31 अक्टूबर 2026 को गुरु कर्क राशि से निकलकर सिंह राशि में प्रवेश करेंगे। सिंह राशि में पहले से मौजूद केतु के साथ गुरु की युति बनेगी, जो 5 दिसंबर तक रहेगी। इस दौरान ज्ञान, निर्णय, करियर, शिक्षा, रिश्तों और आध्यात्मिक सोच से जुड़े मामलों में बदलाव देखने को मिल सकते हैं।
सिंह राशि में गुरु-केतु की युति क्यों खास है?
गुरु ज्ञान, शिक्षा, धर्म, विस्तार, संतान, सलाह और विवेक से जुड़े ग्रह हैं, जबकि केतु वैराग्य, अलगाव, शोध, अंतर्मुखता और गहराई से जुड़े परिणाम देता है। दोनों का एक ही राशि में आना इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि गुरु जहां किसी विषय को बढ़ाने की कोशिश करते हैं, वहीं केतु उसी विषय से दूरी या भीतर की ओर जाने की प्रवृत्ति पैदा कर सकता है।
सिंह राशि सूर्य की राशि है और आत्मविश्वास, नेतृत्व, प्रतिष्ठा, सत्ता तथा रचनात्मक अभिव्यक्ति से जुड़ी है। इस दौरान गुरु मघा नक्षत्र में भी प्रवेश करेंगे, जिसके स्वामी केतु हैं। इसलिए इस युति में गुरु के साथ केतु का प्रभाव और गहरा हो जाता है।
गुरु-केतु की युति का 12 राशियों पर असर-
मेष राशि (Aries)
गुरु नवम और द्वादश भाव के स्वामी होकर पंचम भाव में गोचर करेंगे। पंचम भाव शिक्षा, संतान, प्रेम, बुद्धि और रचनात्मकता से जुड़ा है। नवमेश का पंचम भाव में आना भाग्य और ज्ञान के लिए अच्छा आधार बनाता है, जबकि द्वादश भाव का संबंध विदेश, आध्यात्मिकता और दूरस्थ अवसरों से जुड़ता है।
केतु की मौजूदगी के कारण प्रेम, संतान या पढ़ाई से जुड़े मामलों में मन की दिशा बदल सकती है और व्यक्ति सामान्य रास्ते के बजाय किसी अलग विषय की ओर आकर्षित हो सकता है। गुरु की दृष्टि लग्न, नवम और एकादश भाव पर पड़ेगी, जिससे आत्मविश्वास, भाग्य और आय के मामलों में भी अवसर बन सकते हैं। परिणाम कुल मिलाकर शुभ लेकिन भीतर से बदलाव वाला रहेगा।
वृषभ राशि (Taurus)
गुरु अष्टम और एकादश भाव के स्वामी होकर चतुर्थ भाव में रहेंगे। चतुर्थ भाव घर, संपत्ति, माता, सुख-सुविधा और मानसिक शांति का है। एकादशेश के चतुर्थ भाव में आने से घर या संपत्ति से जुड़े लाभ की संभावना बन सकती है, लेकिन अष्टमेश होने के कारण अचानक बदलाव भी सामने आ सकते हैं।
केतु इसी भाव में होने से घर बदलने, संपत्ति के निर्णय या पारिवारिक परिस्थितियों में मन का जुड़ाव कम हो सकता है। गुरु की दृष्टि अष्टम, दशम और द्वादश भाव पर पड़ेगी, इसलिए करियर में परिवर्तन, अचानक आर्थिक घटनाक्रम और विदेश या खर्च से जुड़े विषय सक्रिय रह सकते हैं। यह समय सावधानी के साथ आगे बढ़ने का है।
मिथुन राशि (Gemini)
गुरु सप्तम और दशम भाव के स्वामी होकर तृतीय भाव में गोचर करेंगे। तृतीय भाव प्रयास, साहस, संचार, लेखन, छोटे भाई-बहन और संपर्कों से जुड़ा है। गुरु का दशमेश होकर यहां आना करियर के लिए अपने प्रयास बढ़ाने का संकेत देता है, जबकि सप्तमेश होने से व्यापारिक साझेदारी और रिश्तों पर भी असर पड़ेगा।
केतु तृतीय भाव में होने से व्यक्ति अनावश्यक संपर्कों से दूरी बना सकता है और अपने काम पर अधिक ध्यान दे सकता है। गुरु की दृष्टि सप्तम, नवम और एकादश भाव पर रहेगी, इसलिए साझेदारी, भाग्य और आय के मामलों में अवसर बन सकते हैं। मेहनत का परिणाम मिलेगा, लेकिन संवाद में स्पष्टता बनाए रखना जरूरी होगा।
कर्क राशि (Cancer)
गुरु षष्ठ और नवम भाव के स्वामी होकर द्वितीय भाव में गोचर करेंगे। द्वितीय भाव धन, बचत, परिवार और वाणी से जुड़ा है। नवमेश का यहां आना आर्थिक मामलों में भाग्य का सहयोग दे सकता है, जबकि षष्ठेश होने से नौकरी, प्रतियोगिता और जिम्मेदारियों का संबंध भी जुड़ता है।
केतु के कारण परिवार या धन के मामलों में अनावश्यक भावनात्मक जुड़ाव कम हो सकता है और खर्च-बचत को लेकर सोच बदल सकती है। गुरु की दृष्टि षष्ठ, अष्टम और दशम भाव पर पड़ेगी, जिससे नौकरी, प्रतिस्पर्धा और करियर के मामलों में सक्रियता बढ़ेगी। धन के मामले में अवसर रहेंगे, लेकिन वाणी और वित्तीय फैसलों में संयम जरूरी होगा।
सिंह राशि (Leo)
गुरु पंचम और अष्टम भाव के स्वामी होकर आपकी राशि यानी प्रथम भाव में गोचर करेंगे। यह गोचर व्यक्तित्व, सोच, आत्मविश्वास और जीवन की दिशा को सीधे प्रभावित करेगा। पंचमेश का लग्न में आना शिक्षा, बुद्धि, रचनात्मकता और संतान से जुड़े विषयों को मजबूत कर सकता है, लेकिन अष्टमेश होने से भीतर से बड़े बदलाव की प्रक्रिया भी चल सकती है।
केतु की मौजूदगी इस प्रभाव को और गहरा करेगी, जिससे बाहरी उपलब्धियों के साथ भीतर से वैराग्य या आत्ममंथन बढ़ सकता है। गुरु की दृष्टि पंचम, सप्तम और नवम भाव पर होगी। प्रेम, विवाह, शिक्षा और भाग्य के मामलों में महत्वपूर्ण घटनाएं सामने आ सकती हैं, लेकिन बड़े निर्णय सोच-समझकर लेना बेहतर रहेगा।
कन्या राशि (Virgo)
गुरु चतुर्थ और सप्तम भाव के स्वामी होकर द्वादश भाव में गोचर करेंगे। द्वादश भाव खर्च, विदेश, यात्रा, एकांत और आध्यात्मिकता से जुड़ा है। सप्तमेश का द्वादश भाव में जाना रिश्तों और साझेदारी में दूरी या विदेश से जुड़ा अवसर दे सकता है, जबकि चतुर्थेश होने से घर-परिवार और संपत्ति से जुड़े खर्च बढ़ सकते हैं।
केतु यहां होने से व्यक्ति भौतिक सुख-सुविधाओं से कुछ दूरी महसूस कर सकता है और आध्यात्मिक या निजी विषयों में रुचि बढ़ सकती है। गुरु की दृष्टि चतुर्थ, षष्ठ और अष्टम भाव पर होगी। घर, नौकरी और अचानक आने वाले बदलावों पर ध्यान देना होगा। परिणाम मिश्रित रहेगा।
तुला राशि (Libra)
गुरु तृतीय और षष्ठ भाव के स्वामी होकर एकादश भाव में गोचर करेंगे। एकादश भाव आय, लाभ, मित्रों, नेटवर्क और इच्छाओं की पूर्ति का है। यहां गुरु की स्थिति कमाई और संपर्कों के लिए अवसर बना सकती है, जबकि तृतीयेश होने से अपने प्रयासों और संपर्कों का महत्व बढ़ेगा।
केतु के कारण मित्रों और सामाजिक दायरे में छंटनी हो सकती है; हर संपर्क उपयोगी नहीं लगेगा। गुरु की दृष्टि तृतीय, पंचम और सप्तम भाव पर पड़ेगी, जिससे संचार, प्रेम, शिक्षा और साझेदारी के विषय सक्रिय होंगे। नौकरी या कारोबार में नेटवर्क के माध्यम से लाभ मिल सकता है, लेकिन लाभ के साथ सही लोगों का चुनाव महत्वपूर्ण रहेगा।
वृश्चिक राशि (Scorpio)
गुरु द्वितीय और पंचम भाव के स्वामी होकर दशम भाव में गोचर करेंगे। दशम भाव करियर, कर्मक्षेत्र, पद और प्रतिष्ठा से जुड़ा है। पंचमेश का दशम भाव में आना शिक्षा, बुद्धि, रचनात्मकता और अपनी प्रतिभा को करियर से जोड़ सकता है। द्वितीयेश होने से धन और परिवार का संबंध भी कार्यक्षेत्र से जुड़ सकता है।
लेकिन केतु की मौजूदगी करियर की दिशा को लेकर भीतर से असंतोष या बदलाव की इच्छा पैदा कर सकती है।गुरु की दृष्टि द्वितीय, चतुर्थ और षष्ठ भाव पर होगी, जिससे धन, घर और नौकरी के मामलों में सक्रियता बढ़ेगी। करियर में अवसर मिल सकते हैं, लेकिन केवल प्रतिष्ठा के बजाय सही दिशा चुनना जरूरी होगा।
धनु राशि (Sagittarius)
गुरु प्रथम और चतुर्थ भाव के स्वामी होकर नवम भाव में गोचर करेंगे। नवम भाव भाग्य, धर्म, उच्च शिक्षा, गुरु, पिता और लंबी यात्राओं का है। अपने राशि स्वामी गुरु का नवम भाव में आना सामान्य तौर पर मजबूत स्थिति बनाता है और जीवन की दिशा में विस्तार का अवसर देता है।
केतु की मौजूदगी यहां व्यक्ति को परंपरागत सोच से हटकर ज्ञान या आध्यात्मिकता की ओर ले जा सकती है। गुरु की दृष्टि लग्न, तृतीय और पंचम भाव पर पड़ेगी, जिससे आत्मविश्वास, प्रयास, शिक्षा और रचनात्मकता को बल मिलेगा। हालांकि पिता, गुरु या किसी विचारधारा को लेकर मतभेद से बचना बेहतर रहेगा।
मकर राशि (Capricorn)
गुरु तृतीय और द्वादश भाव के स्वामी होकर अष्टम भाव में गोचर करेंगे। अष्टम भाव अचानक बदलाव, साझा धन, गुप्त विषय, शोध और जीवन के गहरे परिवर्तन से जुड़ा है। द्वादशेश का अष्टम भाव में होना खर्च और आर्थिक मामलों को अधिक जटिल बना सकता है, जबकि तृतीयेश होने से प्रयासों का परिणाम तुरंत मिलने के बजाय समय ले सकता है।
केतु की मौजूदगी अष्टम भाव के गहरे और रहस्यमय पक्ष को बढ़ा सकती है। गुरु की दृष्टि द्वादश, द्वितीय और चतुर्थ भाव पर होगी, इसलिए खर्च, बचत, परिवार और घर से जुड़े विषयों पर ध्यान देना होगा। जोखिम भरे आर्थिक फैसलों से बचना इस अवधि में बेहतर रहेगा।
कुंभ राशि (Aquarius)
गुरु द्वितीय और एकादश भाव के स्वामी होकर सप्तम भाव में गोचर करेंगे। सप्तम भाव विवाह, जीवनसाथी, व्यापारिक साझेदारी और सार्वजनिक संबंधों का है। द्वितीयेश और एकादशेश का सप्तम भाव में आना साझेदारी के माध्यम से धन और लाभ के अवसर बना सकता है। लेकिन केतु इसी भाव में होने से रिश्तों में दूरी, स्वतंत्रता की जरूरत या पुराने संबंधों की समीक्षा की स्थिति बन सकती है।
गुरु की दृष्टि एकादश, प्रथम और तृतीय भाव पर होगी, जिससे आय, व्यक्तित्व और संपर्कों को लाभ मिल सकता है। व्यापारिक साझेदारी में अवसर अच्छे रहेंगे, लेकिन बिना जांचे किसी समझौते पर आगे बढ़ना ठीक नहीं होगा।
मीन राशि (Pisces)
गुरु प्रथम और दशम भाव के स्वामी होकर षष्ठ भाव में गोचर करेंगे। षष्ठ भाव नौकरी, सेवा, प्रतियोगिता, कर्ज और विरोधियों से जुड़े मामलों का है। दशमेश का षष्ठ भाव में आना नौकरी और कार्यक्षेत्र में सक्रियता बढ़ा सकता है तथा प्रतिस्पर्धी परिस्थितियों में मेहनत का महत्व बढ़ेगा।
केतु यहां पुराने विवादों और अनावश्यक टकराव से दूरी बनाने की प्रवृत्ति दे सकता है। गुरु की दृष्टि दशम, द्वादश और द्वितीय भाव पर होगी, इसलिए करियर, खर्च और धन-संचय तीनों विषय सक्रिय रहेंगे। नौकरी या सेवा क्षेत्र में आगे बढ़ने के अवसर मिल सकते हैं, लेकिन काम का दबाव और आर्थिक प्राथमिकताओं को संतुलित रखना जरूरी होगा।
5 दिसंबर के बाद क्या बदलेगा?
5 दिसंबर 2026 को केतु सिंह राशि से निकलकर कर्क राशि में प्रवेश करेगा। इसके बाद सिंह राशि में गुरु अकेले रह जाएंगे और गुरु-केतु की सीधी युति समाप्त हो जाएगी। इसलिए 31 अक्टूबर से 5 दिसंबर तक का समय इस युति के प्रभाव को समझने के लिए अलग चरण माना जा सकता है।
इस अवधि में सबसे महत्वपूर्ण बात यह रहेगी कि गुरु जिस भाव में जाएंगे, वहां विस्तार और ज्ञान का विषय सक्रिय होगा, जबकि केतु उसी क्षेत्र में पुरानी सोच से दूरी या भीतर से बदलाव की इच्छा पैदा कर सकता है। इसलिए यह युति केवल लाभ या हानि के नजरिए से नहीं, बल्कि किस क्षेत्र में व्यक्ति की सोच और प्राथमिकताएं बदल रही हैं, इस दृष्टि से भी देखनी चाहिए।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
गुरु-केतु की युति 2026 कब बनेगी?
गुरु 31 अक्टूबर 2026 को सिंह राशि में प्रवेश करेंगे और वहां पहले से मौजूद केतु के साथ युति बनेगी।
गुरु-केतु की युति कब तक रहेगी?
यह युति 5 दिसंबर 2026 तक रहेगी। इसके बाद केतु सिंह राशि से निकलकर कर्क राशि में चला जाएगा।
गुरु-केतु की युति का सबसे बड़ा प्रभाव किस क्षेत्र पर होगा?
इसका प्रभाव व्यक्ति की चंद्र राशि या लग्न से सिंह राशि जिस भाव में पड़ती है, उस भाव से जुड़े मामलों पर सबसे अधिक देखा जाएगा। साथ ही गुरु की पंचम, सप्तम और नवम दृष्टि भी महत्वपूर्ण रहेगी।
क्या गुरु-केतु की युति सभी राशियों के लिए शुभ होगी?
नहीं। कुछ राशियों के लिए यह शिक्षा, करियर, आय या भाग्य में अवसर दे सकती है, जबकि कुछ के लिए रिश्तों, खर्च, मानसिक असमंजस या अचानक बदलाव की स्थिति बना सकती है।
गुरु-केतु की युति में मघा नक्षत्र का क्या महत्व है?
गुरु सिंह राशि में प्रवेश के साथ मघा नक्षत्र में आएंगे और मघा के स्वामी केतु हैं। इसलिए गुरु और केतु का संबंध इस अवधि में और गहरा हो जाता है।








