भगवान विष्णु के चार प्रमुख आयुधों में सुदर्शन चक्र का विशेष महत्व है। पौराणिक कथा में इसका संबंध भगवान शिव की आराधना और श्रीहरि की अद्भुत भक्ति से जुड़ा है। पूजा के दौरान कमल पुष्प कम पड़ने पर विष्णु ने अपनी कमल जैसी आंख शिव को अर्पित कर दी थी।
असुरों के आतंक से परेशान होकर विष्णु ने की भगवान शिव की आराधना-
हमारे पुराणों में श्री हरि विष्णु का बड़ा महत्व बताया गया है। इस संसार की रचना करने वाले ब्रह्मदेव को स्वयं विष्णु ने अपने कमल दंड से उत्पन्न किया था। विष्णु जी का जब वर्णन किया जाता है तो उन्हें गदा , चक्र, कमल और कौस्तुभ मणि से युक्त कहा जाता है।
भगवान् विष्णु इस संसार का पालन करते है लेकिन क्या आपको पता है कि भगवान विष्णु को सुदर्शन चक्र किसने दिया ? आखिर ऐसा कौनसा संकट आ गया था जिससे विष्णु को कैलाश पर्वत जाकर तप करना पड़ा ? आइये आपको इस लेख में समझाते है।
एक बार इस संसार में असुरों का बहुत आतंक हो गया था। वो राक्षस न सिर्फ मनुष्यों को बल्कि देवताओं को भी पीड़ित करने लगे थे। ऐसे में मृत्यु लोक से धर्म विलुप्त होने लगा। जब संसार में यज्ञ होने बंद हो गए तो देवताओं को उनका भाग मिलना बंद हो गया। ऐसे में सभी देवताओं ने श्री विष्णु को अपनी परेशानी बतायी।
तब सब देवताओं को समझाकर उन्होंने वापस भेज दिया और स्वयं कैलाश पर्वत पर जाकर भगवान शिव की आराधना करने लगे। भगवान विष्णु को यकीन था कि वो शिव को प्रसन्न करके इस समस्या का कोई उपाय खोज ही लेंगे।
विष्णु ने शिव सहस्रनाम का पाठ करके कैसे की पूजा?
भगवान विष्णु ने कैलाश पर्वत पर जाकर सर्वेश्वर शिव का पार्थिव लिंग स्थापित किया और इसके बाद उन्होंने शिव की साधना आरम्भ की। विष्णु जी ने घोर तप किया लेकिन उसके बाद भी शिव जी प्रसन्न नहीं हो रहे थे। तो विष्णु जी ने शिव सहस्रनामों का पाठ आरंभ कर दिया।
विष्णु जी शिव का एक नाम लेते और एक कमल पुष्प उन्हें समर्पित कर देते। इस प्रकार उन्हें शिव सहस्रनाम का पाठ करते हुए बहुत समय व्यतीत हो गया। शिव जी को यह आभास हुआ कि विष्णु उनकी पूजा कर रहे है तो दर्शन देने से पहले उन्होंने विष्णु जी की परीक्षा लेने का निर्णय लिया।
एक कमल कम पड़ने पर विष्णु ने अपनी आंख शिव को अर्पित की-
विष्णु जी इन कमल पुष्प से शिव जी का पूजन करते थे उसमें से एक पुष्प उन्होंने छिपा दिया। जब पूजा करते हुए एक पुष्प कम पड़ा तो विष्णु जी को बहुत आश्चर्य हुआ। वे इधर-उधर पुष्प की तलाश करने लगे। काफी समय बीत जाने के बाद भी जब उन्हें वह पुष्प नहीं मिला तो पूजा में विघ्न न हो इस डर से उन्होंने अपने कमल के समान नेत्र को निकालकर त्रिलोकी नाथ शिवजी को अर्पण कर दिया।
शिव जी ने जब इस असीम भक्ति को देखा तो उन्होंने विष्णु जी को दर्शन दिए और उनके आने का प्रयोजन पूछा। शिवजी के वचनों को सुनकर विष्णु जी ने कहा कि प्रभु आप तो सब जानते है। आप यह भी जानते है कि संसार में असुरों द्वारा महान भय उत्पन्न हो गया है और अब देवताओं की रक्षा भी करनी है।
विष्णु के इस प्रकार के वचन सुनकर शिव जी ने उन्हें सुदर्शन चक्र प्रदान किया जिससे विष्णुजी ने सभी असुरों का वध किया और सब बेहद प्रसन्न हुए। इस प्रकार आज आपने यह समझा कि जो विष्णु का सुदर्शन चक्र है वो उन्हें शिव जी से प्राप्त हुआ है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
1-भगवान विष्णु को सुदर्शन चक्र किसने दिया था?
पौराणिक कथाओं के अनुसार भगवान शिव ने प्रसन्न होकर भगवान विष्णु को सुदर्शन चक्र प्रदान किया था।
2-भगवान विष्णु ने शिवजी को अपनी आंख क्यों अर्पित की थी?
शिवजी की पूजा के लिए रखे कमल पुष्पों में से एक कम हो गया था। पूजा में विघ्न न हो, इसलिए विष्णु ने अपना कमल जैसा नेत्र शिवजी को अर्पित कर दिया।
3-भगवान विष्णु ने सुदर्शन चक्र पाने के लिए किसकी पूजा की थी?
पौराणिक कथाओं के अनुसार भगवान विष्णु ने कैलाश पर्वत पर भगवान शिव की आराधना की थी।
4-भगवान विष्णु ने शिवजी की पूजा कैसे की थी?
उन्होंने पार्थिव लिंग स्थापित करके शिव सहस्रनाम का पाठ किया और प्रत्येक नाम के साथ एक कमल पुष्प भगवान शिव को अर्पित किया।
5-सुदर्शन चक्र मिलने के बाद भगवान विष्णु ने क्या किया?
भगवान विष्णु ने सुदर्शन चक्र की सहायता से असुरों का वध किया और देवताओं को उनके आतंक से मुक्ति दिलाई।








