महर्षि कश्यप ने अपनी पत्नी अदिति से देवता, दिति से दैत्य पैदा किये। वैसे तो ये सब आपस में भाई थे लेकिन देवताओं को स्वर्ग का राज्य मिलने से दैत्य अक्सर देवताओं पर हमला बोल देते थे। दैत्यों को सदैव से ही स्वर्ग पर शासन करना था।
इस कारण दोनों में कई बार युद्ध होता। कभी देवताओं का पलड़ा भारी होता तो कभी दैत्यों का लेकिन देवताओं के पास भगवान् विष्णु जैसा योद्धा होने के कारण दैत्यों का ही बड़ा नुकसान होता था।
शुक्राचार्य ने शिव को किया प्रसन्न -
एक दिन सभी असुर मिलकर अपने गुरु शुक्राचार्य के पास गए जिन्हे असुराचार्य भी कहा जाता था। वो असुर जाति की घट रही संख्या को लेकर बड़ा परेशान थे। एक दिन उन्होंने सभी असुर, दानव और दैत्यों से कहा कि मैं महादेव को प्रसन्न करूँगा और उनसे तुम्हे अमर बनाने का आशीर्वाद प्राप्त करूँगा।
ऐसा करने से हम देवताओं को परास्त कर देंगे। उन्होंने असुरों को आदेश दिया कि जब तक मैं लौटकर न आऊं किसी भी प्रकार का कोई युद्ध मत करना और देवताओं के साथ युद्ध विराम करो।
लेकिन असुर, देवताओं को जानते थे। उन्होंने अपने गुरु से कहा कि आपने कह तो दिया लेकिन देवता इस युद्ध विराम का कभी पालन नहीं करेंगे। जब आप नहीं होंगे तो फिर हमारी रक्षा कौन करेगा? शुक्राचार्य ने कुछ समय तक सोचा और फिर अपने पिता भृगु ऋषि का उन्हें ख्याल आया। उन्होंने सभी असुरों को अपने पिता के आश्रम पर जाने की आज्ञा दी और खुद महादेव को प्रसन्न करने के उद्देश्य से तपस्या करने लगे।
शिव प्रकट हुए तो शुक्राचार्य ने उनसे एक ऐसा मन्त्र माँगा जो मृत को जीवित कर सकें। शिव ने कहा कि मृत्यु की काट पाना इतना सरल नहीं है। आपको सिर्फ वायु पर जीवित रहकर एक हजार साल तक तपस्या करनी होगी और अगर आप ऐसा कर पाए तो मैं आपको वह मन्त्र दूँगा।
ऐसा सुनकर शुक्राचार्य ने उसी क्षण से तप आरम्भ कर दिया। उधर असुर, भृगु ऋषि और उनकी पत्नी काव्यमाता के आश्रम पर सुरक्षित थे। लेकिन इस बीच देवताओं को जानकारी मिली कि शुक्राचार्य तो एक हजार साल तक तपस्या करेंगे और उन्हें मृत्यु पर विजय प्राप्त करने वाला मन्त्र मिलने वाला है।
भृगु ऋषि के आश्रम पर देवताओं का आक्रमण-
इससे वो घबरा गए। उन्होंने अवसर का लाभ उठाने का निर्णय लिया। उन्होंने भगवान विष्णु को साथ लिया और भृगु ऋषि के आश्रम पर आक्रमण कर दिया। उस समय ऋषि अपने आश्रम से बाहर थे। देवताओं ने इंद्र और विष्णु के नेतृत्व में असुरों का खूब संहार किया और शवों के ढेर लग गए।
ऐसा प्रतीत हो रहा था कि समूची असुर जाति आज नष्ट हो जायेगी। उस समय सभी जीवित बचे हुए असुर काव्यमाता की शरण में गए। इंद्र और विष्णु को माता ने रुकने का आदेश दिया। भगवान विष्णु ने उन्हें समझाया कि ये असुर मानव जाति के लिए संकट है और शुक्राचार्य इन्हे अमर बनाने का प्रयास कर रहे है।
ऐसे में अधर्म इस ब्रह्माण्ड को संक्रमित कर देगा लेकिन भृगु की पत्नी ने विष्णु से कहा कि मेरे पति ने इनकी रक्षा करने का वचन दिया है। ऐसे में, मैं इन्हे इस प्रकार मरने नहीं दे सकती और शुक्राचार्य को तो स्वयं महादेव ने आश्वासन दिया है फिर आप क्यों महादेव का विरोध कर रहे है?
काव्यमाता और भगवान विष्णु का सामना-
उसी समय इंद्र आगे बढे तो काव्यमाता ने अपनी शक्ति से उनके अंगों को स्तंभित कर दिया। यह देखकर सभी देवता डर के मारे इधर उधर भागने लगे। उसी समय विष्णु ने सुदर्शन चक्र को प्रकट किया लेकिन काव्यमाता निडर रही।
आखिर विष्णु का चक्र घुमा और उसने सब के सामने भृगु की पत्नी का सिर काट दिया। आश्रम में असुरों का विलाप शुरू हो गया। उसी समय भृगु की चीख सुनाई दी। उन्होंने देखा असुरों के शव चारों और बिखरे हुए थे और उनकी पत्नी का धड़ भूमि पर गिरा हुआ था।
भृगु ने विष्णु से कहा कि यह आपने क्या कर दिया? विष्णु ने कहा कि जैसे शिव ने ब्रह्मा का सिर काटा वैसे ही मुझे आपकी पत्नी का सिर काटना पड़ा। इस ब्रह्माण्ड को सुरक्षित रखने के लिए कई बार देवताओं को भी हत्या करनी पड़ती है।
भृगु ने विष्णु को क्यों दिया शाप?
भृगु ने कहा कि जो हत्या करते है उन्हें उसका दंड भी भुगतना होता है। ऐसा कहकर भृगु ने विष्णु को शाप दिया कि आपको इस मृत्यु लोक में मनुष्य का जन्म लेकर वही पीड़ा भोगनी होगी जो आज मैं भोग रहा हूँ।
आप भी जीवन मृत्यु के चक्र से गुजरेंगे। भगवान विष्णु ने हाथ जोड़कर कहा कि मुझे स्वीकार है। उधर देवताओं ने असुरों का रक्त तो बहा दिया था लेकिन वो इस बात से अनजान थे कि जल्द ही उन्हें महादेव के कोप का भी शिकार बनना था।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
शुक्राचार्य महादेव से क्या चाहते थे?
शुक्राचार्य महादेव को प्रसन्न करके ऐसा मन्त्र प्राप्त करना चाहते थे जो मृत को जीवित कर सके और असुरों को अमर बनाने में सहायता करे।
शुक्राचार्य को कितने वर्ष तक तपस्या करनी थी?
शिव ने शुक्राचार्य को वायु पर जीवित रहकर एक हजार साल तक तपस्या करने की बात कही थी।
भगवान विष्णु ने काव्यमाता का वध क्यों किया?
काव्यमाता ने असुरों की रक्षा की और देवताओं को रोक दिया था। इसके बाद विष्णु ने सुदर्शन चक्र से उनका वध किया।
भृगु ऋषि ने भगवान विष्णु को क्या शाप दिया?
भृगु ने विष्णु को शाप दिया कि उन्हें मृत्यु लोक में मनुष्य का जन्म लेकर जीवन-मृत्यु के चक्र से गुजरना होगा और वही पीड़ा भोगनी होगी जो भृगु अपनी पत्नी के वध के कारण भोग रहे थे।
भगवान विष्णु ने भृगु के शाप को क्या कहा?
भगवान विष्णु ने हाथ जोड़कर भृगु के शाप को स्वीकार किया।








