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भागवत पुराण, प्रथम स्कंध (18) - युधिष्ठिर ने अर्जुन से द्वारका का हाल क्यों पूछा? श्रीकृष्ण को लेकर जताई बड़ी आशंका

युधिष्ठिर ने अर्जुन की व्यथित अवस्था देखकर द्वारका, यादवों और भगवान श्रीकृष्ण का कुशल समाचार पूछा। अंत में उन्हें अर्जुन की पीड़ा का कारण श्रीकृष्ण से वियोग होने की आशंका हुई।

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Yudhishthir Arjun Samvad

अर्जुन को इस प्रकार विषाद से भरा देखकर धर्मराज युधिष्ठिर अत्यंत चिंतित हो उठे। उन्होंने प्रेम और आशंका से भरे शब्दों में उससे द्वारका और अपने स्वजनों का समाचार पूछना आरम्भ किया। उन्होंने पूछा कि द्वारकापुरी में रहने वाले मधु, भोज, दशार्ह, सात्वत, अन्धक और वृष्णिवंशी यादव कुशल से हैं या नहीं?

उनके नाना शूरसेन, मामा वसुदेव तथा माता तुल्य देवकी आदि सभी प्रसन्न हैं या नहीं? उन्होंने उग्रसेन, देवक, अक्रूर, कृतवर्मा, गद, सारण और अन्य यादव वीरों का भी कुशल समाचार जानना चाहा। साथ ही बलराम, प्रद्युम्न, अनिरुद्ध, साम्ब और भगवान श्रीकृष्ण के अन्य पुत्रों के विषय में भी पूछा कि वे सब आनन्दपूर्वक हैं या नहीं?

युधिष्ठिर ने श्रीकृष्ण और यादवों के बारे में क्या पूछा?

युधिष्ठिर ने आगे कहा कि भगवान श्रीकृष्ण अपने स्वजनों के साथ सुधर्मा सभा में सुखपूर्वक विराजमान हैं या नहीं ? वे ही यदुवंश के आधार हैं और उनके प्रभाव से ही द्वारका नगरी सुरक्षित और समृद्ध है। उनकी सोलह हजार रानियाँ, जैसे सत्यभामा आदि, भगवान की सेवा में निरंतर रत रहती हैं और उनके साथ दिव्य सुख का अनुभव करती हैं। यदुवंशी वीर भी भगवान के बाहुबल से सुरक्षित होकर निर्भय जीवन व्यतीत करते हैं।

इसके बाद युधिष्ठिर ने अर्जुन की ओर देखकर उसकी अपनी स्थिति के विषय में पूछा। उन्होंने कहा कि तुम अत्यंत दुर्बल और श्रीहीन प्रतीत हो रहे हो, मानो तुम्हारा तेज लुप्त हो गया हो। उन्होंने आशंका व्यक्त की कि कहीं द्वारका में तुम्हारा अपमान तो नहीं हुआ, या किसी ने कठोर वचन कहकर तुम्हारा मन दुःखी तो नहीं किया।

कहीं ऐसा तो नहीं कि तुम किसी याचक को वचन देकर भी उसकी सहायता न कर सके हो। उन्होंने यह भी पूछा कि क्या तुमने किसी शरणागत, ब्राह्मण, बालक, वृद्ध, गौ या किसी असहाय प्राणी की रक्षा करने में चूक तो नहीं की?

युधिष्ठिर को क्या आशंका हुई?

कहीं ऐसा तो नहीं कि तुमसे कोई अनुचित आचरण हो गया हो या किसी के साथ अन्याय हो गया हो। युधिष्ठिर ने कहा कि तुम्हारे जैसे धर्मपरायण और मर्यादा का पालन करने वाले पुरुष से ऐसे कर्म की अपेक्षा नहीं की जा सकती। अतः इन सब कारणों से तुम्हारी यह अवस्था प्रतीत नहीं होती।

अंत में उन्होंने अपने हृदय की आशंका प्रकट करते हुए कहा कि संभवतः तुम अपने परम प्रिय सखा और आत्मतुल्य भगवान श्रीकृष्ण से वियोग को प्राप्त हो गए हो। उसी कारण तुम्हारा मन शून्य और व्याकुल हो रहा है। इसके अतिरिक्त इस दुःख का कोई दूसरा कारण प्रतीत नहीं होता।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)

युधिष्ठिर ने अर्जुन से सबसे पहले क्या पूछा?

युधिष्ठिर ने अर्जुन से द्वारका और वहां रहने वाले अपने स्वजनों के कुशल समाचार के बारे में पूछा।

युधिष्ठिर ने भगवान श्रीकृष्ण के बारे में क्या पूछा?

उन्होंने पूछा कि भगवान श्रीकृष्ण अपने स्वजनों के साथ सुधर्मा सभा में सुखपूर्वक विराजमान हैं या नहीं।

अर्जुन की अवस्था देखकर युधिष्ठिर को क्या लगा?

अर्जुन को दुर्बल, श्रीहीन और व्यथित देखकर युधिष्ठिर को किसी बड़े दुःख की आशंका हुई।

युधिष्ठिर ने अर्जुन से किन धर्म संबंधी बातों के बारे में पूछा?

उन्होंने पूछा कि कहीं अर्जुन से किसी याचक, शरणागत, ब्राह्मण, बालक, वृद्ध, गौ या किसी असहाय प्राणी की रक्षा में चूक तो नहीं हुई।

युधिष्ठिर को अर्जुन के दुःख का सबसे बड़ा कारण क्या लगा?

उन्हें आशंका हुई कि अर्जुन अपने परम प्रिय सखा और आत्मतुल्य भगवान श्रीकृष्ण के वियोग से व्यथित हैं।

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