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धृतराष्ट्र ने किस शाप के कारण खोये अपने 100 पुत्र ! जन्म से अंधे होने का कारण था एक कुकर्म ! जानिए

धृतराष्ट्र जन्म से अंधे क्यों थे और उनके सौ पुत्रों का विनाश कैसे हुआ? जानिए पिछले जन्म के उस कर्म की कथा, जिसे उनके अंधत्व और कौरवों के नाश से जोड़ा जाता है।

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धृतराष्ट्र अंधे क्यों थे

महाभारत में धृतराष्ट्र का जीवन उनके कर्मों और पुत्रमोह से जुड़ी कई महत्वपूर्ण घटनाओं को सामने रखता है। उनके जन्म से अंधे होने और सौ पुत्रों के विनाश के पीछे पिछले जन्म के कर्म की कथा बताई जाती है। जानिए हंस के परिवार के साथ किए गए उस क्रूर कर्म का संबंध धृतराष्ट्र के जीवन से कैसे जोड़ा जाता है।

धृतराष्ट्र के जन्म से अंधे होने और 100 पुत्रों के विनाश की कथा-

महाभारत में धृतराष्ट्र एक ऐसा किरदार है जिसे कौरव और पांडवों के बीच हुए भीषण युद्ध का उत्तरदायी माना जा सकता है। धृतराष्ट्र ने कभी भी दुर्योधन को गलत करने से नहीं रोका और ना ही शकुनि को समझाया। यही कारण था कि कौरवो की पांच पांडव के लिए नफरत इतनी बढ़ गई कि उसने भीषण युद्ध का रूप धारण किया। धृतराष्ट्र के जन्म से अंधे होने की कथा जितनी रोचक है उससे कहीं अधिक रोचक उनके अंधे होने का कारण भी है।

पिछले जन्म में धृतराष्ट्र ने किया था क्रूर कर्म-

हमारे पुराणों में यह स्पष्ट रूप से लिखा गया है कि आप इस जन्म में जो कर्म करते है उनका फल आपको कहीं न कहीं जाकर अवश्य प्राप्त होगा। धृतराष्ट्र के जन्म से अंधे होने की कथा भी उनके पिछले जन्म के कर्म से जुडी है। दरअसल धृतराष्ट्र एक जन्म में बड़े पापी राजा थे और वो अपने दिल को बहलाने के लिए किसी पर अत्याचार करने से भी नहीं चूकते थे। अपनी इसी बुरी सोच के चलते एक दिन उन्होंने, तालाब में बच्चों के साथ तैरती एक हंसिनी के परिवार को खत्म कर दिया था और उनकी आँख भी निकाल दी।

हंस के परिवार के विनाश का कर्म धृतराष्ट्र के जीवन से कैसे जुड़ा?-

धृतराष्ट्र के इस क्रूर कर्म का फल एक दिन उन्हें प्राप्त होना ही था। कुरु वंश में अपने पुत्र विचित्रवीर्य की मृत्यु के बाद सत्यवती जो की शांतनु की पत्नी थी वह अपने ऋषि पुत्र वेदव्यास के पास जाती है और उनसे कहती है कि वो नियोग के द्वारा पुत्र पैदा करे जिससे कुरुवंश आगे बढ़े। वेदव्यास जी उनकी इस विनती को स्वीकार कर लेते है लेकिन बड़ी रानी अम्बिका उनके ऋषि शरीर के स्वरुप को देखकर डर जाती है और अपनी आंख को बंद कर लेती है।

नियोग क्रिया सम्पूर्ण होने के बाद वेदव्यास जी अपनी माता सत्यवती से कहते है कि अम्बिका के गर्भ से पैदा होने वाला पुत्र अँधा होगा। बाद में धृतराष्ट्र का विवाह गांधारी से हुआ और उसके सौ कौरव पुत्र युद्ध में नष्ट हो गए। जिस प्रकार पिछले जन्म में धृतराष्ट्र ने हंस के परिवार का नाश कर दिया था ठीक उसी प्रकार एक जन्म में धृतराष्ट्र के परिवार का भी नाश हुआ।

इसलिए मनुष्य को कभी भी ऐसा कोई कर्म नहीं करना चाहिए जो किसी की आत्मा को दुःखी कर दे। वरना उसकी आत्मा से निकला हुआ शाप आपके लिए बेहद घातक भी सिद्ध हो सकता है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)

1-धृतराष्ट्र जन्म से अंधे क्यों थे?

पौराणिक कथाओं के अनुसार, धृतराष्ट्र के जन्म से अंधे होने का संबंध उनके पिछले जन्म के कर्म से जोड़ा जाता है। इस जन्म में अम्बिका ने वेदव्यास के सामने भय के कारण अपनी आंखें बंद कर ली थीं।

2-धृतराष्ट्र के पिछले जन्म का क्या कर्म बताया जाता है?

पौराणिक कथाओं के अनुसार, पिछले जन्म में धृतराष्ट्र ने एक हंसिनी और उसके परिवार पर अत्याचार किया था और उनकी आंखें निकाल दी थीं।

3-धृतराष्ट्र के कितने पुत्र थे?

धृतराष्ट्र के गांधारी से सौ कौरव पुत्र हुए थे, जिनका महाभारत युद्ध में विनाश हो गया।

4-धृतराष्ट्र के सौ पुत्रों का विनाश किस युद्ध में हुआ?

धृतराष्ट्र के सौ पुत्रों का विनाश कौरवों और पांडवों के बीच हुए महाभारत के युद्ध में हुआ।

5-धृतराष्ट्र की कथा से क्या सीख मिलती है?

यह कथा कर्मों के परिणाम और किसी जीव को अनावश्यक पीड़ा न देने की सीख देती है। गलत कर्म का परिणाम किसी न किसी रूप में सामने आ सकता है।

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