इस सृष्टि के रचना करने वाले ब्रह्मदेव ने अपने ध्यान की अवस्था से सात ऋषियों को उत्पन्न किया था। ये सभी बेहद दिव्य और शक्तियों से युक्त थे। इन्ही सात ऋषियों को सप्त ऋषि कहा गया है। इनका नाम क्रतु, पुलह, पुलस्त्य, अत्रि, अंगिरा, वसिष्ठ और मरीचि हुए। इसके बाद ब्रह्मा के ह्रदय से बैल के रूप में धर्म का जन्म हुआ। उस समय धर्म को लेकर ब्रह्मा जी ने एक भविष्यवाणी की।
उन्होंने धर्म से कहा कि सतयुग में तुम्हारे सभी चार पैर सुरक्षित रहने वाले है। सत्य, तप, शुचिता और करुणा ये धर्म रूपी बैल के चार पैर है। इसके बाद त्रेता युग में धर्म के तीन पैर हो जाएंगे। उस युग में तप की कमी हो जायेगी। इसके बाद आने वाले द्वापर युग में तुम सिर्फ दो पैर पर ही खड़े रहोगे। तप के साथ ही लोग शुचिता को भी त्याग देंगे। अंत में आने वाले कलयुग में तुम्हारा बस एक पैर ही बच पायेगा।
उस युग में लोगों के मन में करुणा भी नष्ट हो जायेगी। ऐसा सुनकर धर्म दुःखी हो गया। आगे उससे ब्रह्मा जी ने कहा, मैंने भले ही तुम्हे अपने ह्रदय से उत्पन्न किया है लेकिन तुम कलयुग में लोगों के ह्रदय में निवास नहीं करोगे। इसलिए कलयुग में तुम्हारी दशा दयनीय हो जायेगी। इसके बाद ब्रह्मा जी ने कुछ और जीवों को प्रकट किया। उनकी भृकुटि से अग्नि देव का जन्म हुआ।
ब्रह्मदेव ने अपने वक्ष स्थल से कामदेव को प्रकट किया। अपने दाहिने अंगूठे से उन्होंने दक्ष को प्रकट किया जो आगे चलकर सृष्टि संचालन में उनकी मदद करने वाले थे। ब्रह्मा जी ने अपनी नाभि से विश्वकर्मा को प्रकट किया। इसके बाद उन्होंने अपने तप के प्रभाव से अपनी ग्रीवा से नारद जी को उत्पन्न किया।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
1-सप्तऋषि कौन थे और उनका जन्म कैसे हुआ?
ब्रह्मा जी ने अपने ध्यान की अवस्था से सात ऋषियों को उत्पन्न किया। क्रतु, पुलह, पुलस्त्य, अत्रि, अंगिरा, वसिष्ठ और मरीचि को सप्तऋषि कहा गया है।
2-धर्म के चार पैर किन गुणों को माना गया है?
धर्म के चार पैर सत्य, तप, शुचिता और करुणा बताए गए हैं। सतयुग में धर्म इन चारों पैरों पर स्थित रहता है।
3-कलयुग में धर्म की दशा दयनीय क्यों बताई गई है?
पौराणिक कथा के अनुसार कलयुग में धर्म का केवल एक पैर शेष रहेगा और लोगों के मन से करुणा भी समाप्त हो जाएगी। इसी कारण कलयुग में धर्म की स्थिति दयनीय बताई गई है।
4-अग्निदेव, कामदेव और दक्ष का जन्म कैसे हुआ?
पौराणिक मान्यताओं में अग्निदेव का जन्म ब्रह्मा जी की भृकुटि से, कामदेव का जन्म उनके वक्ष स्थल से और दक्ष का जन्म उनके दाहिने अंगूठे से हुआ।
5-ब्रह्मा जी ने विश्वकर्मा और नारद जी को कैसे उत्पन्न किया?
पौराणिक कथाओं के अनुसार ब्रह्मा जी ने अपनी नाभि से विश्वकर्मा को और अपने तप के प्रभाव से अपनी ग्रीवा से नारद जी को उत्पन्न किया।








