छठ पूजा 2026 का चार दिवसीय महापर्व 13 नवंबर से शुरू होगा और 16 नवंबर को उषा अर्घ्य व पारण के साथ पूरा होगा। नहाय-खाय, खरना, संध्या अर्घ्य और उषा अर्घ्य के दौरान शुद्धता और नियमों का विशेष ध्यान रखा जाता है। अगर आप पहली बार छठ व्रत रख रहे हैं, तो इन जरूरी नियमों को पहले से जान लेना बेहद उपयोगी रहेगा।
छठ पूजा 2026 में व्रती के लिए सबसे जरूरी नियम-
छठ पूजा में शुद्धता और अनुशासन का विशेष महत्व है। नहाय-खाय से ही व्रती अपने खान-पान और दिनचर्या में संयम शुरू कर देते हैं। घर, रसोई और पूजा की जगह की साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखना चाहिए।
छठ के दौरान भोजन सात्विक रखा जाता है। प्रसाद तैयार करते समय साफ-सफाई का पूरा ध्यान रखना चाहिए और प्रसाद को जूठा नहीं करना चाहिए। व्रती के साथ-साथ परिवार के दूसरे सदस्यों को भी पूजा की पवित्रता और नियमों का ध्यान रखना चाहिए। छठ का प्रसाद तैयार करने और पूजा सामग्री रखने में स्वच्छता जरूरी है।
छठ पूजा के चार दिन 13 नवंबर को नहाय-खाय, 14 नवंबर को खरना, 15 नवंबर को संध्या अर्घ्य और 16 नवंबर को उषा अर्घ्य व पारण के साथ पूरे होंगे।
नहाय-खाय और खरना में क्या करें और क्या न करें?
नहाय-खाय-
नहाय-खाय के दिन व्रती स्नान के बाद सात्विक भोजन ग्रहण करते हैं। इस दिन भोजन की शुद्धता का खास ध्यान रखा जाता है।
क्या करें:
- स्नान करके व्रत की शुरुआत करें।
- घर और रसोई की अच्छी तरह सफाई करें।
- सात्विक भोजन ग्रहण करें।
- भोजन बनाने और खाने में स्वच्छता रखें।
- छठ के प्रसाद और भोजन में परिवार की परंपरा का पालन करें।
क्या न करें:
- तामसिक भोजन से बचें।
- भोजन में प्याज-लहसुन का प्रयोग न करें।
- बिना साफ-सफाई के प्रसाद या भोजन तैयार न करें।
- व्रत के नियम शुरू होने के बाद मनमाने ढंग से खान-पान न करें।
खरना
14 नवंबर को खरना होगा। इस दिन व्रती दिनभर उपवास रखते हैं और शाम को पूजा के बाद प्रसाद ग्रहण करते हैं। इसके बाद कठिन व्रत की शुरुआत होती है।
क्या करें:
दिनभर संयम और श्रद्धा के साथ व्रत रखें। शाम को शुद्धता के साथ खरना का प्रसाद तैयार करें। पूजा के बाद प्रसाद ग्रहण करें। खरना का प्रसाद परिवार और आसपास के लोगों में श्रद्धा से बांटें।
क्या न करें:
खरना के प्रसाद को पहले से चखने से बचें। प्रसाद बनाते समय साफ-सफाई से समझौता न करें। खरना के बाद व्रत के नियमों को हल्के में न लें।
खरना के बाद 36 घंटे के व्रत में किन बातों का ध्यान रखें?
खरना के बाद व्रती संध्या अर्घ्य और अगले दिन उषा अर्घ्य तक कठिन व्रत रखते हैं। परंपरा में इस दौरान निर्जल व्रत किया जाता है और उषा अर्घ्य के बाद पारण किया जाता है।
इस अवधि में व्रती को अपनी पूरी दिनचर्या संयमित रखनी चाहिए। अनावश्यक भागदौड़, विवाद और ऐसे कामों से बचना चाहिए जिनसे शरीर पर जरूरत से ज्यादा दबाव पड़े।
परिवार के सदस्यों की जिम्मेदारी भी बढ़ जाती है। व्रती के लिए पूजा सामग्री तैयार करने, घाट तक पहुंचने और अर्घ्य की व्यवस्था में सहयोग करना चाहिए।
ध्यान रखने वाली बातें:
- व्रत के दौरान मन और वाणी पर संयम रखें।
- अनावश्यक क्रोध और विवाद से बचें।
- व्रती को आराम का पर्याप्त अवसर दें।
- पूजा की सामग्री पहले से तैयार रखें।
- घाट पर भीड़ और पानी की स्थिति को देखते हुए सावधानी रखें।
छठ पूजा में क्या खाना चाहिए और किन चीजों से बचना चाहिए?
छठ में खान-पान का नियम बहुत महत्वपूर्ण है। नहाय-खाय से लेकर खरना तक भोजन सात्विक और शुद्ध रखा जाता है। खरना में गुड़ की खीर और रोटी जैसे प्रसाद की परंपरा है।
खाने में क्या रखें:
- सात्विक भोजन
- सेंधा नमक का प्रयोग
- गुड़
- चावल
- गेहूं का आटा
- फल
- ठेकुआ
- खरना की गुड़ की खीर और रोटी
किन चीजों से बचें:
- मांसाहारी भोजन
- शराब और नशीली चीजें
- प्याज और लहसुन
- बहुत तला-भुना या तामसिक भोजन
- प्रसाद को बिना स्वच्छता के तैयार करना
छठ का प्रसाद केवल भोजन नहीं बल्कि पूजा का महत्वपूर्ण हिस्सा होता है, इसलिए इसे बनाते समय साफ हाथ, साफ बर्तन और स्वच्छ स्थान का ध्यान रखना चाहिए।
संध्या और उषा अर्घ्य के समय क्या करें और क्या न करें?
15 नवंबर को संध्या अर्घ्य और 16 नवंबर को उषा अर्घ्य होगा। संध्या अर्घ्य के लिए व्रती घाट पर जाकर डूबते सूर्य को अर्घ्य देते हैं। अगले दिन उगते सूर्य को अर्घ्य देने के बाद व्रत का पारण किया जाता है।
क्या करें:
- घाट पर समय से पहले पहुंचें।
- सूप और दउरा में प्रसाद व्यवस्थित रखें।
- अर्घ्य के समय श्रद्धा और अनुशासन बनाए रखें।
- घाट और आसपास की जगह को साफ रखें।
- अर्घ्य के बाद प्रसाद को श्रद्धा से ग्रहण और वितरित करें।
- उषा अर्घ्य के बाद ही व्रत का पारण करें।
क्या न करें:
- घाट पर गंदगी न फैलाएं।
- पूजा सामग्री या प्रसाद पानी में न फेंकें।
- अर्घ्य के दौरान धक्का-मुक्की और शोर से बचें।
- पानी में जरूरत से ज्यादा गहराई तक न जाएं।
- पूजा के दौरान मोबाइल और दूसरी चीजों में अनावश्यक व्यस्त न रहें।
छठ पूजा में कौन-सी गलतियां नहीं करनी चाहिए?
छठ पूजा में छोटी-सी लापरवाही भी पूजा की पूरी व्यवस्था को प्रभावित कर सकती है। इसलिए इन बातों का खास ध्यान रखें-
- प्रसाद बनाते समय स्वच्छता से समझौता न करें।
- प्रसाद को जूठा न करें।
- पूजा सामग्री को इधर-उधर न रखें।
- व्रती के नियमों का मजाक न बनाएं और उन्हें अनावश्यक काम के लिए परेशान न करें।
- घाट पर गंदगी न करें।
- पानी में बच्चों को अकेला न छोड़ें।
- अर्घ्य के समय जल्दबाजी न करें।
- व्रत के दौरान अपनी परंपरा के विपरीत खान-पान न करें।
- खरना के बाद शुरू हुए कठिन व्रत के दौरान व्रती को पर्याप्त सहयोग दें।
- उषा अर्घ्य से पहले व्रत खोलने की जल्दबाजी न करें।
छठ पूजा का मूल भाव श्रद्धा, शुद्धता, अनुशासन और सूर्य उपासना से जुड़ा है। इसलिए बाहरी दिखावे से ज्यादा जरूरी पूजा की पवित्रता और नियमों का पालन करना है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
छठ पूजा 2026 कब से शुरू होगी?
छठ पूजा 2026 का चार दिवसीय पर्व 13 नवंबर से नहाय-खाय के साथ शुरू होगा। 14 नवंबर को खरना, 15 नवंबर को संध्या अर्घ्य और 16 नवंबर को उषा अर्घ्य व पारण होगा।
छठ पूजा में क्या खाना चाहिए?
नहाय-खाय और खरना में सात्विक भोजन किया जाता है। फल, चावल, गुड़, गेहूं और छठ के पारंपरिक प्रसाद का सेवन किया जाता है। प्याज-लहसुन और तामसिक भोजन से बचते हैं।
खरना के बाद क्या खाना-पीना चाहिए?
खरना के प्रसाद के बाद व्रती कठिन व्रत में प्रवेश करते हैं। परंपरा के अनुसार उषा अर्घ्य के बाद व्रत का पारण किया जाता है।
छठ पूजा में कौन-सी गलतियां नहीं करनी चाहिए?
प्रसाद को जूठा करना, पूजा स्थल या घाट पर गंदगी फैलाना, तामसिक भोजन करना, अर्घ्य के समय अनुशासन तोड़ना और व्रती को अनावश्यक परेशान करना नहीं चाहिए।
उषा अर्घ्य के बाद क्या किया जाता है?
उगते सूर्य को अर्घ्य देने के बाद छठ व्रत का पारण किया जाता है। इसके बाद प्रसाद ग्रहण किया जाता है और परिवार तथा अन्य लोगों में प्रसाद बांटा जाता है।









