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वृश्चिक संक्रांति 2026 कब है? जानें पुण्य काल, स्नान-दान और पूजा विधि

वृश्चिक संक्रांति 2026 कब है? सूर्य कब वृश्चिक राशि में प्रवेश करेंगे? पुण्य काल, स्नान-दान, सूर्य पूजा, मंत्र और धार्मिक महत्व समेत जरूरी जानकारी यहां जानें।

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Vrishchik Sankranti 2026 Date

16 नवंबर 2026 को सूर्य देव तुला राशि से निकलकर वृश्चिक राशि में प्रवेश करेंगे। इस दिन स्नान, सूर्य को अर्घ्य, दान और पूजा का विशेष महत्व रहेगा। जानें वृश्चिक संक्रांति का सही समय, पुण्य काल और पूजा करने की पूरी विधि।

वृश्चिक संक्रांति 2026 कब है?

वृश्चिक संक्रांति 16 नवंबर 2026, सोमवार को मनाई जाएगी। इस दिन सूर्य देव वृश्चिक राशि में प्रवेश करेंगे। पंचांग के अनुसार सूर्य का वृश्चिक राशि में प्रवेश शाम 7 बजकर 48 मिनट पर होगा। सूर्य के एक राशि से दूसरी राशि में प्रवेश करने की इस घटना को ही संक्रांति कहा जाता है।

वृश्चिक संक्रांति के दिन स्नान, दान और सूर्य पूजा को विशेष महत्व दिया जाता है। इस अवसर पर श्रद्धालु सूर्य देव को अर्घ्य देकर सुख, स्वास्थ्य और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा की कामना करते हैं।

वृश्चिक संक्रांति 2026 का पुण्य काल कब है?

वृश्चिक संक्रांति का पुण्य काल दोपहर 12:06 बजे से शाम 5:27 बजे तक रहेगा। वहीं महापुण्य काल दोपहर 3:40 बजे से शाम 5:27 बजे तक रहेगा। इस दौरान स्नान, दान और धार्मिक कार्य करना शुभ माना जाता है।

संक्रांति के दिन पुण्य काल में किया गया दान विशेष धार्मिक महत्व रखता है। इसलिए इस समय अपनी श्रद्धा और सामर्थ्य के अनुसार अन्न, वस्त्र, गुड़, तिल या जरूरत की अन्य वस्तुओं का दान किया जा सकता है।

वृश्चिक संक्रांति पर स्नान और सूर्य पूजा कैसे करें?

वृश्चिक संक्रांति के दिन सुबह स्नान करके स्वच्छ कपड़े पहनें। संभव हो तो स्नान के जल में थोड़ा गंगाजल मिलाया जा सकता है। इसके बाद सूर्य देव को तांबे के पात्र से जल अर्पित करें।

सूर्य को अर्घ्य देते समय दोनों हाथों से जल चढ़ाएं और मन में सूर्य देव का स्मरण करें। इसके बाद सूर्य देव को लाल फूल, अक्षत और गुड़ अर्पित कर सकते हैं। पूजा के दौरान “ॐ सूर्याय नमः” या “ॐ घृणि सूर्याय नमः” मंत्र का जाप किया जा सकता है।

इसके बाद जरूरतमंद व्यक्ति को अन्न, वस्त्र, गुड़, तिल या अपनी क्षमता के अनुसार उपयोगी वस्तु का दान करें। संक्रांति के दिन सेवा और परोपकार को भी पूजा का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है।

वृश्चिक संक्रांति पर क्या दान करना चाहिए?

इस दिन दान के लिए अन्न, वस्त्र, गुड़, तिल, गेहूं और तांबे के बर्तन जैसी वस्तुओं को विशेष रूप से उपयोगी माना जाता है। जरूरतमंद व्यक्ति को भोजन कराना या उसकी आवश्यकता की वस्तु उपलब्ध कराना भी अच्छा माना जाता है।

दान करते समय दिखावे के बजाय श्रद्धा और सेवा की भावना रखना अधिक महत्वपूर्ण है। सामर्थ्य के अनुसार किया गया छोटा दान भी धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जाता है। संक्रांति पर सूर्य पूजा के बाद दान करने की परंपरा भी प्रचलित है।

वृश्चिक संक्रांति का धार्मिक महत्व क्या है?

संक्रांति का संबंध सूर्य देव से है और सूर्य के राशि परिवर्तन को धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जाता है। वृश्चिक संक्रांति पर सूर्य पूजा के साथ स्नान और दान करने की परंपरा है।

इस दिन सूर्य को जल अर्पित करके व्यक्ति स्वास्थ्य, तेज, आत्मविश्वास और सुख-शांति की प्रार्थना करता है। पितरों के लिए तर्पण और धार्मिक कर्म करने की परंपरा भी कई परिवारों में है। इसके अलावा जरूरतमंदों की सहायता और अन्न-वस्त्र का दान इस दिन के धार्मिक पक्ष को और महत्वपूर्ण बनाता है।

वृश्चिक संक्रांति का संदेश केवल पूजा तक सीमित नहीं है। यह दिन सूर्य उपासना के साथ सेवा, दान और आत्मसंयम को जीवन में अपनाने की प्रेरणा देता है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)

वृश्चिक संक्रांति 2026 कब है?

वृश्चिक संक्रांति 16 नवंबर 2026, सोमवार को है।

वृश्चिक संक्रांति 2026 पर सूर्य कब वृश्चिक राशि में प्रवेश करेंगे?

सूर्य देव 16 नवंबर को शाम 7:48 बजे वृश्चिक राशि में प्रवेश करेंगे।

वृश्चिक संक्रांति 2026 का पुण्य काल कब है?

पुण्य काल दोपहर 12:06 बजे से शाम 5:27 बजे तक रहेगा।

वृश्चिक संक्रांति पर क्या दान करना चाहिए?

इस दिन अन्न, गुड़, तिल, गेहूं, वस्त्र और तांबे के बर्तन का दान किया जा सकता है।

वृश्चिक संक्रांति पर सूर्य पूजा कैसे करें?

स्नान के बाद सूर्य देव को तांबे के पात्र से जल अर्पित करें, लाल फूल और अक्षत चढ़ाएं तथा सूर्य मंत्र का जाप करें।

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