12 नवंबर 2026 को मंगल सिंह राशि में प्रवेश करेंगे। सिंह राशि में पहले से गुरु और केतु मौजूद हैं, इसलिए मंगल का आगमन इस स्थिति को और सक्रिय करेगा। इस गोचर में मंगल की विशेष दृष्टियों के साथ गुरु-केतु की युति का प्रभाव भी महत्वपूर्ण रहेगा।
सिंह राशि में मंगल का गोचर क्यों महत्वपूर्ण है?
मंगल ऊर्जा, साहस, भूमि, तकनीकी क्षमता, प्रतिस्पर्धा, निर्णय और कार्रवाई के कारक ग्रह हैं। सिंह राशि सूर्य की राशि है और नेतृत्व, आत्मविश्वास, प्रतिष्ठा तथा अधिकार से जुड़ी है। सूर्य मंगल के मित्र ग्रह हैं, इसलिए सिंह में मंगल अपनी ऊर्जा को खुलकर व्यक्त करता है।
इस बार स्थिति सामान्य मंगल गोचर से अलग है। सिंह राशि में गुरु पहले से मौजूद हैं और केतु भी यहीं हैं। इसके अलावा 12 नवंबर को मंगल मघा नक्षत्र में प्रवेश करेंगे, जिसका स्वामी केतु है। इसलिए मंगल का गोचर गुरु-केतु की चल रही स्थिति को और सक्रिय कर सकता है।
मंगल यहां से अपनी चतुर्थ, सप्तम और अष्टम दृष्टि क्रमशः वृश्चिक, कुंभ और मीन राशि पर डालेगा। इन दृष्टियों के कारण केवल सिंह राशि से संबंधित भाव ही नहीं, बल्कि तीन अन्य क्षेत्रों में भी मंगल की ऊर्जा और तेजी बढ़ेगी।
मंगल के इस गोचर का 12 राशियों पर प्रभाव क्या होगा?
मंगल सिंह राशि में गोचर : मेष राशि पर प्रभाव -
मंगल लग्न और अष्टम भाव के स्वामी होकर पंचम भाव में गोचर करेंगे। पंचम भाव शिक्षा, संतान, प्रेम, बुद्धि और रचनात्मकता का है, इसलिए इन विषयों में सक्रियता बढ़ेगी। प्रतियोगी शिक्षा या किसी रचनात्मक काम में आगे बढ़ने की इच्छा तेज हो सकती है, लेकिन प्रेम और संतान से जुड़े मामलों में जल्दबाजी से बचना होगा।
मंगल की चतुर्थ दृष्टि अष्टम भाव, सप्तम दृष्टि एकादश भाव और अष्टम दृष्टि द्वादश भाव पर पड़ेगी। इससे अचानक आर्थिक घटनाक्रम, आय और खर्च तीनों सक्रिय रहेंगे। गुरु की मौजूदगी इस ऊर्जा को ज्ञान और विस्तार की दिशा दे सकती है, जबकि केतु के कारण निर्णयों में कभी-कभी असमंजस रह सकता है।
मंगल सिंह राशि में गोचर : वृषभ राशि पर प्रभाव -
मंगल सप्तम और द्वादश भाव के स्वामी होकर चतुर्थ भाव में रहेंगे। चतुर्थ भाव घर, संपत्ति, वाहन, माता और मानसिक सुख से जुड़ा है। संपत्ति या घर से जुड़े कामों में तेजी आ सकती है, लेकिन परिवार के भीतर गुस्सा और मतभेद बढ़ने से बचना होगा।
मंगल की चतुर्थ दृष्टि सप्तम भाव पर पड़ेगी, इसलिए विवाह और व्यापारिक साझेदारी में बहस की स्थिति बन सकती है। सप्तम दृष्टि दशम भाव पर होने से करियर में सक्रियता और काम का दबाव बढ़ सकता है, जबकि अष्टम दृष्टि एकादश भाव पर लाभ के मामलों में अचानक बदलाव ला सकती है। घर और करियर के बीच संतुलन रखना जरूरी होगा।
मंगल सिंह राशि में गोचर : मिथुन राशि पर प्रभाव -
मंगल षष्ठ और एकादश भाव के स्वामी होकर तृतीय भाव में गोचर करेंगे। तृतीय भाव साहस, पराक्रम, संचार, छोटे भाई-बहन और प्रयासों का है। यह स्थिति व्यक्ति को अपने लक्ष्य के लिए अधिक सक्रिय बना सकती है और नौकरी या प्रतियोगिता में मुकाबला करने की क्षमता बढ़ा सकती है।
मंगल की चतुर्थ दृष्टि षष्ठ भाव पर होने से विरोधियों और प्रतियोगिता के मामलों में मजबूती मिलेगी। सप्तम दृष्टि नवम भाव पर और अष्टम दृष्टि दशम भाव पर पड़ेगी, जिससे भाग्य, उच्च शिक्षा और करियर में प्रयासों का सीधा संबंध बनेगा। हालांकि जल्दबाजी में बोलने या किसी करीबी से विवाद करने से बचना होगा।
मंगल सिंह राशि में गोचर : कर्क राशि पर प्रभाव -
मंगल पंचम और दशम भाव के स्वामी होकर द्वितीय भाव में गोचर करेंगे। द्वितीय भाव धन, बचत, परिवार और वाणी का है। दशमेश का धन भाव में आना करियर से आर्थिक लाभ की दिशा बना सकता है, जबकि पंचमेश होने से बुद्धि और कौशल का उपयोग कमाई में किया जा सकता है।
मंगल की चतुर्थ दृष्टि पंचम भाव पर होने से शिक्षा, संतान और रचनात्मक कार्य सक्रिय होंगे। सप्तम दृष्टि अष्टम भाव पर अचानक बदलावों को बढ़ा सकती है और अष्टम दृष्टि नवम भाव पर भाग्य तथा उच्च शिक्षा के मामलों में तेजी ला सकती है। धन के साथ वाणी पर नियंत्रण रखना इस समय बहुत जरूरी होगा।
मंगल सिंह राशि में गोचर : सिंह राशि पर प्रभाव -
मंगल चतुर्थ और नवम भाव के स्वामी होकर प्रथम भाव में गोचर करेंगे। यह स्थिति सीधे व्यक्तित्व, आत्मविश्वास, निर्णय और जीवन की दिशा को प्रभावित करेगी। नवमेश का लग्न में आना भाग्य और प्रयासों के बीच संबंध बना सकता है, जबकि चतुर्थेश होने से घर, संपत्ति और पारिवारिक मामलों पर भी ध्यान जाएगा।
लेकिन यहां गुरु और केतु के साथ मंगल की स्थिति व्यक्ति को बहुत तेज निर्णय लेने या अपनी बात पर अड़ने की प्रवृत्ति दे सकती है। मंगल की चतुर्थ दृष्टि चतुर्थ भाव, सप्तम दृष्टि सप्तम भाव और अष्टम दृष्टि अष्टम भाव पर पड़ेगी। इसलिए घर, विवाह, साझेदारी और अचानक बदलावों में संयम जरूरी होगा।
मंगल सिंह राशि में गोचर : कन्या राशि पर प्रभाव -
मंगल तृतीय और अष्टम भाव के स्वामी होकर द्वादश भाव में गोचर करेंगे। खर्च, विदेश, यात्रा, एकांत और निजी मामलों पर इसका प्रभाव रहेगा। अष्टमेश का द्वादश भाव में जाना अचानक खर्च या ऐसी परिस्थितियां ला सकता है जिनकी पहले योजना न बनाई गई हो।
मंगल की चतुर्थ दृष्टि तृतीय भाव पर होने से साहस और प्रयास बढ़ेंगे, सप्तम दृष्टि षष्ठ भाव पर होने से नौकरी और प्रतियोगिता में संघर्ष करने की क्षमता बढ़ेगी, जबकि अष्टम दृष्टि सप्तम भाव पर रिश्तों और साझेदारी में तनाव पैदा कर सकती है। विदेश या दूरस्थ अवसर मिल सकते हैं, लेकिन खर्च और रिश्तों में जल्दबाजी से बचना होगा।
मंगल सिंह राशि में गोचर : तुला राशि पर प्रभाव -
मंगल द्वितीय और सप्तम भाव के स्वामी होकर एकादश भाव में गोचर करेंगे। एकादश भाव आय, लाभ, मित्रों और इच्छाओं की पूर्ति से जुड़ा है, इसलिए कमाई और कारोबारी संपर्कों में सक्रियता बढ़ सकती है। सप्तमेश का एकादश भाव में आना साझेदारी के माध्यम से लाभ का अवसर दे सकता है।
मंगल की चतुर्थ दृष्टि द्वितीय भाव पर होने से धन और वाणी सक्रिय रहेंगे, सप्तम दृष्टि पंचम भाव पर प्रेम और शिक्षा को प्रभावित करेगी और अष्टम दृष्टि षष्ठ भाव पर नौकरी-प्रतियोगिता के मामलों में ऊर्जा देगी। लाभ के अवसर रहेंगे, लेकिन मित्रों या कारोबारी सहयोगियों से अनावश्यक विवाद से बचना होगा।
मंगल सिंह राशि में गोचर : वृश्चिक राशि पर प्रभाव -
मंगल प्रथम और षष्ठ भाव के स्वामी होकर दशम भाव में गोचर करेंगे। यह करियर और कार्यक्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण स्थिति है क्योंकि मंगल स्वयं राशि स्वामी हैं और दशम भाव कर्मक्षेत्र का है। नौकरी, प्रशासन, तकनीकी काम, प्रतिस्पर्धा और नेतृत्व से जुड़े मामलों में तेजी आ सकती है।
मंगल की चतुर्थ दृष्टि लग्न पर पड़ेगी, जिससे आत्मविश्वास और निर्णय क्षमता बढ़ेगी। सप्तम दृष्टि चतुर्थ भाव पर घर-संपत्ति के मामलों को सक्रिय करेगी और अष्टम दृष्टि पंचम भाव पर शिक्षा, संतान और रचनात्मकता को प्रभावित करेगी। करियर में आगे बढ़ने का समय है, लेकिन वरिष्ठों से टकराव से बचना होगा।
मंगल सिंह राशि में गोचर : धनु राशि पर प्रभाव -
मंगल पंचम और द्वादश भाव के स्वामी होकर नवम भाव में गोचर करेंगे। नवम भाव भाग्य, धर्म, गुरु, उच्च शिक्षा और लंबी यात्राओं का है। पंचमेश का नवम भाव में आना शिक्षा, ज्ञान और रचनात्मकता के लिए अच्छा आधार बना सकता है। द्वादशेश होने से विदेश या दूरस्थ स्थानों से जुड़े अवसर भी सक्रिय हो सकते हैं।
मंगल की चतुर्थ दृष्टि द्वादश भाव पर खर्च और विदेश से जुड़े मामलों को बढ़ाएगी, सप्तम दृष्टि तृतीय भाव पर प्रयास और संचार को मजबूत करेगी, जबकि अष्टम दृष्टि चतुर्थ भाव पर घर और संपत्ति को सक्रिय करेगी। गुरु की उपस्थिति इस गोचर को ज्ञान और विस्तार से जोड़ सकती है, लेकिन जल्दबाजी में धार्मिक या वैचारिक निर्णय नहीं लेने चाहिए।
मंगल सिंह राशि में गोचर : मकर राशि पर प्रभाव -
मंगल चतुर्थ और एकादश भाव के स्वामी होकर अष्टम भाव में गोचर करेंगे। अष्टम भाव अचानक परिवर्तन, साझा धन, शोध, गुप्त विषय और अनिश्चित परिस्थितियों से जुड़ा है। इस स्थिति में घर, संपत्ति और आय से जुड़े मामलों में अचानक बदलाव हो सकते हैं।
मंगल की चतुर्थ दृष्टि एकादश भाव पर होने से आय के नए रास्ते खुल सकते हैं, सप्तम दृष्टि द्वितीय भाव पर होने से धन और परिवार सक्रिय होंगे, जबकि अष्टम दृष्टि तृतीय भाव पर प्रयास और संचार में तेजी लाएगी। आर्थिक मामलों में जोखिम लेने से बचना बेहतर होगा। शोध, तकनीकी और गहरे अध्ययन से जुड़े कामों में अच्छी ऊर्जा मिल सकती है।
मंगल सिंह राशि में गोचर : कुंभ राशि पर प्रभाव -
मंगल तृतीय और दशम भाव के स्वामी होकर सप्तम भाव में गोचर करेंगे। विवाह, व्यापारिक साझेदारी और सार्वजनिक व्यवहार इस गोचर के मुख्य क्षेत्र होंगे। दशमेश का सप्तम भाव में आना कारोबार और साझेदारी के माध्यम से करियर को आगे बढ़ा सकता है, लेकिन मंगल की तीखी ऊर्जा रिश्तों में बहस भी करा सकती है।
मंगल की चतुर्थ दृष्टि दशम भाव पर होने से करियर में तेजी आएगी, सप्तम दृष्टि लग्न पर होने से व्यक्तित्व और निर्णय क्षमता सक्रिय होगी और अष्टम दृष्टि द्वितीय भाव पर होने से धन तथा वाणी में सावधानी जरूरी होगी। कारोबार में पहल फायदेमंद हो सकती है, लेकिन समझौते लिखित और स्पष्ट रखना बेहतर होगा।
मंगल सिंह राशि में गोचर : मीन राशि पर प्रभाव -
मंगल द्वितीय और नवम भाव के स्वामी होकर षष्ठ भाव में गोचर करेंगे। षष्ठ भाव नौकरी, सेवा, प्रतियोगिता, कर्ज और विरोधियों का है। नवमेश का षष्ठ भाव में आना मेहनत के माध्यम से अवसर दिला सकता है, जबकि द्वितीयेश होने से धन और परिवार के मामलों का संबंध नौकरी या दैनिक काम से जुड़ सकता है।
मंगल की चतुर्थ दृष्टि नवम भाव पर भाग्य और उच्च शिक्षा को सक्रिय करेगी, सप्तम दृष्टि द्वादश भाव पर खर्च और विदेश के विषय बढ़ाएगी तथा अष्टम दृष्टि प्रथम भाव पर पड़ेगी। प्रतियोगिता में मेहनत का लाभ मिल सकता है, लेकिन स्वास्थ्य, क्रोध और अनावश्यक विवादों पर नियंत्रण रखना जरूरी होगा।
इस गोचर के फायदे-
मंगल का सिंह में गोचर नेतृत्व क्षमता, आत्मविश्वास और काम को तेजी से आगे बढ़ाने की इच्छा बढ़ा सकता है। करियर में नई जिम्मेदारी लेने, किसी रुके काम को पूरा करने और प्रतियोगी परिस्थितियों में अपना पक्ष मजबूत करने के लिए यह ऊर्जा उपयोगी हो सकती है।
तकनीकी काम, प्रशासन, खेल, प्रबंधन, भूमि-संपत्ति और ऐसे क्षेत्रों में जहां निर्णय लेकर तुरंत कार्रवाई करनी पड़ती है, मंगल की सक्रियता मदद कर सकती है। गुरु की मौजूदगी इस ऊर्जा को ज्ञान और योजना के साथ जोड़ने का अवसर दे सकती है।
12 नवंबर के बाद मंगल मघा नक्षत्र में भी रहेगा, जिसका स्वामी केतु है। इसलिए पुराने काम, पारिवारिक विरासत, अधिकार, प्रतिष्ठा और जीवन की दिशा से जुड़े कुछ विषयों पर व्यक्ति नए तरीके से विचार कर सकता है।
इस गोचर में किन बातों से सावधान रहें?
मंगल की ऊर्जा जब सिंह जैसी अग्नि राशि में आती है तो आत्मविश्वास कभी-कभी अहंकार और नेतृत्व कभी-कभी जिद का रूप ले सकता है। इसलिए वरिष्ठों, जीवनसाथी, कारोबारी साझेदार और परिवार के लोगों से बातचीत में जल्द प्रतिक्रिया देने से बचना होगा।
गुरु-केतु के साथ मंगल की स्थिति के कारण किसी निर्णय को बहुत सही मानकर उस पर तुरंत कार्रवाई करने की प्रवृत्ति भी बढ़ सकती है। खासकर धन, संपत्ति, साझेदारी और करियर से जुड़े बड़े फैसलों में जल्दबाजी ठीक नहीं होगी।
वाहन चलाते समय सावधानी, गुस्से पर नियंत्रण और विवाद की स्थिति में संयम इस अवधि में विशेष रूप से जरूरी रहेगा।
मंगल के सिंह राशि में गोचर के उपाय-
मंगलवार को हनुमान जी की पूजा और हनुमान चालीसा का पाठ करना उपयोगी उपाय माना जाता है। मंगलवार को लाल मसूर या गुड़ का दान भी किया जा सकता है। मंगल सिंह राशि में होने के कारण सूर्य से भी संबंध बना रहा है, इसलिए सुबह सूर्य को जल देना और नियमित दिनचर्या बनाए रखना अच्छा रहेगा।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
मंगल सिंह राशि में कब प्रवेश करेंगे?
मंगल 12 नवंबर 2026 को सिंह राशि में प्रवेश करेंगे। विभिन्न पंचांग गणनाओं में समय में थोड़ा अंतर मिलता है, लेकिन गोचर की तारीख 12 नवंबर है।
सिंह राशि में मंगल के साथ कौन-कौन से ग्रह रहेंगे?
मंगल के प्रवेश के समय सिंह राशि में गुरु और केतु भी मौजूद रहेंगे। इसलिए इस अवधि में तीनों ग्रहों की संयुक्त स्थिति महत्वपूर्ण रहेगी।
मंगल सिंह राशि से किन राशियों पर दृष्टि डालेंगे?
मंगल सिंह से अपनी चतुर्थ दृष्टि वृश्चिक, सप्तम दृष्टि कुंभ और अष्टम दृष्टि मीन राशि पर डालेंगे।
क्या मंगल का सिंह राशि में गोचर सभी राशियों के लिए शुभ रहेगा?
नहीं। मंगल का फल उसकी स्वामित्व स्थिति, गोचर भाव और दृष्टियों के अनुसार अलग-अलग होगा। कुछ राशियों के लिए करियर और आय में सक्रियता बढ़ेगी, जबकि कुछ को रिश्तों, खर्च या विवादों में सावधानी रखनी होगी।
मंगल सिंह राशि में कितने समय तक रहेंगे?
मंगल 12 नवंबर 2026 को सिंह राशि में प्रवेश करेंगे और मार्च 2027 में आगे बढ़ेंगे। इस दौरान जनवरी 2027 में मंगल वक्री भी होंगे, जिससे सिंह में उनका प्रभाव लंबा हो जाएगा।








