जब ब्रह्मा जी ने शिव और शक्ति की कृपा प्राप्त की तो उन्होंने मनु और शतरूपा को पैदा किया और उनका विवाह हुआ। मनु एवं शतरूपा के कुल पाँच सन्तानें हुईं थीं जिनमें से दो पुत्र प्रियव्रत एवं उत्तानपाद तथा तीन कन्याएँ आकूति, देवहूति और प्रसूति थे। प्रसूति का विवाह दक्ष के साथ हुआ और दक्ष प्रसूति से 24 कन्याओं का जन्म हुआ। दक्ष प्रजापति का विवाह असिकी नाम की एक कन्या से भी हुआ था।
दक्ष प्रजापति के पांच हजार पुत्रों को नारद जी ने क्या उपदेश दिया?
दक्ष और असिकी ने सबसे पहले पांच हजार पुत्रों को जन्म दिया जिन्हे सामूहिक रूप से हर्यश्व नाम दिया गया। दक्ष ने उन सभी को आदेश दिया कि आप पृथ्वी के राजा बनो और प्रजनन की प्रक्रिया को आगे बढ़ाओ। वो सभी अपने पिता की आज्ञा का पालन करने वाले थे इसलिए वो एक ऐसे स्थान पर एकत्र हुए जहां सिंधु नदी समुद्र से मिलती थी और ठीक उसी समय नारद जी वहां आ गए। उन्होंने दक्ष के पांच हजार पुत्रों को उकसाया कि वो अपने पिता की आज्ञा का पालन नहीं करें।
नारद जी के उपदेशों को सुनकर वो सब भूलोक के विषय का पता लगाने के लिए इधर उधर हो गए। जैसे सिंधु नदी समुद्र में विलीन हो गई ठीक उसी प्रकार दक्ष के वो पुत्र फिर कभी घर लौटकर वापिस नहीं आये।
शलबालश्व को भी नारद जी ने संसार से विरक्त क्यों किया?
जब दक्ष और असिकी अपने पांच हजार पुत्रों का पता नहीं लगा पाए तो उन्होंने एक बार फिर एक हजार पुत्रों को जन्म दिया। उनका नाम सामूहिक रूप से शलबालश्व था।
लेकिन नारद जी को तो अभी भी संतोष प्राप्त नहीं हुआ था। उन्होंने उन एक हजार पुत्रों को भी भड़का दिया। दक्ष के यह पुत्र भी गायब हो गए और फिर कभी लौटकर वापिस नहीं आये। जब दक्ष को इस बात का भान हुआ कि यह सब नारद की करतूत है तो उन्होंने क्रोध में भरकर नारद जी से कहा कि आप ऐसा कैसे कर सकते है?
अगर सब संन्यासी ही बन जाएंगे तो इस सृष्टि का निर्माण कार्य आगे कैसे बढ़ सकेगा ? हमारे पिता ब्रह्मा ने तुम्हे शाप देकर उचित किया था और अब मैं भी वही करने जा रहा हूं।
ऐसा कहकर दक्ष ने नारद को शाप दिया कि अब तुम दो घड़ी से अधिक कहीं टिक नहीं पाओगे। तुम सदैव इन तीनों लोकों में भटकते रहोगे और तुम्हे कही विश्राम नहीं मिलेगा। इसके बाद दक्ष और असिकी से 60 कन्याओं का जन्म हुआ और प्रसूति से 24 कन्याओं का जन्म हुआ। इस प्रकार दक्ष की कुल 84 कन्या हुई।
नोट - कहीं कहीं असिकी को वारिणी भी कहा गया है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
1-दक्ष प्रजापति ने नारद जी को शाप क्यों दिया था?
नारद जी ने दक्ष के पांच हजार हर्यश्व और एक हजार शबलाश्व पुत्रों को संसार के बंधन से दूर होने का उपदेश दिया, जिसके बाद वे घर लौटकर नहीं आए। इससे दक्ष क्रोधित हो गए।
2-दक्ष प्रजापति के पांच हजार पुत्रों का नाम क्या था?
दक्ष के पांच हजार पुत्रों को सामूहिक रूप से हर्यश्व कहा गया था।
3-शलबालश्व कौन थे?
शलबालश्व दक्ष प्रजापति के एक हजार पुत्र थे, जिन्हें नारद जी ने भी संसार के विषय में विचार करने का उपदेश दिया था।
4-नारद जी को दक्ष ने क्या शाप दिया था?
दक्ष ने नारद जी को शाप दिया कि वे दो घड़ी से अधिक कहीं टिक नहीं पाएंगे और तीनों लोकों में सदैव भटकते रहेंगे।
5-दक्ष प्रजापति की कुल कितनी कन्याएं थीं?
दी गई कथा के अनुसार दक्ष और असिकी से 60 तथा प्रसूति से 24 कन्याओं का जन्म हुआ, इस प्रकार कुल 84 कन्याएं हुईं।








