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नारद जी ने क्यों दिया था कुबेर के दोनों पुत्रों को शाप! आखिर कैसे हुआ उनका उद्धार?

नारद जी ने कुबेर के पुत्र नलकुबेर और मणिग्रीव को शाप क्यों दिया, वे वृक्ष कैसे बने और भगवान श्रीकृष्ण ने उनका उद्धार कैसे किया? इस लेख में जानिए इस पूरी पौराणिक कथा की जानकारी।

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नलकुबेर और मणिग्रीव कथा

हमारे हिन्दू धर्म को कुबेर को धन का देवता कहा गया है। शिव पुराण के अनुसार कुबेर ने तपस्या कर शिव को प्रसन्न किया था जिसके बाद शिव ने उसे अपने मित्र का दर्जा दिया और अलकापुरी नाम की नगरी प्रदान की और खुद भी कैलाश पर्वत पर निवास करने लगे। दरअसल, रावण ने कुबेर की लंका को बल से छीन लिया था जिसके बाद अपने पितामह की सलाह से कुबेर शिव की शरण में आया और उसे अभय प्रदान हुआ।

शिव ने जब कुबेर को धन का देवता बनाया तो कुबेर के ऐश्वर्य में वृद्धि होने लगी। कुबेर ने सूर्य और छाया की पुत्री भद्रा से विवाह किया। इस विवाह के बाद उन्हें नलकुबेर और मणिग्रीव नाम के दो पुत्रों की प्राप्ति हुई थी। धन की प्रचुर मात्रा होने के कारण दोनों पुत्रों का अधिक समय भोग विलास में ही चला जाता था।

नारद जी ने दोनों भाइयों को क्यों दिया था शाप?

एक बार, कुबेर के दोनों पुत्र मदिरा पान करके स्त्रियों के साथ जल क्रीड़ा कर रहे थे। उसी समय वहां नारद जी का आगमन हुआ। वो दोनों भाई स्त्रियों के साथ विलास में इतने डूबे हुए थे कि उन्होंने नारद जी को प्रणाम तक नहीं किया और ना ही वस्त्र धारण किया। उस समय नारद जी ने विचार किया कि शिव की कृपा से इन्हे इतना सब कुछ प्राप्त हो गया है लेकिन बुद्धि जड़ है। ऐसा विचार करके उन्होंने दोनों भाइयों को जड़ होने का शाप दे दिया।

श्रीकृष्ण ने कैसे किया दोनों भाइयों का उद्धार?

नारद जी ने कहा कि तुम्हे वृक्ष बनना पड़ेगा। द्वापर में नन्द बाबा के द्वार पर दोनों ने अर्जुन के वृक्ष के रूप में अपने शाप को भोगा। नारद ने उनसे यह भी कहा था कि जब विष्णु कृष्ण रूप में अवतार लेंगे तो तुम्हारा उद्धार होगा। द्वापर में ही माता यशोदा ने कृष्ण को ओखली से बांधा था। उसी समय कृष्ण ने बाल लीला की और ओखल को घसीटा।

इस प्रकार ओखल को घसीटते हुए कृष्ण भगवान दोनों अर्जुन के वृक्ष के बीच जा पहुंचे। कृष्ण ने अपने परम भक्त नारद जी के वचन को सत्य करने के लिए जोर लगाकर उस ओखल को जैसे ही खींचा वो दोनों अर्जुन के वृक्ष टूटकर नीचे गिर पड़े। श्री कृष्ण ने इस प्रकार उन दोनों भाइयों को वृक्ष योनि से मुक्ति प्रदान की और नारद जी के वचन की लाज रख ली।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)

कुबेर के दोनों पुत्रों के नाम क्या थे?

कुबेर के दोनों पुत्रों के नाम नलकुबेर और मणिग्रीव थे।

नारद जी ने नलकुबेर और मणिग्रीव को शाप क्यों दिया था?

नारद जी ने दोनों भाइयों को अहंकार, मदिरा के नशे और अनुचित आचरण में डूबा देखकर उन्हें वृक्ष बनने का शाप दिया था।

नलकुबेर और मणिग्रीव किस रूप में जन्मे थे?

नारद जी के शाप के कारण दोनों भाई अर्जुन के वृक्ष के रूप में नन्द बाबा के द्वार पर रहे।

नलकुबेर और मणिग्रीव का उद्धार किसने किया था?

भगवान श्रीकृष्ण ने ओखली को घसीटते हुए दोनों अर्जुन के वृक्षों को गिराया और उनका उद्धार किया।

नारद जी के शाप का उद्देश्य क्या था?

नारद जी के शाप के पीछे दोनों भाइयों को उनके अहंकार और भोग-विलास से मुक्त कराकर भगवान श्रीकृष्ण के माध्यम से उनका उद्धार कराना था।

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