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कुबेर की बायीं आंख कैसे फूट गई? शिव के मित्र कैसे बने और कैसे मिली अलकापुरी

धन के देवता कुबेर की बायीं आंख कैसे फूटी, वे भगवान शिव के मित्र कैसे बने और उन्हें अलकापुरी कैसे मिली, जानिए इस रोचक पौराणिक कथा में।

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कुबेर की आंख क्यों फूटी

हिंदू धर्म में कुबेर को धन और यक्षों का अधिपति माना जाता है। दीपावली पर माता लक्ष्मी के साथ कुबेर की भी पूजा की जाती है। लेकिन कुबेर के धन के देवता बनने और उनकी बायीं आंख फूटने की कथा बेहद रोचक है।

कुबेर ने भगवान शिव की कठोर तपस्या क्यों की?

हमारे हिन्दू धर्म में कुबेर को धन का देवता कहा गया है। कार्तिक माह की अमावस्या यानी दिवाली के दिन माता लक्ष्मी के साथ कुबेर की भी पूजा की जाती है। वो सभी यक्षों के स्वामी है। ब्रह्मा के मानस पुत्र पुलस्त्य से विश्रवा का जन्म हुआ और विश्रवा के पुत्र कुबेर हुए। लेकिन क्या आप जानते है कि कुबेर धन के देवता कैसे बने? उनकी एक बायीं आंख क्यों फूटी हुई है? वो शिव के मित्र कैसे बने?

कैलाश पर्वत के निकट बसी हुई नगरी अलकापुरी के स्वामी वो कैसे बने ? एक बार कुबेर ने भगवान् शिव की कठोर तपस्या करने का निर्णय लिया। वे भगवान शिव द्वारा प्रकाशित काशी पुरी में गए और अपने मन के रत्नमय दीपों से ग्यारह रुद्रों का आह्वान करके साधना में लीन हो गए। कुबेर निश्चल भाव से उनकी उपासना करने लगे। वहां उन्होंने शिवलिंग की प्रतिष्ठा की।

उत्तम पुष्पों द्वारा शिवलिंग का पूजन किया। कुबेर पूरे मन से तप में लगे थे। दस हजार वर्षों तक उन्होंने शिव की कठोर तपस्या की। तत्पश्चात भगवान शिव अपनी दिव्य शक्ति उमा के भव्य रूप के साथ कुबेर के पास गए। जब शिव ने कुबेर को संबोधित किया तो उन्होंने अपनी आंख खोली लेकिन शिव के दिव्य रूप को देखने में कुबेर समर्थ नहीं थे। उनका तेज सूर्य के समान था।

भगवान शिव का तेज देखकर कुबेर की आंखें क्यों बंद हो गईं?

उनके मस्तक पर चंद्रमा अपनी चांदनी बिखेर रहा था। उनके तेज से कुबेर की आंखें बंद हो गई और उन्होंने शिव से विनती करते हुए कहा कि आप मुझे दिव्य दृष्टि प्रदान करे ताकि मैं आपका तेज देख पाऊं। कुबेर की बात सुनकर भगवान शिव ने अपनी हथेली से कुबेर को स्पर्श कर देखने की शक्ति प्रदान की।

दिव्य दृष्टि प्राप्त होने पर वे बड़ी बड़ी आँखे करके सिर्फ शिव की शक्ति उमा को देखने लगे। वे सोचने लगे कि भगवान शिव के साथ यह सर्वांग सुंदरी कौन है?

देवी उमा के क्रोध से कैसे फूटी कुबेर की बायीं आंख?

इन्होने ऐसा कौन सा तप किया है जो इसे भगवान शिव की कृपा से उनका सामीप्य रूप और सौभाग्य प्राप्त हुआ है। वो लगातार देवी को घूरते रहे और ऐसा होते देख देवी उमा को क्रोध आ गया। उनके क्रोध से कुबेर की ओर देखने के कारण उसकी बायीं आंख फूट गई।

शिवजी ने उमा से कहा, आप क्रोधित नहीं हो यह आपका पुत्र है, वह तो बस आपके तेज और बल को समझने की कोशिश कर रहा है। फिर भगवान शिव ने कुबेर से कहा कि मैं तुम्हारी तपस्या से बेहद प्रसन्न हूं। तुम सुव्रतों, यक्षों और किन्नरों के अधिपति होकर धन के दाता बनो और तुम्हे सदैव मेरे मित्र होने का सौभाग्य भी प्राप्त होगा।

कुबेर को अलकापुरी कैसे मिली?

तुम्हारे स्थान अलकापुरी के पास ही मैं निवास करूंगा। इस वरदान को प्राप्त करके कुबेर धन्य हुआ और उसने उमा के चरणों में भी प्रणाम किया। देवी उमा ने कुबेर से कहा, बायीं आंख फूट जाने पर तुम एक ही पिंगल नेत्र से युक्त रहो।

महादेव जी ने जो वर तुम्हें प्रदान किए हैं, वे सुलभ हैं। मेरे रूप से ईर्ष्या के कारण तुम कुबेर नाम से प्रसिद्ध होगे। कुबेर को वर देकर भगवान शिव और देवी उमा अपने धाम को चले गए। इस प्रकार भगवान शिव और कुबेर में मित्रता हुई और वे अलकापुरी के निकट कैलाश पर्वत पर निवास करने लगे।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)

1-कुबेर की बायीं आंख कैसे फूट गई?

देवी उमा के प्रति लगातार देखने के कारण उन्हें क्रोध आया और उनके क्रोध से कुबेर की बायीं आंख फूट गई।

2-कुबेर धन के देवता कैसे बने?

भगवान शिव ने कुबेर की दस हजार वर्षों की कठोर तपस्या से प्रसन्न होकर उन्हें धन का दाता और यक्षों-किन्नरों का अधिपति बनने का वरदान दिया।

3-कुबेर और भगवान शिव की मित्रता कैसे हुई?

कुबेर की कठोर तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उन्हें अपना मित्र बनने का वरदान दिया। इसी वरदान से शिव और कुबेर की मित्रता हुई।

4-कुबेर को अलकापुरी कैसे मिली?

भगवान शिव ने कुबेर को वरदान देते हुए कहा कि वे अलकापुरी के पास ही निवास करेंगे। इसके बाद कुबेर अलकापुरी के स्वामी बने।

5-कुबेर की एक आंख को पिंगल नेत्र क्यों कहा गया?

देवी उमा ने कुबेर की बायीं आंख फूटने के बाद उन्हें एक पिंगल नेत्र से युक्त रहने का वर दिया।

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