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भागवत पुराण, प्रथम स्कंध (15) - राजा परीक्षित के जन्म की कथा: गर्भ में किस दिव्य पुरुष ने बचाया और क्यों पड़ा ‘विष्णुरात’ नाम?

राजा परीक्षित के जन्म से पहले गर्भ में भगवान के दर्शन, ब्रह्मास्त्र से रक्षा, विष्णुरात नाम और उनके भविष्य की महान भविष्यवाणी से जुड़ी पूरी कथा जानिए।

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परीक्षित जन्म भविष्यवाणी

महाभारत युद्ध के उपरांत धर्मराज युधिष्ठिर भगवान श्रीकृष्ण के आश्रय में रहकर धर्मपूर्वक राज्य का संचालन कर रहे थे। उनके पास अपार सम्पत्ति, यश और वैभव होने पर भी उनका मन भोगों में नहीं लगता था; उन्हें केवल भगवान के चरणों में ही आनन्द प्राप्त होता था।

गर्भ में भगवान ने राजा परीक्षित की ब्रह्मास्त्र से कैसे रक्षा की?

इसी समय उत्तरा के गर्भ में स्थित बालक पर अश्वत्थामा के ब्रह्मास्त्र का प्रभाव पड़ा। जब वह गर्भस्थ शिशु उस प्रचंड तेज से पीड़ित हुआ, तब उसने अपने सामने एक दिव्य पुरुष का दर्शन किया। वह स्वरूप आकार में अत्यन्त सूक्ष्म, किन्तु तेज से परिपूर्ण था।

उनका श्याम शरीर, पीताम्बर, मस्तक पर मुकुट और चार भुजाओं में आयुध धारण किये हुए दिव्य रूप अत्यन्त अद्भुत था। वह पुरुष अपनी गदा को घुमाते हुए गर्भ के चारों ओर विचरण कर रहा था और ब्रह्मास्त्र के तेज को शांत कर रहा था।

जिस प्रकार सूर्य अपनी किरणों से अंधकार को दूर कर देता है, उसी प्रकार उस दिव्य पुरुष ने उस विनाशकारी तेज को नष्ट कर दिया। वह गर्भस्थ बालक आश्चर्य से उस रूप को देखता रहा, परन्तु कुछ ही क्षणों में वह दिव्य पुरुष अदृश्य हो गया। उचित समय आने पर शुभ ग्रहों के प्रभाव से वह बालक जन्मा।

उसका तेज अत्यन्त अद्भुत था, मानो पाण्डु स्वयं पुनः जन्म ले चुके हों। पुत्र के जन्म से युधिष्ठिर अत्यंत प्रसन्न हुए और उन्होंने विधिपूर्वक ब्राह्मणों से जातकर्म आदि संस्कार कराए। उन्होंने उदारतापूर्वक ब्राह्मणों को स्वर्ण, गौएँ, भूमि, हाथी, घोड़े और अन्न का दान दिया।

जन्म के समय परीक्षित को ‘विष्णुरात’ नाम क्यों मिला?

प्रसन्न होकर ब्राह्मणों ने आशीर्वाद देते हुए कहा कि यह बालक भगवान विष्णु की कृपा से उत्पन्न हुआ है, इसलिए इसका नाम “विष्णुरात” होगा और यह महान यशस्वी तथा भगवान का परम भक्त बनेगा।

राजा युधिष्ठिर ने यह जानने की इच्छा प्रकट की कि यह बालक पूर्वकाल के महान राजाओं के समान गुणों को धारण करेगा या नहीं। तब ब्राह्मणों ने उसके उज्ज्वल भविष्य का वर्णन करते हुए कहा कि यह बालक मनु के समान प्रजा का पालन करेगा, श्रीराम के समान सत्यनिष्ठ और ब्राह्मणभक्त होगा, शिबि के समान दानी और शरणागतवत्सल होगा।

धनुर्विद्या में यह अर्जुन के समान श्रेष्ठ होगा, पराक्रम में सिंह के समान, धैर्य में हिमालय के समान अडिग और सहनशीलता में पृथ्वी के समान होगा। यह भगवान विष्णु के समान सबको आश्रय देने वाला और प्रह्लाद के समान भगवान में अटूट श्रद्धा रखने वाला होगा। उन्होंने आगे कहा कि यह अनेक अश्वमेध यज्ञ करेगा, धर्म की रक्षा करेगा और कलियुग के प्रभाव को भी नियंत्रित करेगा।

परीक्षित के जीवन और मृत्यु की भविष्यवाणी क्या थी?

ब्राह्मणों के शाप से जब इसे तक्षक नाग के द्वारा अपनी मृत्यु का ज्ञान होगा, तब यह संसार से विरक्त होकर भगवान की शरण में जाएगा। यह महात्मा शुकदेवजी से आत्मज्ञान प्राप्त करेगा और अंत में गंगा तट पर शरीर त्यागकर परम पद को प्राप्त करेगा।

इस प्रकार ब्राह्मणों ने बालक के भविष्य का वर्णन किया और आशीर्वाद देकर अपने-अपने स्थानों को चले गए। वह बालक “परीक्षित’ नाम से प्रसिद्ध हुआ, क्योंकि गर्भ में जिस दिव्य पुरुष का उसने दर्शन किया था, जन्म के बाद वह उसी को संसार में खोजने और पहचानने का प्रयास करता रहा।

परीक्षित के बड़े होने के बाद युधिष्ठिर ने कौन-से यज्ञ किए?

जैसे शुक्ल पक्ष में चन्द्रमा दिन-प्रतिदिन बढ़ता है, वैसे ही परीक्षित भी अपने गुरुजनों के संरक्षण में धीरे-धीरे बड़ा होने लगा और शीघ्र ही योग्य और बुद्धिमान बन गया। इसी समय धर्मराज युधिष्ठिर ने अपने स्वजनों के वध के प्रायश्चित के लिए अश्वमेध यज्ञ करने का निश्चय किया।

परन्तु उनके पास पर्याप्त धन न होने के कारण वे चिंतित हो उठे। तब भगवान श्रीकृष्ण की प्रेरणा से उनके भाइयों ने उत्तर दिशा से प्राचीन राजाओं द्वारा छोड़ा गया धन लाकर प्रस्तुत किया।

उस धन से यज्ञ की समस्त सामग्री एकत्र कर युधिष्ठिर ने विधिपूर्वक तीन अश्वमेध यज्ञ सम्पन्न किए और भगवान की आराधना की। इस अवसर पर भगवान श्रीकृष्ण भी वहाँ उपस्थित रहे और पाण्डवों को प्रसन्न किया। कुछ समय पश्चात भगवान श्रीकृष्ण ने पाण्डवों से अनुमति लेकर पुनः द्वारका के लिए प्रस्थान किया। इस प्रकार भगवान की कृपा से पाण्डव वंश सुरक्षित रहा और परीक्षित के रूप में उसका उज्ज्वल भविष्य सुनिश्चित हुआ।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)

1-राजा परीक्षित की गर्भ में भगवान ने रक्षा क्यों की?

अश्वत्थामा के ब्रह्मास्त्र से उत्तरा के गर्भ में स्थित परीक्षित की रक्षा भगवान ने स्वयं की थी।

2-राजा परीक्षित का नाम विष्णुरात क्यों रखा गया?

ब्राह्मणों ने बताया कि बालक भगवान विष्णु की कृपा से सुरक्षित हुआ है, इसलिए उसका नाम विष्णुरात रखा गया।

3-राजा परीक्षित नाम कैसे पड़ा?

गर्भ में दिव्य पुरुष के दर्शन के बाद परीक्षित जन्म के पश्चात उसी दिव्य स्वरूप को संसार में खोजते और पहचानते रहे। इसी कारण उनका नाम परीक्षित पड़ा।

4-राजा परीक्षित की मृत्यु के बारे में क्या भविष्यवाणी हुई थी?

उनकी मृत्यु तक्षक नाग के द्वारा होने की भविष्यवाणी हुई थी। मृत्यु का ज्ञान होने पर वे संसार से विरक्त होकर भगवान की शरण में जाएंगे और शुकदेवजी से आत्मज्ञान प्राप्त करेंगे।

5-राजा परीक्षित को किन महान व्यक्तियों के समान गुणों वाला बताया गया?

उन्हें मनु के समान प्रजापालक, श्रीराम के समान सत्यनिष्ठ, शिबि के समान दानी, अर्जुन के समान धनुर्धर और प्रह्लाद के समान भगवान के प्रति श्रद्धावान बताया गया।

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