ताटका वन के समीप पहुँचकर श्रीराम के मन में एक जिज्ञासा उत्पन्न हुई। उन्होंने विनम्र भाव से महर्षि विश्वामित्र से पूछा, “भगवन्! यह यक्षिणी ताटका स्त्री कही जाती है। सामान्यतः स्त्रियाँ अबला मानी जाती हैं, फिर उसमें एक हजार हाथियों का बल कैसे संभव है?
ताटका की उत्पत्ति और ब्रह्माजी से मिला वरदान-
महातेजस्वी श्रीराम के इस प्रश्न को सुनकर विश्वामित्रजी ने शांत और गंभीर स्वर में उत्तर दिया- “हे राम! प्राचीन काल में सुकेतु नाम के एक महान यक्ष थे। वे पराक्रमी और धर्मशील थे, किंतु उन्हें संतान का सुख प्राप्त नहीं था। इस कारण उन्होंने कठोर तपस्या की। उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर ब्रह्माजी ने उन्हें एक कन्या प्रदान की, जिसका नाम ताटका था।
उसी समय ब्रह्माजी ने उसे एक हजार हाथियों के समान बल भी दे दिया। हालांकि उन्होंने सुकेतु को पुत्र का वरदान नहीं दिया, पर यह कन्या असाधारण शक्ति से सम्पन्न थी।
धीरे-धीरे वह बालिका युवती बनी और रूप-यौवन से युक्त होकर अत्यंत सुंदर हो गई। तब सुकेतु ने उसका विवाह दैत्य जंभ के पुत्र सुन्द के साथ कर दिया। कुछ समय बाद ताटका ने मारीच नामक एक पुत्र को जन्म दिया, जो आगे चलकर अत्यंत पराक्रमी हुआ।”
अगस्त्य ऋषि के शाप से ताटका बनी राक्षसी-
विश्वामित्र ने आगे कहा, “एक समय अगस्त्य मुनि के शाप से मारीच राक्षस बन गया। उसी प्रकार अगस्त्यजी ने ताटका के पति सुन्द को भी शाप देकर नष्ट कर दिया। अपने पति की मृत्यु से क्रोधित होकर ताटका अपने पुत्र के साथ अगस्त्य मुनि को मारने के लिए दौड़ी।
वह गर्जना करती हुई उन्हें भक्षण करने के लिए आगे बढ़ी। तब महर्षि अगस्त्य ने मारीच को शाप दिया, ‘तू अपनी देवयोनि त्यागकर राक्षस रूप को प्राप्त हो जा।’ और ताटका से कहा, ‘तू अपने इस सुंदर रूप को त्यागकर विकराल मुख वाली नरभक्षिणी राक्षसी बन जा।"
इस प्रकार शाप के कारण ताड़का का क्रोध और भी बढ़ गया। वह अत्यंत उग्र होकर उस सुंदर प्रदेश को उजाड़ने लगी, जहाँ पहले सुख और समृद्धि थी। उसने मलद और करूष जैसे समृद्ध जनपदों को भी नष्ट कर डाला।
विश्वामित्र ने श्रीराम को ताटका वध के लिए क्यों प्रेरित किया?
हे रघुनन्दन! यह ताटका अब महापापिनी बन चुकी है। इसमें धर्म का लेशमात्र भी नहीं है। तीनों लोकों में इसे मारने की शक्ति केवल तुममें ही है। अतः मेरी आज्ञा से इसका वध करो और इस प्रदेश को पुनः भयमुक्त बनाओ।
विश्वामित्रजी ने आगे धर्म का उदाहरण देते हुए कहा, “हे राम! प्राचीन काल में भी महान पुरुषों ने धर्म की रक्षा के लिए कठोर निर्णय लिए हैं। विरोचन की पुत्री मन्थरा जब पृथ्वी का विनाश करने पर तुली, तब इन्द्र ने उसका वध किया।
इसी प्रकार शुक्राचार्य की माता, जो भृगु की पतिव्रता पत्नी थीं, जब तीनों लोकों को इन्द्र से शून्य करना चाहती थीं, तब भगवान विष्णु ने उनका भी संहार किया।
इसलिए, हे नरेश्वर! जब कोई स्त्री भी अधर्म और हिंसा का मार्ग अपनाकर लोक-कल्याण के विपरीत कार्य करती है, तब उसका वध करना ही धर्म होता है। अतः तुम दया या मोह को त्यागकर इस दुष्ट राक्षसी का अंत करो।”
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
ताटका के पिता का नाम क्या था?
ताटका के पिता का नाम सुकेतु था। वे एक महान यक्ष थे।
ताटका को एक हजार हाथियों का बल कैसे मिला?
सुकेतु की तपस्या से प्रसन्न होकर ब्रह्माजी ने ताटका को एक हजार हाथियों के समान बल प्रदान किया था।
ताटका का विवाह किससे हुआ था?
ताटका का विवाह दैत्य जंभ के पुत्र सुन्द के साथ हुआ था। उनसे मारीच नाम का पुत्र पैदा हुआ।
ताटका और मारीच को राक्षस बनने का शाप किसने दिया था?
महर्षि अगस्त्य ने मारीच को राक्षस रूप में जाने और ताटका को विकराल मुख वाली नरभक्षिणी राक्षसी बनने का शाप दिया था।
महर्षि विश्वामित्र ने श्रीराम को ताटका का वध करने के लिए क्या कहा?
विश्वामित्र ने श्रीराम को बताया कि ताटका अधर्म और हिंसा का मार्ग अपना चुकी है। उन्होंने श्रीराम को उसका अंत करके प्रदेश को भयमुक्त बनाने की आज्ञा दी।









