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असुर 'बल' के शरीर से कैसे बने नवरत्न? जानिए हीरा, पन्ना, माणिक्य और नीलम की कथा

असुर बल के शरीर से नवरत्नों की उत्पत्ति कैसे हुई? जानिए देवताओं के यज्ञ, बल के आत्मसमर्पण और उसके शरीर से हीरा, पन्ना, माणिक्य सहित रत्न बनने की पौराणिक कथा।

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नवरत्नों का जन्म

ब्रह्मा जी के मानस पुत्र दक्ष प्रजापति ने अपनी दो पुत्री दिति और दनु का विवाह कश्यप ऋषि से किया था। दिति से दैत्य और दनु से दानवों का जन्म हुआ था। हालांकि ये दोनों देवताओं के विरोधी थे फिर भी कभी कभी यह आपस में भी लड़ने लग जाते थे।

इसी प्रकार कभी ये देवताओं से लड़ने और स्वर्ग पर कब्ज़ा करने की चाह रखते थे। दानवों और दैत्यों की सदैव एक ही इच्छा रहती थी कि कैसे भी करके स्वर्ग को अपने काबू में कर लिया जाए। एक बार एक 'बल' नाम का असुर था जिसने देवताओं को बहुत परेशान किया।

असुर 'बल' ने देवताओं को कैसे किया परेशान?

वह बहुत ताकतवर था और आख़िरकार उसने देवराज इंद्र को पराजित करके स्वर्ग पर अधिकार जमा लिया। देवता अपने ही घर से बेघर किये जा चुके थे। 'बल' भले ही असुर था लेकिन वह दानी प्रवृति का था। उसने देवताओं को भय मुक्त किया और कहा कि आप भले ही स्वर्ग छोड़कर जा रहे है लेकिन आप जब भी कोई यज्ञ करेंगे तो मैं उसमें आपकी सहायता अवश्य करूँगा। ऐसा कहकर उसने देवताओ को स्वर्ग से निकाल दिया।

देवताओं ने 'बल' को यज्ञ में क्यों बुलाया?

हालांकि देवराज इंद्र को 'बल' को पराजित करने का मार्ग भी मिल ही गया था। और फिर एक दिन देवताओं ने यज्ञ का आयोजन किया और उसमें उन्होंने उस असुर 'बल' को भी निमंत्रण दिया। उस असुर ने भी अपने वचन का पालन किया और देवराज से पूछा कि आप बताइये आपको मेरी क्या मदद चाहिये?

देवराज ने उस असुर से कहा कि आप स्वयं को बलि के रूप में इस यज्ञ को सौंप दे ताकि हमारा यज्ञ पूर्ण हो सके। अपने वचन का पालन करने के लिए उस असुर ने यज्ञ में अपने शरीर को प्रवेश कर दिया और देखते ही देखते अग्नि उस शरीर का भक्षण कर गई।

'बल' के शरीर से नवरत्नों की उत्पत्ति कैसे हुई?

लेकिन उसी समय एक चमत्कार हुआ। देवताओं ने देखा कि उस असुर के शरीर का एक एक अंग सुंदर और भव्य वस्तुओं के रूप में आकार ले रहा था। उस असुर के शव से नए नए रंगों का निर्माण हो रहा था। दरअसल, उस असुर ने जो निःस्वार्थ कर्म किया उसी के फलस्वरूप वह ब्रह्माण्ड के सबसे अनमोल पदार्थों में बदल रहा था। देवताओं को यकीन नहीं हो रहा था कि किसी असुर का शरीर इतना चमत्कारी कैसे हो सकता है?

उन्होंने उस असुर के शव को उठाने का प्रयास किया लेकिन देखते ही देखते वह पृथ्वी लोक पर गिरकर फूट गया। उसके शरीर के 84 हिस्से हुए जो कि पहाड़ों, नदियों, जंगलों और महासागर में जाकर मिल गए थे। 21 टुकड़ों को रत्न की संज्ञा दी गई जिसमें भी 9 रत्न सबसे अधिक मूल्यवान हुए।

बल की अस्थि से हीरे और पित्त से पन्ने बने। उसके रक्त से माणिक्य और आंखों ने नीलम का आकार पाया। उसके असुर के दांतों से मोती का जन्म हुआ वही त्वचा से पुखराज बना। उसके नाख़ून से रक्तमणि और आंतों से मूंगा बना। असुर 'बल' की आवाज से लहसुनिया रत्न का जन्म हुआ। इन्ही को बाद में नवरत्न कहा गया।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)

नवरत्नों की उत्पत्ति किसके शरीर से हुई थी?

पौराणिक कथाओं के अनुसार नवरत्नों की उत्पत्ति असुर बल के शरीर के अलग-अलग अंगों से हुई थी।

असुर बल ने अपना शरीर यज्ञ में क्यों अर्पित किया?

उसने देवताओं से सहायता करने का वचन दिया था, इसलिए अपने वचन को निभाने के लिए उसने स्वयं को यज्ञ की बलि के रूप में अर्पित कर दिया।

असुर बल के शरीर के कितने टुकड़े हुए थे?

पौराणिक कथाओं के अनुसार उसके शरीर के 84 हिस्से हुए थे।

असुर बल के शरीर से कौन-कौन से नवरत्न बने?

हीरा, पन्ना, माणिक्य, नीलम, मोती, पुखराज, रक्तमणि, मूंगा और लहसुनिया को नवरत्न बताया गया है।

असुर बल की अस्थि से कौन सा रत्न बना?

पौराणिक कथाओं के अनुसार असुर बल की अस्थि से हीरे की उत्पत्ति हुई थी।

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