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वाल्मीकि रामायण, बालकाण्ड, सर्ग 9 : सुमन्त्र का दशरथ को ऋष्यशृंग मुनि को बुलाने की सलाह और शान्ता से विवाह का प्रसंग सुनाना

वाल्मीकि रामायण के बालकाण्ड सर्ग 9 में सुमन्त्र राजा दशरथ को ऋष्यशृंग मुनि की कथा सुनाते हैं और बताते हैं कि शान्ता से उनके विवाह तथा पुत्रेष्टि यज्ञ से पुत्र प्राप्ति का मार्ग कैसे जुड़ा था।

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वाल्मीकि रामायण बालकाण्ड सर्ग 9

राजा दशरथ जब पुत्र प्राप्ति के लिये अश्वमेध यज्ञ का संकल्प कर चुके, तब उनके मन्त्री सुमन्त्र ने एकान्त में उनसे एक अत्यन्त महत्वपूर्ण बात कही। उन्होंने विनम्र भाव से कहा, ‘राजन्! पूर्वकाल में भगवान सनत्कुमार ने ऋषियों के समक्ष एक अद्भुत कथा सुनाई थी। वह कथा आपकी पुत्र-प्राप्ति से सम्बन्ध रखती है।’ सुमन्त्र ने आगे बताया, ‘महर्षि कश्यप के विभाण्डक नामक एक तेजस्वी पुत्र थे। उन्हीं के यहाँ एक अद्भुत तेजस्वी बालक उत्पन्न होगा, जो आगे चलकर ऋष्यशृंग नाम से प्रसिद्ध होगा।’ यह ऋष्यशृंग मुनि वन में ही जन्म लेकर वहीं पले-बढ़ेंगे। उनका जीवन पूर्णतः एकान्त और पवित्र होगा। वे बाहरी संसार से अनभिज्ञ रहेंगे और किसी अन्य मनुष्य या समाज को नहीं जानेंगे।

वे महान मुनि ब्रह्मचर्य के दोनों स्वरूपों का पालन करेंगे। एक, दण्ड और मेखला धारण कर तपस्वी जीवन जीना और दूसरा, समयानुसार गृहस्थ धर्म का पालन करना। इस प्रकार वे अत्यन्त संयमी और तेजस्वी बनेंगे। इसी समय सुमन्त्र ने एक और प्रसंग बताया, ‘अंगदेश में रोमपाद नामक एक प्रतापी राजा होंगे। किसी कारणवश उनके राज्य में धर्म का ह्रास हो जाएगा और परिणामस्वरूप वहाँ भयंकर अकाल पड़ जाएगा। वर्षा न होने से प्रजा अत्यन्त दुःखी और भयभीत हो उठेगी।’

तब विद्वान ब्राह्मण राजा रोमपाद से कहेंगे,‘इस संकट का समाधान केवल यही है कि आप विभाण्डकपुत्र ऋष्यशृंग को अपने राज्य में ले आएँ। उनके चरण पड़ते ही वर्षा अवश्य होगी।’ राजा इस बात को सुनकर चिंतित हो उठेंगे कि वन में रहने वाले उस महान मुनि को राज्य में कैसे लाया जाए। तब मन्त्री और पुरोहित मिलकर एक उपाय निकालेंगे। वे गणिकाओं की सहायता से किसी प्रकार ऋष्यशृंग को वन से बाहर लाकर अंगदेश में ले आएँगे। जैसे ही वे मुनि वहाँ पहुँचेंगे, इन्द्रदेव प्रसन्न होकर वर्षा करेंगे और राज्य फिर से समृद्ध हो जाएगा।

उसके बाद राजा रोमपाद अपनी पुत्री शान्ता का विवाह ऋष्यशृंग मुनि के साथ कर देंगे। सुमन्त्र ने आगे कहा, ‘राजन्! यही शान्ता आपकी पुत्री है और इस प्रकार ऋष्यशृंग आपके जामाता हुए। वही महान ऋषि आपके लिये पुत्र प्राप्ति कराने वाले यज्ञ का सम्पादन करेंगे। यह सब मैंने सनत्कुमार जी के वचनों के आधार पर आपको बताया है।’ यह सुनकर राजा दशरथ के हृदय में अपार प्रसन्नता भर गई। उन्हें ऐसा प्रतीत हुआ मानो उनकी मनोकामना पूर्ण होने का मार्ग स्पष्ट हो गया हो।

वे उत्सुक होकर सुमन्त्र से बोले, ‘तुमने जो यह अद्भुत कथा कही, वह अत्यन्त रोचक और आशाजनक है। अब मुझे विस्तार से बताओ कि ऋष्यशृंग मुनि को अंगदेश में किस प्रकार और किन उपायों से लाया गया था?’

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)

1-सुमन्त्र ने राजा दशरथ को ऋष्यशृंग मुनि के बारे में क्या बताया?

सुमन्त्र ने बताया कि ऋष्यशृंग महर्षि विभाण्डक के पुत्र थे और अत्यन्त तपस्वी, संयमी तथा तेजस्वी मुनि के रूप में प्रसिद्ध हुए।

2-अंगदेश में अकाल पड़ने का कारण क्या बताया गया है?

वाल्मीकि रामायण के अनुसार, राजा रोमपाद के राज्य में धर्म का ह्रास होने के बाद वर्षा नहीं हुई और भयंकर अकाल पड़ गया, जिससे प्रजा अत्यन्त परेशान हो गई।

3-ऋष्यशृंग को अंगदेश में क्यों बुलाया गया था?

ब्राह्मणों ने राजा रोमपाद को बताया कि ऋष्यशृंग के राज्य में आने से वर्षा होगी। इसके बाद उन्हें वन से अंगदेश लाने का प्रयास किया गया।

4-ऋष्यशृंग मुनि का विवाह किससे हुआ था?

अंगदेश के राजा रोमपाद ने अपनी पुत्री शान्ता का विवाह ऋष्यशृंग मुनि से किया था। शान्ता को राजा दशरथ की पुत्री भी बताया गया है।

5-ऋष्यशृंग मुनि का राजा दशरथ से क्या संबंध था?

वाल्मीकि रामायण के अनुसार, शान्ता राजा दशरथ की पुत्री और ऋष्यशृंग की पत्नी थीं। इस कारण ऋष्यशृंग राजा दशरथ के जामाता हुए और आगे पुत्र प्राप्ति के यज्ञ से उनका संबंध जुड़ा।

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