|| ज्ञान का महासागर ||

ब्रह्मा का प्रथम पुत्र कौन था? ब्रह्मा को उन पर क्रोध क्यों आया ? उन्होंने किस कार्य को धारण किया ?

ब्रह्मा जी ने पृथ्वी, लोक, समुद्र और चार युगों की रचना के बाद अपने मन से चार कुमारों को जन्म दिया। जानिए सनक, सनातन, सनन्दन और सनत्कुमार की कथा।

साझा करें:

Sanak Sanatan Sanandan Sanatkumar

ब्रह्मा जी ने जब पृथ्वी की रचना की उसके बाद उन्होंने सुमेरु, कैलाश जैसे आठ मुख्य पर्वत का निर्माण किया। इसके बाद ब्रह्मा जी ने सात महाद्वीपों का निर्माण किया। समुद्र, पेड़ पौधे आदि की भी रचना की गई। पृथ्वी को भू लोक कहा गया वही इसके ऊपर के लोक को स्वर्ग यानी स्वर्ग लोक कहा गया।

इस भूमि के नीचे भी सात लोक बनाये गए जिसमे सबसे नीचे पाताल लोक बना। अतल, वितल, सुतल, नाग लोक जैसे लोक भूमि के नीचे है। इन सभी लोकों के ऊपर श्री विष्णु को बैकुंठ लोक दिया गया जो कि सबसे उत्तम लोक है। इसके बाद ब्रह्मा जी ने समय को चार युग में बाँट दिया।

पहला सतयुग जिसका रंग सफ़ेद हुआ। दूसरा त्रेता युग जिसका रंग लाल था और उसके बाद द्वापर युग जिसका रंग पीला है वही सबसे अंत का युग कलियुग है जिसका रंग काला है। इन चारों के युगों के एक चक्र को पूर्ण करके के बराबर समय को एक महायुग का नाम दिया गया। अब ब्रह्मा जी को मनुष्य का निर्माण करना था। इसलिए उन्होंने अपने मन से चार कुमारों को जन्म दिया। वो 4 ऋषि गण कहे गए।

सनक, सनातन, सनन्दन और सनत्कुमार ये चार ब्रह्मा जी के मन से जन्मे उनके पहले पुत्र हुए। इन चारों को ही ब्रह्मा जी का मानस पुत्र कहा गया। ब्रह्मा जी ने उन चारों भाइयों को बताया कि उन्हें आखिर क्यों उत्पन्न किया गया है।

ब्रह्मा जी ने अपने पुत्रों से कहा कि इस पृथ्वी पर मनुष्य की संख्या में वृद्धि करनी है और मुझे इसमें तुम चारों भाइयों का सहयोग लेना है। लेकिन उन चार कुमारों ने ब्रह्मा जी की बात को टाल दिया। उन्होंने कहा, हमारा ध्यान जीवन और मृत्यु पर नहीं बल्कि उस परम् ब्रह्म की प्राप्ति पर होगा। यह ब्रह्माण्ड असीमित है तो हम अपनी बुद्धि को सिर्फ संतान पैदा करने में क्यों तत्पर करने लगे?

ब्रह्मा जी ने उन्हें समझाया कि सृष्टि को आगे बढ़ाने के लिए उनका साथ कितना ज़रूरी है लेकिन वो अपने वचन पर अड़े रहे। उन्होंने ब्रह्मा जी से वरदान की याचना की। उन्होंने ब्रह्मा जी से वरदान माँगा कि वो कभी बूढ़े नहीं हो। हम चारों भाई सदैव कुमार ही बने रहे और बाल रूप में अनंत काल तक ज्ञान का प्रसार करते रहे।

ब्रह्मा जी उस समय भले ही क्रोध में थे लेकिन आख़िरकार उन्होंने अपने मानस पुत्रों की बात मान की और इस प्रकार वो चार बाल संत के रूप में प्रसिद्द हुए।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)

1-ब्रह्मा जी ने चार कुमारों को क्यों जन्म दिया था?

ब्रह्मा जी ने सृष्टि के विस्तार और मनुष्य की संख्या बढ़ाने में सहयोग के लिए अपने मन से चार कुमारों को उत्पन्न किया था।

2-ब्रह्मा जी के चार मानस पुत्र कौन थे?

सनक, सनातन, सनन्दन और सनत्कुमार को ब्रह्मा जी के चार मानस पुत्र कहा गया है।

3-चार कुमारों ने ब्रह्मा जी की आज्ञा मानकर संतान उत्पत्ति क्यों नहीं की?

चारों कुमारों ने कहा कि उनका उद्देश्य जीवन-मृत्यु के चक्र में उलझना नहीं, बल्कि परम ब्रह्म की प्राप्ति और ज्ञान के प्रसार में जीवन लगाना है।

4-चार कुमारों ने ब्रह्मा जी से क्या वरदान मांगा था?

उन्होंने वरदान मांगा कि वे कभी वृद्ध न हों और सदैव कुमार रूप में रहकर अनंत काल तक ज्ञान का प्रसार करते रहें।

5-चार कुमारों को बाल संत क्यों कहा जाता है?

ब्रह्मा जी के वरदान के कारण सनक, सनातन, सनन्दन और सनत्कुमार सदैव बाल रूप में रहे। इसी कारण वे चार बाल संतों के रूप में प्रसिद्ध हुए।

नवीनतम लेख

सभी लेख देखें
12 नवंबर को मंगल का सिंह राशि में गोचर : 12 राशियों पर क्या होगा असर?

ज्योतिष

12 नवंबर को मंगल का सिंह राशि में गोचर : 12 राशियों पर क्या होगा असर?

12 नवंबर 2026 को मंगल सिंह राशि में प्रवेश करेंगे। गुरु और केतु के साथ मंगल की स्थिति से 12 राशियों के करियर, धन, रिश्ते, साहस और निर्णय क्षमता पर असर पड़ेगा।

श्रीमद्भगवद्गीता, अध्याय 1, श्लोक 31: अर्जुन द्वारा युद्ध के विपरीत परिणाम का वर्णन करना

भगवद्गीता

श्रीमद्भगवद्गीता, अध्याय 1, श्लोक 31: अर्जुन द्वारा युद्ध के विपरीत परिणाम का वर्णन करना

श्रीमद्भगवद्गीता के अध्याय 1,श्लोक 31 में अर्जुन युद्ध के विपरीत शकुन, स्वजनों के वध, अनिष्ट परिणाम और कल्याण न दिखाई देने की बात भगवान श्रीकृष्ण से कहते हैं।

श्रुत और श्रोतव्य भोगों का त्याग क्यों जरूरी है? समझिये

आध्यात्म

श्रुत और श्रोतव्य भोगों का त्याग क्यों जरूरी है? समझिये

भगवद्गीता में श्रुत और श्रोतव्य भोगों के त्याग का महत्व, मन की चंचलता, इच्छाओं, आसक्ति, समता, निष्काम कर्म और आत्मज्ञान के मार्ग को सरलता से समझाया गया है।

एक बालक की जिद ! पिता की उदासीनता और विष्णु का प्रसन्न होना ! अमर हुआ ध्रुव

पौराणिक कथाएं

एक बालक की जिद ! पिता की उदासीनता और विष्णु का प्रसन्न होना ! अमर हुआ ध्रुव

भगवान के भक्त ध्रुव महाराज की इस कथा में पांच वर्ष के बालक ध्रुव का अपमान, भगवान विष्णु को प्रसन्न करने के लिए कठोर तपस्या, नारद से मंत्र प्राप्ति और ध्रुव तारा बनने का प्रसंग है।