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देवताओं के डॉक्टर अश्विनी कुमार कौन थे? उनका सिर घोड़े का क्यों था? इनके पिता कौन थे?

अश्विनी कुमार देवताओं के चिकित्सक क्यों कहलाए? जानिए सूर्यदेव और संज्ञा के पुत्र नासत्य-दस्त्र के जन्म की पौराणिक कथा और नकुल-सहदेव से उनका संबंध।

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अश्विनी कुमार कौन थे

देवताओं के भी चिकित्सक होते हैं और पौराणिक कथाओं में अश्विनी कुमारों को उनका वैद्य माना गया है। नासत्य और दस्त्र नाम के ये दोनों भाई सूर्यदेव और संज्ञा से जुड़े हैं और इनके जन्म की कथा बेहद रोचक है। घोड़े के रूप, सूर्यदेव के तेज और इनके जन्म की कथा का संबंध आगे चलकर नकुल और सहदेव से भी जुड़ता है।

अश्विनी कुमार कौन थे और देवताओं के डॉक्टर क्यों कहलाए?

इस मृत्यु लोक में रहने वाले प्राणियों को ही नहीं बल्कि स्वर्ग लोक में रहने वाले देवताओं को भी डॉक्टर की ज़रूरत पड़ती है। हिन्दू धर्म में जो 33 प्रमुख देवता है उनमें से 2 अश्विनी कुमार है जो कि देवताओं के चिकित्सक कहे गए है।

देवता जब भी युद्ध में घायल होते है तो यही अश्विनी कुमार उनकी चिकित्सा करते है। तो आज इस लेख में आइये समझते है कि ये 2 अश्विनी कुमार का जन्म कैसे हुआ ? इनका असली नाम क्या है ? इन्हे अश्व यानी घोड़े का सिर कैसे मिला ?

पुराणों के अनुसार इनका संबंध सूर्यदेव और उनकी पत्नी संज्ञा से माना गया है। दरअसल, देवताओं के शिल्पकार भगवान विश्वकर्मा ने अपनी बेटी संज्ञा का विवाह सूर्य देव से किया।

विवाह के बाद संज्ञा ने वैवस्वत और यम नाम के दो पुत्रों को जन्म दिया और यमुना नाम की पुत्री को भी पैदा किया। सूर्य का तेज काफी प्रचंड था वही संज्ञा कोमल स्वभाव की होने के कारण उनके तेज को सहन नहीं कर पाती थी।

संज्ञा ने सूर्यदेव को छोड़कर घोड़ी का रूप क्यों धारण किया?

एक दिन संज्ञा ने अपनी छाया को सूर्यदेव के पास छोड़ दिया और खुद तपस्या करने चली गई ,आज की भाषा में उसे क्लोन भी कह सकते है। जब संज्ञा काफी समय तक अपने पिता के घर रहकर तप करने लगी तो उसके पिता ने कहा कि अब तुम्हे काफी समय हो गया है।

तुम अपने पति के पास वापिस लौट जाओ लेकिन संज्ञा उत्तरकुरु नामक स्थान पर घोर तपस्या करने चली गई और उसने अपनी विद्या के बल पर घोड़ी का रूप धारण कर लिया।

दूसरी ओर सूर्य देव संज्ञा के क्लोन यानी उसकी छाया को ही सत्य मान बैठे थे लेकिन धीरे 2 उन्हें अहसास हुआ कि यह सिर्फ धोखा है। इसके बाद सूर्यदेव ने अपनी आँख बंद की और ध्यान की अवस्था में अपनी पत्नी को घोड़ी के रूप में तपस्या करते हुए देखा। यह देखकर वह भी संज्ञा के पिता के पास गए और अपने तेज को कुछ कम किया।

सूर्यदेव और घोड़ी रूपी संज्ञा से कैसे जन्मे अश्विनी कुमार?

सूर्यदेव ने घोड़े का रूप लिया और उसी स्थान पर गए जहां संज्ञा तप कर रही थी। सूर्यदेव ने घोड़े के रूप में ही संज्ञा के साथ संसर्ग किया। इसके बाद उन्हें नासत्य, दस्त्र नाम के पुत्र की प्राप्ति हुई।

चूंकि वो घोड़े के संसर्ग से उत्पन्न हुए थे इसलिए उनका नाम अश्विनीकुमार हुआ। सूर्य के तेज कम होने के बाद संज्ञा ने उनके साथ रहना स्वीकार किया।

सूर्य देव के आशीर्वाद से यम न्याय के देव हुए ! यमुना प्रसिद्द नदी हुई। वैवस्वत सातवें मन्वन्तर का स्वामी बनकर मनु के पद पर विराजमान हुआ। नासत्य, दस्त्र देवताओं के चिकित्सक हुए।

महाभारत काल में पांच पांडवों में से दो पांडव नकुल और सहदेव इन्ही अश्विनी कुमारों के पुत्र थे। कुंती को दुर्वासा ऋषि से जो मन्त्र प्राप्त हुआ था उसे कुंती ने माद्री को दिया था और माद्री को भी दो पुत्र की प्राप्ति हुई।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)

1-अश्विनी कुमार कौन थे?

अश्विनी कुमार नासत्य और दस्त्र नाम के दो भाई थे, जिन्हें देवताओं का चिकित्सक माना जाता है।

2-अश्विनी कुमारों के पिता कौन थे?

अश्विनी कुमारों के पिता सूर्यदेव थे और उनकी माता संज्ञा थीं।

3-अश्विनी कुमारों के नाम क्या थे?

अश्विनी कुमारों के नाम नासत्य और दस्त्र बताए गए हैं।

4-अश्विनी कुमारों का घोड़े से क्या संबंध था?

संज्ञा ने तपस्या के दौरान घोड़ी का रूप धारण किया था और सूर्यदेव भी घोड़े का रूप लेकर उनके पास गए। इसी कारण उनके जन्म का संबंध अश्व यानी घोड़े से जुड़ा और वे अश्विनीकुमार कहलाए।

5-नकुल और सहदेव का अश्विनी कुमारों से क्या संबंध था?

महाभारत की कथा के अनुसार नकुल और सहदेव अश्विनी कुमारों के पुत्र थे।

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