महर्षि वाल्मीकि को रामायण की रचना की दिव्य प्रेरणा प्राप्त हुई। देवर्षि नारद ने उन्हें श्रीराम के संपूर्ण चरित्र का संक्षिप्त वर्णन किया था जो धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष जैसे चारों पुरुषार्थों को देने वाला था। नारदजी के मुख से यह पवित्र रामकथा सुनकर महर्षि वाल्मीकि के हृदय में गहन जिज्ञासा और प्रेरणा जाग उठी। वे उस दिव्य चरित्र को और गहराई से जानने के लिये चिंतन में लीन हो गये।
महर्षि वाल्मीकि ने अपने योगबल का आश्रय लिया और ध्यान के माध्यम से श्रीराम के सम्पूर्ण जीवन का साक्षात्कार करना प्रारम्भ किया। उन्होंने देखा- राजा दशरथ का राजमहल, श्रीराम, लक्ष्मण और सीता का जीवन, उनका आचरण, उनकी वाणी, उनका चलना-फिरना, हँसना, बोलना और राज्य का संचालन-ये सब कुछ उन्होंने अपनी दिव्य दृष्टि से प्रत्यक्ष देखा। योगशक्ति के प्रभाव से उन्होंने अतीत की हर घटना को ऐसे देखा, मानो वह उनके सामने घट रही हो।
जैसे कोई व्यक्ति अपने हाथ पर रखे आँवले को स्पष्ट देखता है, उसी प्रकार महर्षि ने रामकथा के प्रत्येक प्रसंग को प्रत्यक्ष अनुभव किया। इस प्रकार महर्षि वाल्मीकि ने श्रीराम के जीवन के प्रत्येक पक्ष को- उनके जन्म से लेकर वनवास, संघर्ष, विजय और अंततः राज्याभिषेक तक सब कुछ अपनी अन्तर्दृष्टि से समझा। उन्होंने केवल घटित घटनाओं को ही नहीं, बल्कि भविष्य में घटने वाली घटनाओं का भी दर्शन किया और उन्हें अपने काव्य में स्थान दिया।
इसके पश्चात उन्होंने एक अद्भुत महाकाव्य की रचना की जिसमें शब्द, अर्थ, अलंकार और भाव का अद्भुत समन्वय था। यह काव्य मानो गुणों और साहित्यिक सौंदर्य का भंडार था, जैसे समुद्र अनगिनत रत्नों का भंडार होता है। महर्षि वाल्मीकि ने देवर्षि नारद द्वारा बताए गए क्रम के अनुसार ही श्रीराम के चरित्र का विस्तारपूर्वक वर्णन किया। उन्होंने रघुवंश के गौरव श्रीराम के जीवन को अत्यन्त सुन्दर और प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया।
इस महान ग्रंथ में कुल 24,000 श्लोक , 500 सर्ग और सात काण्ड (उत्तरकाण्ड सहित) हैं। यह केवल एक कथा नहीं, बल्कि सम्पूर्ण जीवन का मार्गदर्शन करने वाला महाकाव्य है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
1-महर्षि वाल्मीकि ने श्रीराम के जीवन को कैसे जाना?
महर्षि वाल्मीकि ने योगबल और ध्यान के माध्यम से श्रीराम के जीवन की घटनाओं का अपनी दिव्य दृष्टि से साक्षात्कार किया।
2-वाल्मीकि जी ने श्रीराम के जीवन की कौन-कौन सी घटनाएं देखीं?
उन्होंने श्रीराम के जन्म, वनवास, संघर्ष, विजय और राज्याभिषेक सहित उनके जीवन के अनेक प्रसंगों का दिव्य दृष्टि से दर्शन किया।
3-वाल्मीकि रामायण में कितने श्लोक बताए गए हैं?
प्रस्तुत वर्णन के अनुसार वाल्मीकि रामायण में कुल 24,000 श्लोक हैं।
4-वाल्मीकि रामायण में कितने काण्ड और सर्ग हैं?
प्रस्तुत सामग्री के अनुसार रामायण में सात काण्ड और 500 सर्ग हैं, जिनमें उत्तरकाण्ड भी शामिल है।
5-वाल्मीकि रामायण की विशेषता क्या है?
यह महाकाव्य श्रीराम के जीवन और चरित्र के माध्यम से धर्म, आदर्श और जीवन-मूल्यों का मार्गदर्शन प्रस्तुत करता है। इसमें शब्द, अर्थ, अलंकार और भाव का सुंदर समन्वय बताया गया है।









