भगवान विष्णु के द्वारपाल जय और विजय को चार कुमारों के शाप के कारण मृत्यु लोक में जन्म लेना पड़ा। भगवान विष्णु ने उन्हें सात जन्म भक्त या तीन जन्म राक्षस बनने का विकल्प दिया था। जय-विजय ने तीन जन्म राक्षस बनना स्वीकार किया और हर जन्म में भगवान विष्णु के हाथों मृत्यु की इच्छा रखी।
चार कुमारों ने जय-विजय को क्यों दिया शाप?
ब्रह्मा ने सबसे पहले अपने मन से चार कुमारों को प्रकट किया था। उन चारों ने ब्रह्मा जी से आशीर्वाद मांगा कि वो हमेशा कुमार ही रहे और उनकी बुद्धि सदैव ज्ञान प्राप्त करने में ही लगी रहे। ब्रह्मा ने उन चार कुमारों को यह आशीर्वाद दिया और ब्रह्माण्ड के हर हिस्से को उनके लिए सुलभ बना दिया। वो कहीं भी जा सकते थे और वो जहां भी जाते थे उनका सम्मान,आदर किया जाता था। एक बार शिव लोक और सप्त ऋषियों से मिलने के बाद वो चार कुमार बैकुंठ की ओर चल दिए। उस लोक में श्री हरि विष्णु का निवास स्थान है और उन चार कुमारों को उनका दर्शन करने की लालसा जाग्रत हुई।
बैकुंठ के छह द्वार पार करने के बाद जैसे ही वो सप्तम द्वार पर पहुंचे भगवान् के दोनों द्वारपालों ने उनका मार्ग रोक दिया। उन चारों कुमारों ने जब उनका परिचय मांगा तो उन्होंने कहा कि हम श्री विष्णु के द्वारपाल जय और विजय है और आप ऐसे भीतर प्रवेश नहीं कर सकते हैं। जय और विजय ने उन्हें छोटे कुमार समझकर उन्हें अनसुना किया।
उन चार कुमारों ने जय विजय से कहा कि हम ब्रह्मा के मानस पुत्र है और हम ज्ञान प्राप्त करने की जिज्ञासा से श्री विष्णु ने भेंट करने आये है। आप इस प्रकार हमारा मार्ग नहीं रोक सकते हैं। उन चार कुमारों के इस प्रकार के वचन कहने के पश्चात भी जय और विजय ने उन्हें भीतर प्रवेश नहीं करने दिया। इस प्रकार जब माहौल कलहपूर्ण हो गया तो ब्रह्मा के चार कुमारों को क्रोध आ गया।
उन्होने अपनी छोटी सी हथेली में जल लिया और उन दोनों को शाप देते हुआ कहा कि तुम्हे विष्णु की सेवा से दूर होना पड़ेगा और मृत्यु लोक में तुम्हारा जन्म होगा। इस शाप को सुनकर जय विजय घबरा गए और उन्होंने श्री विष्णु को याद किया।
भगवान विष्णु ने जय-विजय को दिए सात या तीन जन्मों के विकल्प-
जब श्री विष्णु को उनके शाप के बारे में पता चला तो उन्होंने जय विजय से कहा कि मैं चार कुमारों के शाप को विफल तो नहीं कर सकता लेकिन तुम मेरे द्वारपाल हो इसके नाते मैं तुम पर कृपा अवश्य करूँगा। मृत्यु लोक में तुम्हे जन्म लेना ही पड़ेगा। या तो सात जन्मों तक तुम मेरे भक्त बन जाओ या तीन जन्मों तक तुम राक्षस योनि में जन्म लेकर फिर मेरे पास आ जाओ।
जय विजय श्री विष्णु से अधिक समय तक दूर नहीं रहना चाहते थे इसलिए उन्होंने कम अवधि का समय चुना। यानी कि सात जन्म तक भक्त बनने की बजाय उन्होंने तीन जन्म तक राक्षस बनना पसंद किया लेकिन उन्होंने श्री विष्णु से विनती करते हुए कहा कि हम राक्षस भले ही बन जाए लेकिन हर बार हमारी मृत्यु आपके हाथों ही हो। हम आपके शत्रु बने और आप स्वयं आकर हमारा उद्धार करे। विष्णु जी ने उन दोनों की यह विनती मान ली।
तीन जन्मों में किन राक्षसों के रूप में जन्मे जय-विजय?
इसके बाद पहले जन्म में जय-विजय ने हिरण्यकशिपु व हिरण्याक्ष के रूप में जन्म लिया। भगवान विष्णु ने वराह अवतार लेकर हिरण्याक्ष का तथा नृसिंह अवतार लेकर हिरण्यकशिपु का वध कर दिया। दूसरे जन्म में जय-विजय ने रावण व कुंभकर्ण के रूप में जन्म लिया।
इनका वध करने के लिए भगवान विष्णु को राम अवतार लेना पड़ा। तीसरे जन्म में जय-विजय शिशुपाल और दंतवक्र के रूप में जन्मे। इस जन्म में भगवान श्रीकृष्ण ने इनका वध किया। इस प्रकार ब्रह्मा जी के उन चार कुमारों के शाप के कारण श्री विष्णु के द्वारपालों को राक्षस बनना पड़ा।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
1-जय और विजय को किसने शाप दिया था?
पौराणिक कथाओं के अनुसार, ब्रह्मा जी के चार कुमारों ने जय और विजय को शाप दिया था।
2-जय-विजय को तीन जन्मों तक राक्षस क्यों बनना पड़ा?
चार कुमारों के शाप के कारण उन्हें मृत्यु लोक में जन्म लेना था। भगवान विष्णु ने उन्हें सात जन्म भक्त या तीन जन्म राक्षस बनने का विकल्प दिया, जिसमें उन्होंने तीन जन्मों का विकल्प चुना।
3-जय-विजय ने तीन जन्मों में किन रूपों में जन्म लिया?
पहले जन्म में हिरण्यकशिपु और हिरण्याक्ष, दूसरे जन्म में रावण और कुंभकर्ण तथा तीसरे जन्म में शिशुपाल और दंतवक्र के रूप में जन्म लिया।
4-जय-विजय ने राक्षस योनि को ही क्यों चुना?
जय-विजय भगवान विष्णु से लंबे समय तक दूर नहीं रहना चाहते थे, इसलिए उन्होंने सात जन्म भक्त बनने की बजाय तीन जन्म राक्षस बनने का विकल्प चुना।
5-जय-विजय का उद्धार कैसे हुआ?
जय-विजय ने प्रार्थना की थी कि हर जन्म में भगवान विष्णु ही उनका वध करें। भगवान ने उनकी इच्छा स्वीकार की और अलग-अलग अवतारों में उनका वध करके उनका उद्धार किया।








