सतयुग में एक ब्राह्मण हुआ करते थे जिनका नाम था सोमदत्त। वह ब्राह्मण सौदास के नाम से भी विख्यात से। उस ब्राह्मण ने ब्रह्मावादी गौतम मुनि से गंगा जी के मनोरम तट पर संपूर्ण धर्मों का उपदेश सुना था। सौदास को शास्त्रों की कथाओं का बहुत ज्ञान था। सौदास रोज कथाओं का श्रवण करते थे और उन्हें धर्म का ज्ञान था।
सोमदत्त (सौदास) से शिव क्यों हुए नाराज?
एक दिन की बात है, ब्राह्मण सौदास महादेव की आराधना में लगे हुए थे। उसी समय वहां उनके गुरु यानी कि गौतम ऋषि आ पहुंचे लेकिन सौदास ने अपने करीब आए गुरु को उठकर प्रणाम नहीं किया।
परम बुद्धिमान गौतम ऋषि तो उनके इस व्यवहार से नाराज नहीं हुए बल्कि उन्हें यह जानकर खुशी हुई कि मेरा शिष्य शास्त्र में जो विधि विधान बताए गए हैं उन्हीं के हिसाब से कर्मों का अनुष्ठान कर रहा है।
लेकिन सौदास, जिस महादेव की आराधना कर रहा था वह महादेव गुरु की अवहेलना से नाराज हो गए। उन्होंने सौदास को उसी समय श्राप दिया कि तुम असुर हो जाओगे। सौदास घबरा गया।
उन्होंने अपने गुरु गौतम ऋषि से कहा कि हे प्रभु ! मैं कैसे मुक्त होऊंगा ? गौतम ने कहा कि सौदास तुम चिंता मत करो। कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष में तुम रामायण की अमृत कथा को सुनना। ऐसा करने से महादेव का श्राप अधिक वर्षों तक नहीं रहेगा केवल 12 वर्षों तक ही रहेगा।
असुर योनि में भटकते रहे सोमदत्त-
गौतम ऋषि सौदास को यह कहकर वहां से चले गए। दूसरी और सोमदत्त दुख मग्न होकर राक्षस शरीर का आश्रय लेने लगा। वह हमेशा भूख प्यास से पीड़ित रहता, उसे बहुत क्रोध आता और वह निर्जन वन में भ्रमण करता हुआ हिंसक हो गया था। एक दिन उसने गर्ग ऋषि को वहां से जाते हुए देखा। वह प्रभु श्री राम के नाम का गान कर रहे थे।
गर्ग मुनि को आते देख राक्षस ने कहा कि आज तो मुझे भोजन प्राप्त हो गया। ऐसा कहकर वह मुनि को खाने के लिए दौड़ा लेकिन वह उनका कुछ बिगाड़ नहीं पाया। सौदास ने कहा कि मैंने बहुत लोगों को मारा है लेकिन मैं आप का कुछ नहीं बिगाड़ पा रहा क्योंकि आपके पास राम नाम का आश्रय है।
गर्ग मुनि ने रामकथा सुनाकर कैसे किया उद्धार?
हे प्रभु ! मेरे गुरु गौतम ऋषि ने मुझसे कहा था कि तुम्हें कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष में राम कथा सुननी चाहिए जिससे कि भगवान शिव के श्राप से मुक्ति मिल सके.
सोमदत्त ने गर्ग मुनि से रामायण की कथा सुनाने का निवेदन किया। श्री रामचंद्र जी के ध्यान में तत्पर रहने वाले मनुष्यों को कौन बाधा पहुंचा सकता है? रामायण जो सुनता है वहां साक्षात ब्रह्मा, विष्णु और शिव विराजमान होते हैं।
कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष में 9 दिनों तक गर्ग मुनि ने सोमदत्त को राम कथा सुनाई कथा सुनते ही उसका असुरत्व दूर हो गया। वह देवताओं के समान सुंदर हो गया और भगवान नारायण के समान कांतिमान हो गया।
अपनी चारों भुजाओं में शंख चक्र गदा और पद्म लिए वह भगवान विष्णु के बैकुंठ धाम को चला गया। वह ब्राह्मण गर्ग मुनि की भूरी भूरी प्रशंसा करता हुआ भगवान के उत्तम धाम में जा पहुंचा।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
सोमदत्त (सौदास) को असुर योनि क्यों मिली थी?
महादेव की आराधना करते समय उन्होंने अपने गुरु गौतम ऋषि के आने पर उनका अभिवादन नहीं किया। गुरु की अवहेलना से नाराज होकर महादेव ने उन्हें असुर होने का शाप दिया।
सोमदत्त को शाप से मुक्ति का उपाय किसने बताया था?
गौतम ऋषि ने उन्हें कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष में रामायण की अमृत कथा सुनने का उपाय बताया था।
गर्ग मुनि ने सोमदत्त को कितने दिनों तक रामकथा सुनाई?
गर्ग मुनि ने कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष में लगातार नौ दिनों तक सोमदत्त को रामकथा सुनाई।
रामकथा सुनने से सोमदत्त पर क्या प्रभाव पड़ा?
रामकथा सुनते ही उनका असुरत्व दूर हो गया और वे देवताओं के समान सुंदर तथा भगवान नारायण के समान कांतिमान हो गए।
सोमदत्त को अंत में किस धाम की प्राप्ति हुई?
रामकथा के प्रभाव से सोमदत्त को भगवान विष्णु के बैकुंठ धाम की प्राप्ति हुई।








