|| ज्ञान का महासागर ||

बालकाण्ड में श्रीराम के जन्म, बाल लीलाओं और सीता स्वयंवर का वर्णन है।

बालकाण्ड में राजा दशरथ के पुत्रेष्टि यज्ञ, श्रीराम सहित चारों भाइयों के जन्म, विश्वामित्र के साथ वनगमन, राक्षस-वध और सीता स्वयंवर की कथा आती है।

बालकाण्ड
वाल्मीकि रामायण, बालकाण्ड, सर्ग 25 : ताटका की उत्पत्ति, विवाह एवं शाप आदि का प्रसंग

वाल्मीकि रामायण

वाल्मीकि रामायण, बालकाण्ड, सर्ग 25 : ताटका की उत्पत्ति, विवाह एवं शाप आदि का प्रसंग

वाल्मीकि रामायण बालकाण्ड सर्ग 25 में ताटका की उत्पत्ति, सुकेतु से प्राप्त वरदान, सुन्द से विवाह, मारीच का जन्म, अगस्त्य ऋषि का शाप और श्रीराम को ताटका वध की आज्ञा का प्रसंग है।

वाल्मीकि रामायण, बालकाण्ड, सर्ग 24 : सरयू नदी, मलद, करूष एवं ताटका वन का परिचय- ताटका वध की आज्ञा

वाल्मीकि रामायण

वाल्मीकि रामायण, बालकाण्ड, सर्ग 24 : सरयू नदी, मलद, करूष एवं ताटका वन का परिचय- ताटका वध की आज्ञा

वाल्मीकि रामायण बालकाण्ड सर्ग 24 में सरयू-गंगा संगम, मलद-करूष जनपद, ताटका वन और श्रीराम को ताटका वध की आज्ञा मिलने का प्रसंग है।

वाल्मीकि रामायण, बालकाण्ड, सर्ग 23 : सरयू-गंगा संगम के पवित्र आश्रम में श्रीराम और लक्ष्मण का विश्राम

वाल्मीकि रामायण

वाल्मीकि रामायण, बालकाण्ड, सर्ग 23 : सरयू-गंगा संगम के पवित्र आश्रम में श्रीराम और लक्ष्मण का विश्राम

वाल्मीकि रामायण,बालकाण्ड, सर्ग 23 में श्रीराम और लक्ष्मण का विश्वामित्र के साथ सरयू-गंगा संगम पहुंचना, पवित्र आश्रम में रात्रि विश्राम और कामदेव से जुड़ी कथा का वर्णन है।

वाल्मीकि रामायण, बालकाण्ड , सर्ग 22 : राम का विश्वामित्र के साथ जाना और विश्वामित्र से बला और अतिबला नामक विद्या की प्राप्ति

वाल्मीकि रामायण

वाल्मीकि रामायण, बालकाण्ड , सर्ग 22 : राम का विश्वामित्र के साथ जाना और विश्वामित्र से बला और अतिबला नामक विद्या की प्राप्ति

वाल्मीकि रामायण के बालकाण्ड के सर्ग 22 में श्रीराम और लक्ष्मण का विश्वामित्र के साथ प्रस्थान, बला-अतिबला विद्या की प्राप्ति और सरयू तट पर रात्रि विश्राम का प्रसंग है।

वाल्मीकि रामायण, बालकाण्ड, सर्ग 21 : विश्वामित्र के क्रोध से क्यों घबराए दशरथ? वसिष्ठ ने समझाया धर्म का मार्ग

वाल्मीकि रामायण

वाल्मीकि रामायण, बालकाण्ड, सर्ग 21 : विश्वामित्र के क्रोध से क्यों घबराए दशरथ? वसिष्ठ ने समझाया धर्म का मार्ग

वाल्मीकि रामायण बालकाण्ड सर्ग 21 में विश्वामित्र के रोषपूर्ण वचन, वसिष्ठ द्वारा राजा दशरथ को दिया धर्म और वचन पालन का उपदेश तथा श्रीराम को विश्वामित्र के साथ भेजने का निर्णय बताया गया है।

वाल्मीकि रामायण, बालकाण्ड, सर्ग 20 : राजा दशरथ का विश्वामित्र को अपना पुत्र देने से इनकार करना और विश्वामित्र का कुपित होना

वाल्मीकि रामायण

वाल्मीकि रामायण, बालकाण्ड, सर्ग 20 : राजा दशरथ का विश्वामित्र को अपना पुत्र देने से इनकार करना और विश्वामित्र का कुपित होना

वाल्मीकि रामायण बालकाण्ड सर्ग 20 में राजा दशरथ श्रीराम को विश्वामित्र के साथ भेजने से इनकार करते हैं। जानिए दशरथ की चिंता, रावण का प्रभाव और विश्वामित्र के क्रोध की कथा।

वाल्मीकि रामायण, बालकाण्ड, सर्ग 19 : विश्वामित्र के मुख से श्रीराम को साथ ले जाने की माँग सुनकर राजा दशरथ का दुःखित एवं मूर्च्छित होना

वाल्मीकि रामायण

वाल्मीकि रामायण, बालकाण्ड, सर्ग 19 : विश्वामित्र के मुख से श्रीराम को साथ ले जाने की माँग सुनकर राजा दशरथ का दुःखित एवं मूर्च्छित होना

वाल्मीकि रामायण बालकाण्ड सर्ग 19 में विश्वामित्र राजा दशरथ से यज्ञ की रक्षा के लिए श्रीराम को साथ ले जाने की मांग करते हैं, जिसे सुनकर दशरथ पुत्र-वियोग के भय से मूर्छित हो जाते हैं।

वाल्मीकि रामायण, बालकाण्ड, सर्ग 18 : श्रीराम, भरत, लक्ष्मण तथा शत्रुघ्न के जन्म ! राजा के दरबार में विश्वामित्र का आगमन और उनका सत्कार

वाल्मीकि रामायण

वाल्मीकि रामायण, बालकाण्ड, सर्ग 18 : श्रीराम, भरत, लक्ष्मण तथा शत्रुघ्न के जन्म ! राजा के दरबार में विश्वामित्र का आगमन और उनका सत्कार

वाल्मीकि रामायण बालकाण्ड सर्ग 18 में श्रीराम, भरत, लक्ष्मण और शत्रुघ्न के जन्म, नामकरण, बाल्यकाल और महर्षि विश्वामित्र के अयोध्या आगमन का वर्णन है।

वाल्मीकि रामायण, बालकाण्ड, सर्ग 17 : ब्रह्माजी की प्रेरणा से देवता आदि के द्वारा विभिन्न वानरयूथपतियों की उत्पत्ति

वाल्मीकि रामायण

वाल्मीकि रामायण, बालकाण्ड, सर्ग 17 : ब्रह्माजी की प्रेरणा से देवता आदि के द्वारा विभिन्न वानरयूथपतियों की उत्पत्ति

वाल्मीकि रामायण बालकाण्ड सर्ग 17 में भगवान श्रीराम की सहायता के लिए ब्रह्माजी की प्रेरणा से विभिन्न देवताओं द्वारा वानर यूथपतियों की उत्पत्ति और उनके अद्भुत पराक्रम का वर्णन है।

वाल्मीकि रामायण, बालकाण्ड , सर्ग 16 : श्रीहरि का अवतार संकल्प और पुत्रेष्टि यज्ञ से मिली दिव्य खीर

वाल्मीकि रामायण

वाल्मीकि रामायण, बालकाण्ड , सर्ग 16 : श्रीहरि का अवतार संकल्प और पुत्रेष्टि यज्ञ से मिली दिव्य खीर

वाल्मीकि रामायण बालकाण्ड सर्ग 16 में रावण वध के लिए भगवान विष्णु के मनुष्य रूप में अवतार लेने का संकल्प, दशरथ की पुत्रेष्टि यज्ञ और दिव्य खीर मिलने का प्रसंग है।

वाल्मीकि रामायण, बालकाण्ड, सर्ग 15 : ऋष्यशृंग द्वारा राजा दशरथ के पुत्रेष्टि यज्ञ का आरम्भ, ब्रह्माजी का रावण के वध का उपाय ढूँढ़ निकालना

वाल्मीकि रामायण

वाल्मीकि रामायण, बालकाण्ड, सर्ग 15 : ऋष्यशृंग द्वारा राजा दशरथ के पुत्रेष्टि यज्ञ का आरम्भ, ब्रह्माजी का रावण के वध का उपाय ढूँढ़ निकालना

वाल्मीकि रामायण बालकाण्ड सर्ग 15 में ऋष्यशृंग ने दशरथ के पुत्रेष्टि यज्ञ का आरम्भ किया। इसी समय ब्रह्मा ने रावण वध का उपाय बताया और भगवान विष्णु के अवतार का संकल्प हुआ।

वाल्मीकि रामायण, बालकाण्ड, सर्ग 14 : महाराज दशरथ के द्वारा अश्वमेध यज्ञ का अनुष्ठान करना

वाल्मीकि रामायण

वाल्मीकि रामायण, बालकाण्ड, सर्ग 14 : महाराज दशरथ के द्वारा अश्वमेध यज्ञ का अनुष्ठान करना

वाल्मीकि रामायण बालकाण्ड सर्ग 14 में महाराज दशरथ के अश्वमेध यज्ञ की पूर्णाहुति, ब्राह्मणों को दान और ऋष्यशृंग द्वारा चार पुत्रों के जन्म का आशीर्वाद देने का प्रसंग है।