्मीकि ने नारदजी से आदर्श पुरुष के बारे में पूछा। नारदजी ने श्रीराम के गुण, स्वरूप और चरित्र का संक्षेप में वर्णन किया।

नारद जी ने बताया रामायण का श्रवण कैसे करें? जानिए कथा सुनने के नीति-नियम और मिलने वाले फल

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नारद जी ने बताया रामायण का श्रवण कैसे करें? जानिए कथा सुनने के नीति-नियम और मिलने वाले फल

रामायण श्रवण की विधि, नियम और महिमा क्या है? नारद जी ने संतकुमार को बताया कथा आरंभ करने का समय, पूजा-विधान, नवाह पारायण और श्रवण से मिलने वाले पुण्य फल।

कलिक शिकारी की कथा : रामायण सुनने मात्र से कैसे हुआ महापापी का उद्धार?

वाल्मीकि रामायण

कलिक शिकारी की कथा : रामायण सुनने मात्र से कैसे हुआ महापापी का उद्धार?

कलिक नाम का शिकारी हिंसा, चोरी और पाप कर्मों में डूबा था। उत्तंग मुनि के उपदेश और रामायण श्रवण से उसके पाप नष्ट हुए और उसे उद्धार का मार्ग मिला।

राजा सुमति और सत्यवती की कथा : 9 दिन रामायण सुनने से कैसे मिला पापों से मुक्ति का फल?

वाल्मीकि रामायण

राजा सुमति और सत्यवती की कथा : 9 दिन रामायण सुनने से कैसे मिला पापों से मुक्ति का फल?

राजा सुमति ने विभाण्डक ऋषि को अपने पिछले जन्म का रहस्य बताया। रामायण के नौ दिन के श्रवण से उनका जीवन बदल गया और अगले जन्म में उन्हें राजपद प्राप्त हुआ।

महादेव के श्राप से राक्षस बने सौदास : नौ दिन की रामकथा से हुआ उद्धार

वाल्मीकि रामायण

महादेव के श्राप से राक्षस बने सौदास : नौ दिन की रामकथा से हुआ उद्धार

महादेव के श्राप से राक्षस बने ब्राह्मण सौदास ने नौ दिनों तक रामायण की कथा सुनी और असुरत्व से मुक्त होकर भगवान विष्णु के धाम पहुंच गए।

कलयुग में रामायण का आश्रय क्यों जरूरी है? नारद जी ने बताया रहस्य

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कलयुग में रामायण का आश्रय क्यों जरूरी है? नारद जी ने बताया रहस्य

सनकादि ऋषियों ने नारद जी से भगवान विष्णु और श्रीराम के स्वरूप का रहस्य पूछा। नारद जी ने रामायण और श्रीराम नाम की महिमा बताई।

वाल्मीकि रामायण का श्रवण क्यों है इतना पुण्यकारी? जानिए श्रीराम कथा का महत्व

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वाल्मीकि रामायण का श्रवण क्यों है इतना पुण्यकारी? जानिए श्रीराम कथा का महत्व

श्रीराम को संसार का आश्रय देने वाला बताया गया है। जानिए वाल्मीकि रामायण के श्रवण, पाठ और श्रीराम भक्ति से जुड़े धार्मिक महत्व की पूरी कथा।

उच्च कोटि की राजनीति का प्रमाण है वाल्मीकि रामायण, हनुमान जी की नीति आज भी क्यों खास है?

वाल्मीकि रामायण

उच्च कोटि की राजनीति का प्रमाण है वाल्मीकि रामायण, हनुमान जी की नीति आज भी क्यों खास है?

वाल्मीकि रामायण में धर्म के साथ राजनीति, कूटनीति और निर्णय लेने की अद्भुत समझ दिखाई देती है, जिसमें हनुमान जी सबसे बड़े उदाहरण हैं।

आदिकवि महर्षि वाल्मीकि रचित "वाल्मीकि रामायण" का संपूर्ण परिचय

वाल्मीकि रामायण

आदिकवि महर्षि वाल्मीकि रचित "वाल्मीकि रामायण" का संपूर्ण परिचय

जानिए महर्षि वाल्मीकि द्वारा रचित वाल्मीकि रामायण का इतिहास, प्रथम श्लोक, सात कांड, रचना काल और इसके आध्यात्मिक महत्व से जुड़ी संपूर्ण जानकारी।