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बालकाण्ड में श्रीराम के जन्म, बाल लीलाओं और सीता स्वयंवर का वर्णन है।

बालकाण्ड में राजा दशरथ के पुत्रेष्टि यज्ञ, श्रीराम सहित चारों भाइयों के जन्म, विश्वामित्र के साथ वनगमन, राक्षस-वध और सीता स्वयंवर की कथा आती है।

बालकाण्ड
वाल्मीकि रामायण, बालकाण्ड, सर्ग 13 : यज्ञ में राजाओं को बुलाने के आदेश तथा पत्नियों सहित राजा दशरथ का यज्ञ की दीक्षा लेना

वाल्मीकि रामायण

वाल्मीकि रामायण, बालकाण्ड, सर्ग 13 : यज्ञ में राजाओं को बुलाने के आदेश तथा पत्नियों सहित राजा दशरथ का यज्ञ की दीक्षा लेना

वाल्मीकि रामायण बालकाण्ड सर्ग 13 में राजा दशरथ के अश्वमेध यज्ञ की तैयारियों, राजाओं को निमंत्रण देने और पत्नियों सहित यज्ञ की दीक्षा लेने का प्रसंग है।

वाल्मीकि रामायण, बालकाण्ड, सर्ग 12 : ऋषियों का दशरथ को और दशरथ का मन्त्रियों को यज्ञ की आवश्यक तैयारी करने के लिये आदेश देना

वाल्मीकि रामायण

वाल्मीकि रामायण, बालकाण्ड, सर्ग 12 : ऋषियों का दशरथ को और दशरथ का मन्त्रियों को यज्ञ की आवश्यक तैयारी करने के लिये आदेश देना

वाल्मीकि रामायण बालकाण्ड सर्ग 12 में ऋष्यशृंग ने राजा दशरथ को पुत्र-प्राप्ति यज्ञ की तैयारी का आदेश दिया। दशरथ ने मंत्रियों को यज्ञ की सभी आवश्यक व्यवस्थाएं करने को कहा।

वाल्मीकि रामायण, बालकाण्ड, सर्ग 11 : राजा दशरथ का सपरिवार अंगराज के यहाँ जाकर वहाँ से शान्ता और ऋष्यश्रृंग को अपने घर ले आना

वाल्मीकि रामायण

वाल्मीकि रामायण, बालकाण्ड, सर्ग 11 : राजा दशरथ का सपरिवार अंगराज के यहाँ जाकर वहाँ से शान्ता और ऋष्यश्रृंग को अपने घर ले आना

वाल्मीकि रामायण के बालकाण्ड सर्ग 11 में राजा दशरथ अंगदेश जाकर राजा रोमपाद से मिलते हैं और ऋष्यश्रृंग मुनि को शान्ता सहित अयोध्या लाते हैं। जानिए इस प्रसंग की पूरी कथा।

वाल्मीकि रामायण, बालकाण्ड, सर्ग 10 : अंगदेश में ऋष्यश्रृंग के आने तथा शान्ता के साथ विवाह होने के प्रसंग का वर्णन

वाल्मीकि रामायण

वाल्मीकि रामायण, बालकाण्ड, सर्ग 10 : अंगदेश में ऋष्यश्रृंग के आने तथा शान्ता के साथ विवाह होने के प्रसंग का वर्णन

वाल्मीकि रामायण के बालकाण्ड सर्ग 10 में ऋष्यशृंग मुनि को अंगदेश लाने, उनके आगमन पर वर्षा होने और राजा रोमपाद द्वारा पुत्री शान्ता से उनका विवाह कराने का वर्णन है।

वाल्मीकि रामायण, बालकाण्ड, सर्ग 9 :  सुमन्त्र का दशरथ को ऋष्यशृंग मुनि को बुलाने की सलाह और शान्ता से विवाह का प्रसंग सुनाना

वाल्मीकि रामायण

वाल्मीकि रामायण, बालकाण्ड, सर्ग 9 : सुमन्त्र का दशरथ को ऋष्यशृंग मुनि को बुलाने की सलाह और शान्ता से विवाह का प्रसंग सुनाना

वाल्मीकि रामायण के बालकाण्ड सर्ग 9 में सुमन्त्र राजा दशरथ को ऋष्यशृंग मुनि की कथा सुनाते हैं और बताते हैं कि शान्ता से उनके विवाह तथा पुत्रेष्टि यज्ञ से पुत्र प्राप्ति का मार्ग कैसे जुड़ा था।

वाल्मीकि रामायण, बालकाण्ड, सर्ग 8 : राजा दशरथ का पुत्र के लिये अश्वमेधयज्ञ का प्रस्ताव और मन्त्रियों तथा ब्राह्मणों द्वारा उनका अनुमोदन

वाल्मीकि रामायण

वाल्मीकि रामायण, बालकाण्ड, सर्ग 8 : राजा दशरथ का पुत्र के लिये अश्वमेधयज्ञ का प्रस्ताव और मन्त्रियों तथा ब्राह्मणों द्वारा उनका अनुमोदन

वाल्मीकि रामायण के बालकाण्ड सर्ग 8 में पुत्र प्राप्ति की इच्छा से राजा दशरथ द्वारा अश्वमेध यज्ञ का प्रस्ताव रखने और ऋषियों तथा मंत्रियों द्वारा उसका अनुमोदन करने का वर्णन है।

वाल्मीकि रामायण, बालकाण्ड, सर्ग 7 : राजा दशरथ के आठ राजमन्त्रियों के गुण और नीति का वर्णन

वाल्मीकि रामायण

वाल्मीकि रामायण, बालकाण्ड, सर्ग 7 : राजा दशरथ के आठ राजमन्त्रियों के गुण और नीति का वर्णन

वाल्मीकि रामायण के बालकाण्ड सर्ग 7 में राजा दशरथ की मंत्रिपरिषद के गुण, नीति, न्याय, गुप्तचर व्यवस्था और राज्य संचालन में मंत्रियों की महत्वपूर्ण भूमिका का विस्तार से वर्णन है।

वाल्मीकि रामायण, बालकाण्ड , सर्ग 6 : राजा दशरथ के शासनकाल में अयोध्या और वहाँ के नागरिकों की उत्तम स्थिति का वर्णन

वाल्मीकि रामायण

वाल्मीकि रामायण, बालकाण्ड , सर्ग 6 : राजा दशरथ के शासनकाल में अयोध्या और वहाँ के नागरिकों की उत्तम स्थिति का वर्णन

वाल्मीकि रामायण के बालकाण्ड सर्ग 6 में राजा दशरथ के शासनकाल की अयोध्या का वर्णन है, जहां प्रजा समृद्ध, धर्मपरायण, संतुष्ट और भयमुक्त जीवन जीती थी।

वाल्मीकि रामायण, बालकाण्ड , सर्ग 5 : राजा दशरथ द्वारा सुरक्षित अयोध्यापुरी का वर्णन

वाल्मीकि रामायण

वाल्मीकि रामायण, बालकाण्ड , सर्ग 5 : राजा दशरथ द्वारा सुरक्षित अयोध्यापुरी का वर्णन

वाल्मीकि रामायण के बालकाण्ड सर्ग 5 में राजा दशरथ के समय अयोध्या नगरी के वैभव, समृद्धि, राजमार्ग, उद्यान, संस्कृति और धर्मपरायण निवासियों का सुंदर वर्णन मिलता है।

वाल्मीकि रामायण, बालकाण्ड, सर्ग 4 : महर्षि वाल्मीकि का रामायण का निर्माण करना , लव-कुश का अयोध्या में रामायण गान सुनाना

वाल्मीकि रामायण

वाल्मीकि रामायण, बालकाण्ड, सर्ग 4 : महर्षि वाल्मीकि का रामायण का निर्माण करना , लव-कुश का अयोध्या में रामायण गान सुनाना

वाल्मीकि रामायण के बालकाण्ड सर्ग 4 में महर्षि वाल्मीकि ने लव-कुश को रामायण का अध्ययन कराया। दोनों ने अयोध्या में श्रीराम और उनकी सभा के सामने मधुर स्वर में रामायण का गान सुनाया।

वाल्मीकि रामायण , बालकाण्ड , सर्ग 3 : महर्षि वाल्मीकि के द्वारा रामायण काव्य को पूर्ण करना

वाल्मीकि रामायण

वाल्मीकि रामायण , बालकाण्ड , सर्ग 3 : महर्षि वाल्मीकि के द्वारा रामायण काव्य को पूर्ण करना

वाल्मीकि रामायण के बालकाण्ड सर्ग 3 में महर्षि वाल्मीकि ने योगबल और दिव्य दृष्टि से श्रीराम के संपूर्ण जीवन का साक्षात्कार किया और 24,000 श्लोकों वाले महाकाव्य की रचना की।

वाल्मीकि रामायण ,बालकाण्ड , सर्ग 2 : क्रौञ्चवध से संतप्त हुए महर्षि वाल्मीकि, ब्रह्माजी का उन्हें रामचरित्रमय काव्य के निर्माण का आदेश देना

वाल्मीकि रामायण

वाल्मीकि रामायण ,बालकाण्ड , सर्ग 2 : क्रौञ्चवध से संतप्त हुए महर्षि वाल्मीकि, ब्रह्माजी का उन्हें रामचरित्रमय काव्य के निर्माण का आदेश देना

वाल्मीकि रामायण के बालकाण्ड सर्ग 2 में क्रौञ्चवध से महर्षि वाल्मीकि के मुख से पहला श्लोक निकला। इसके बाद ब्रह्माजी ने उन्हें श्रीराम के चरित्र पर महाकाव्य रचने का आदेश दिया।