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वाल्मीकि रामायण, बालकाण्ड, सर्ग 17 : ब्रह्माजी की प्रेरणा से देवता आदि के द्वारा विभिन्न वानरयूथपतियों की उत्पत्ति

वाल्मीकि रामायण बालकाण्ड सर्ग 17 में भगवान श्रीराम की सहायता के लिए ब्रह्माजी की प्रेरणा से विभिन्न देवताओं द्वारा वानर यूथपतियों की उत्पत्ति और उनके अद्भुत पराक्रम का वर्णन है।

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Valmiki Ramayan Bal Kand Sarg 17

भगवान विष्णु के श्रीराम रूप में अवतार लेने का निश्चय होने के बाद उनकी सहायता के लिए शक्तिशाली वानरवीरों की आवश्यकता हुई। ब्रह्माजी ने देवताओं को ऐसे पराक्रमी पुत्र उत्पन्न करने का आदेश दिया, जो रूप बदलने और युद्ध करने में सक्षम हों। इसी क्रम में वाली, सुग्रीव, हनुमान, नल, नील, जाम्बवान और अनेक महान वानरवीरों की उत्पत्ति हुई।

ब्रह्माजी ने देवताओं को क्या आदेश दिया?

यज्ञपुरुष द्वारा प्रदान की गई दिव्य खीर को ग्रहण करने के पश्चात् महाराज दशरथ की तीनों रानियों ने गर्भ धारण किया। जब भगवान् विष्णु ने महामनस्वी राजा दशरथ के पुत्ररूप में अवतार लेने का निश्चय कर लिया, तब सृष्टिकर्ता भगवान् ब्रह्माजी ने समस्त देवताओं को संबोधित करते हुए कहा, ‘भगवान् विष्णु सत्यप्रतिज्ञ, परम वीर और हम सबके हितकारी हैं।

अतः तुम सब उनके सहायकरूप में ऐसे पराक्रमी पुत्रों की सृष्टि करो, जो बलवान् हों, इच्छानुसार रूप धारण करने में समर्थ हों, माया के ज्ञाता, शूरवीर, वायु के समान तीव्र गति वाले, नीतिज्ञ, बुद्धिमान् तथा विष्णु के समान पराक्रमी हों। वे किसी से परास्त न हों, विविध उपायों के जानकार हों, दिव्य शरीरधारी तथा अमृत का सेवन करने वाले देवताओं के समान सभी अस्त्र-शस्त्रों में निपुण हों।’

ब्रह्माजी ने आगे कहा-‘प्रधान-प्रधान अप्सराओं, गन्धर्वों की स्त्रियों, यक्ष और नागों की कन्याओं, रीछों की स्त्रियों, विद्याधरियों, किन्नरियों तथा वानरियों के गर्भ से वानररूप में अपने ही समान पराक्रमी पुत्र उत्पन्न करो। मैं पहले ही ऋक्षराज जाम्बवान् की सृष्टि कर चुका हूँ। एक बार जब मैं जंभाई ले रहा था, उसी समय वह मेरे मुख से प्रकट हो गया था।’

वाली, सुग्रीव, हनुमान और अन्य वानरवीरों की उत्पत्ति कैसे हुई?

ब्रह्माजी के इस आदेश को सुनकर सभी देवताओं ने प्रसन्नतापूर्वक उसकी आज्ञा का पालन किया और वानररूप में अनेक अद्भुत पराक्रमी पुत्रों को उत्पन्न किया। देवराज इन्द्र ने वानरराज वाली को जन्म दिया, तो भगवान् सूर्य ने सुग्रीव को उत्पन्न किया। बृहस्पति से तार नामक महाबली वानर उत्पन्न हुआ और कुबेर के पुत्र के रूप में गन्धमादन प्रकट हुए।

विश्वकर्मा ने नल नामक महान् वानर को जन्म दिया, जबकि अग्निदेव से तेजस्वी नील का जन्म हुआ। रूप और वैभव से सम्पन्न अश्विनीकुमारों ने स्वयं ही मैन्द और द्विविद को उत्पन्न किया। वरुणदेव ने सुषेण नामक वानर को जन्म दिया और पर्जन्य ने महाबली शरभ को उत्पन्न किया। वायुदेव के औरस पुत्र के रूप में ऐश्वर्यशाली हनुमान प्रकट हुए। इस प्रकार हजारों-लाखों वानरों की उत्पत्ति हुई।

वानर यूथपतियों में कैसी थीं अद्भुत शक्तियां?

प्रत्येक देवता के रूप, वेष और पराक्रम के अनुसार ही उनके पुत्र भी उत्पन्न हुए। लंगूरों में उत्पन्न हुए देवपुत्र अपनी देवावस्था से भी अधिक पराक्रमी सिद्ध हुए। देवता, महर्षि, गन्धर्व, गरुड़, यक्ष, नाग, किम्पुरुष, सिद्ध और विद्याधर-इन सबने अत्यन्त हर्ष के साथ सहस्रों की संख्या में ऐसे वीर पुत्र उत्पन्न किये।

वे सभी वानर दर्प और बल में सिंह और व्याघ्रों के समान थे। वे पर्वतों की चट्टानों से प्रहार करते और विशाल पर्वतों को उठाकर युद्ध करते थे। उनके नख और दाँत भी शस्त्रों के समान कार्य करते थे। वे समस्त अस्त्र-शस्त्रों के ज्ञाता थे और इतनी शक्ति रखते थे कि पर्वतों को हिला दें तथा स्थिर वृक्षों को उखाड़ फेंकें। उनके भयंकर सिंहनाद से आकाश में उड़ते पक्षी भी नीचे गिर पड़ते थे।

वाली और सुग्रीव कैसे बने वानर समुदाय के प्रमुख?

ऐसे इच्छानुसार रूप धारण करने वाले, महाकाय और अद्भुत पराक्रमी वानर यूथपति करोड़ों की संख्या में उत्पन्न हुए। वे केवल वानरों के ही नहीं, अपितु अनेक यूथों के भी यूथपति थे। उनमें से सहस्रों वानर ऋक्षवान् पर्वत की ऊँची-ऊँची चोटियों पर निवास करने लगे, जबकि अन्य अनेक पर्वतों और घने वनों में बस गये।

इन्द्रपुत्र वाली और सूर्यनन्दन सुग्रीव- ये दोनों भाई समस्त वानर समुदाय के प्रमुख बने। सभी वानर यूथपति उनकी सेवा में उपस्थित रहते थे। इसके अतिरिक्त वे नल, नील, हनुमान तथा अन्य प्रमुख वानर नायकों का भी आश्रय ग्रहण करते थे। ये सभी गरुड़ के समान बलशाली और युद्धकला में पारंगत थे। वन में विचरते हुए वे सिंह, व्याघ्र और विशाल नागों को भी रौंद डालते थे।

वे वानर यूथपति मेघसमूहों और पर्वतशिखरों के समान विशालकाय थे। उनका बल अपार था और उनका रूप भयंकर प्रतीत होता था। भगवान् श्रीराम की सहायता के लिये प्रकट हुए इन महान् वानरवीरों से सम्पूर्ण पृथ्वी मानो परिपूर्ण हो गयी थी।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)

1-वाल्मीकि रामायण बालकाण्ड सर्ग 17 में किसकी उत्पत्ति का वर्णन है?

इस सर्ग में भगवान श्रीराम की सहायता के लिए उत्पन्न हुए विभिन्न वानर यूथपतियों और वीरों की उत्पत्ति का वर्णन है।

2-वाली और सुग्रीव की उत्पत्ति किससे हुई थी?

इन्द्रपुत्र के रूप में वाली और सूर्यनन्दन के रूप में सुग्रीव की उत्पत्ति हुई थी।

3-हनुमान जी की उत्पत्ति किस देवता के पुत्र के रूप में हुई?

हनुमान जी वायुदेव के औरस पुत्र के रूप में प्रकट हुए थे।

4-नल और नील की उत्पत्ति किन देवताओं से हुई थी?

नल की उत्पत्ति विश्वकर्मा से और नील की उत्पत्ति अग्निदेव से हुई थी।

5-वानरवीरों की उत्पत्ति क्यों की गई थी?

पौराणिक कथाओं के अनुसार भगवान श्रीराम की सहायता और उनके उद्देश्य की पूर्ति के लिए अनेक पराक्रमी वानरवीरों की उत्पत्ति की गई थी।

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