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वाल्मीकि रामायण, बालकाण्ड, सर्ग 11 : राजा दशरथ का सपरिवार अंगराज के यहाँ जाकर वहाँ से शान्ता और ऋष्यश्रृंग को अपने घर ले आना

वाल्मीकि रामायण के बालकाण्ड सर्ग 11 में राजा दशरथ अंगदेश जाकर राजा रोमपाद से मिलते हैं और ऋष्यश्रृंग मुनि को शान्ता सहित अयोध्या लाते हैं। जानिए इस प्रसंग की पूरी कथा।

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Valmiki Ramayan Bal Kand Sarg 11

वाल्मीकि रामायण के बालकाण्ड सर्ग 11 में सुमन्त्र द्वारा सुनाई गई सनत्कुमार की भविष्यवाणी के बाद राजा दशरथ अंगदेश जाते हैं। वहां राजा रोमपाद से मिलकर वे शान्ता और ऋष्यश्रृंग को अयोध्या ले आते हैं।

सनत्कुमार की भविष्यवाणी और राजा दशरथ का अंगदेश जाना-

सुमन्त्र ने जब राजा दशरथ को ऋष्यशृंग मुनि की अद्भुत कथा सुना दी, तब उन्होंने आगे एक और महत्वपूर्ण बात बताई। वे बोले, ‘राजन्! अब आप अपने हित की वह बात सुनिए, जो देवताओं में श्रेष्ठ और बुद्धिमान सनत्कुमारजी ने पूर्वकाल में ऋषियों को सुनाई थी।’ उन्होंने कहा था, ‘इक्ष्वाकु वंश में दशरथ नाम के एक परम धर्मात्मा और सत्यप्रतिज्ञ राजा होंगे। उनकी एक अत्यन्त सौभाग्यशालिनी कन्या होगी, जिसका नाम शान्ता होगा।’

आगे चलकर अंगदेश के राजा रोमपाद से उनका संबंध स्थापित होगा। उसी समय राजा दशरथ पुत्र की कामना से व्याकुल होकर रोमपाद से निवेदन करेंगे, ‘मैं संतानहीन हूँ। यदि आप अनुमति दें, तो आपकी पुत्री शान्ता के पति ऋष्यशृंग मेरे यहाँ आकर यज्ञ सम्पन्न करें, जिससे मुझे पुत्र प्राप्त हो सके और मेरे वंश की रक्षा हो जाए।’

सनत्कुमारजी के अनुसार, जब राजा दशरथ को ऋष्यशृंग मुनि प्राप्त होंगे, तब उनकी सारी चिन्ता दूर हो जाएगी। वे अत्यन्त प्रसन्न होकर यज्ञ का अनुष्ठान करेंगे और उन्हें चार ऐसे पुत्र प्राप्त होंगे, जो अद्वितीय पराक्रमी, मर्यादा-पालक और जगत में प्रसिद्ध होंगे। सुमन्त्र के मुख से यह दिव्य भविष्यवाणी सुनकर राजा दशरथ का हृदय आनंद से भर उठा। उन्हें ऐसा लगा मानो उनके जीवन की सबसे बड़ी चिंता अब समाप्त होने जा रही है।

तत्पश्चात् उन्होंने अपनी रानियों और मन्त्रियों के साथ अंगदेश की ओर प्रस्थान किया, जहाँ ऋष्यशृंग मुनि निवास करते थे। अंगदेश पहुँचने पर राजा रोमपाद ने अत्यन्त प्रसन्नता और स्नेह से अपने मित्र राजा दशरथ का स्वागत किया। उन्होंने शास्त्रविधि के अनुसार उनका आदर-सत्कार किया और ऋष्यशृंग मुनि को भी उनके आगमन का उद्देश्य बताया। ऋष्यशृंग मुनि ने भी विनम्रता से राजा दशरथ का सम्मान किया।

शान्ता और ऋष्यश्रृंग का अयोध्या आगमन-

इस प्रकार वहाँ सभी के बीच प्रेम और आदर का वातावरण बन गया। राजा दशरथ कुछ दिन (लगभग सात-आठ दिन) वहाँ अतिथि के रूप में ठहरे। इसके बाद उन्होंने विनम्रतापूर्वक ऋष्यशृंग को अपने साथ अयोध्या ले जाने का निवेदन किया। राजा रोमपाद ने इस प्रस्ताव को सहर्ष स्वीकार कर लिया। राजा की अनुमति लेकर ऋष्यशृंग अपनी पत्नी शान्ता के साथ अयोध्या के लिये प्रस्थान कर गये।

जब वे अयोध्या पहुँचे, तब शंख और दुन्दुभियों की मंगलध्वनि के साथ उनका भव्य स्वागत किया गया। सजे-धजे नगर में प्रवेश करते हुए वह दृश्य अत्यन्त मनोहारी था। राजा दशरथ ने उन्हें अन्तःपुर में ले जाकर शास्त्रानुसार पूजन किया। ऋष्यशृंग के आगमन से राजा स्वयं को कृतार्थ अनुभव करने लगे। जब रानियों ने शान्ता को अपने पति के साथ देखा, तो उनके हृदय में अपार हर्ष भर गया। सम्पूर्ण अन्तःपुर आनन्द और उत्साह से भर उठा।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)

1-वाल्मीकि रामायण बालकाण्ड सर्ग 11 में मुख्य प्रसंग क्या है?

बालकाण्ड सर्ग 11 में राजा दशरथ का अंगदेश जाना और शान्ता तथा ऋष्यशृंग मुनि को अयोध्या लाने का प्रसंग वर्णित है।

2-राजा दशरथ अंगदेश क्यों गए थे?

राजा दशरथ पुत्र प्राप्ति की इच्छा से ऋष्यशृंग मुनि को अयोध्या लाना चाहते थे, ताकि उनके द्वारा यज्ञ सम्पन्न कराया जा सके।

3-राजा रोमपाद ने दशरथ का स्वागत कैसे किया?

राजा रोमपाद ने अंगदेश में राजा दशरथ का प्रसन्नता और स्नेह के साथ स्वागत किया तथा शास्त्रविधि के अनुसार उनका आदर-सत्कार किया।

4-ऋष्यशृंग अयोध्या किसके साथ आए थे?

ऋष्यशृंग मुनि राजा रोमपाद की अनुमति लेकर अपनी पत्नी शान्ता के साथ अयोध्या आए थे।

5-अयोध्या पहुंचने पर शान्ता और ऋष्यशृंग का स्वागत कैसे हुआ?

अयोध्या पहुंचने पर शंख और दुन्दुभियों की मंगलध्वनि के साथ उनका भव्य स्वागत किया गया। राजा दशरथ ने उनका शास्त्रानुसार पूजन किया और अन्तःपुर में भी हर्ष का वातावरण छा गया।

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