आश्विन शुक्ल पक्ष की एकादशी को पापांकुशा एकादशी का व्रत रखा जाता है। इस दिन भगवान विष्णु की पूजा और व्रत का विशेष महत्व है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, यह व्रत मनुष्य को अपने पाप कर्मों से मुक्ति पाने और भगवान विष्णु की भक्ति करने का मार्ग देता है।
पापांकुशा एकादशी की कथा में एक ऐसे बहेलिए का प्रसंग आता है, जिसने जीवनभर पाप किए, लेकिन एकादशी व्रत के प्रभाव से उसका जीवन बदल गया।
पापांकुशा एकादशी 2026 कब है? जानें तिथि और पारण समय-
पापांकुशा एकादशी का व्रत 22 अक्टूबर 2026, गुरुवार को रखा जाएगा। आश्विन शुक्ल एकादशी तिथि 21 अक्टूबर को दोपहर 2:11 बजे शुरू होगी और 22 अक्टूबर को दोपहर 2:47 बजे समाप्त होगी।
व्रत रखने के बाद अगले दिन 23 अक्टूबर 2026 को द्वादशी में पारण किया जाएगा। पंचांग गणना के अनुसार पारण का समय सुबह 6:19 बजे से 8:38 बजे तक रहेगा। एकादशी के दिन भगवान विष्णु की पूजा करें। सामर्थ्य के अनुसार फलाहार या अन्य सात्विक व्रत रखा जा सकता है।
पापांकुशा एकादशी की व्रत कथा-
पौराणिक कथा के अनुसार, प्राचीन समय में विंध्य पर्वत पर क्रोधन नाम का एक बहेलिया रहता था। उसका पूरा जीवन हिंसा, लूटपाट, मद्यपान और दूसरे पाप कर्मों में बीत रहा था। गलत संगति ने उसके जीवन को और भी खराब कर दिया था।
जब उसके जीवन का अंतिम समय निकट आया तो यमराज के दूत उसके पास पहुंचे। उन्होंने बहेलिए से कहा कि अगले दिन वे उसे लेने आएंगे। मृत्यु की बात सुनकर वह बहुत डर गया। उसे अपने जीवन में किए गए पाप कर्म याद आने लगे।
बहेलिया किसी तरह महर्षि अंगिरा के आश्रम पहुंचा और उनके चरणों में गिर पड़ा। उसने ऋषि से कहा कि उसने जीवनभर गलत कर्म किए हैं। अब वह ऐसा उपाय जानना चाहता है जिससे उसके पाप दूर हो सकें और उसे मोक्ष का मार्ग मिल सके। महर्षि अंगिरा ने उसकी बात सुनकर उसे आश्विन शुक्ल पक्ष की पापांकुशा एकादशी का विधिपूर्वक व्रत करने की सलाह दी।
ऋषि की आज्ञा के अनुसार बहेलिए ने पापांकुशा एकादशी का व्रत किया और भगवान विष्णु की भक्ति की। धार्मिक कथा के अनुसार, इस व्रत के प्रभाव से उसके संचित पाप नष्ट हो गए और उसे मोक्ष की प्राप्ति हुई।
इसी कारण पौराणिक मान्यता में पापांकुशा एकादशी को पापों से मुक्ति, मोक्ष, आरोग्य, अन्न और धन प्रदान करने वाला व्रत माना गया है।
पापांकुशा एकादशी पर क्या करें और क्या नहीं करें?
पापांकुशा एकादशी पर सुबह स्नान करके व्रत का संकल्प लें और भगवान विष्णु की पूजा करें। भगवान को पीले फूल और तुलसी दल अर्पित करें। दीपक जलाकर 'ॐ नमो भगवते वासुदेवाय' मंत्र का जाप किया जा सकता है।
दिनभर भगवान विष्णु का स्मरण, भजन और कीर्तन करें। सामर्थ्य के अनुसार जरूरतमंद व्यक्ति को अन्न, वस्त्र या धन का दान करना भी शुभ माना जाता है। रात में भगवान का स्मरण और जागरण करने की परंपरा भी है।
व्रत के दौरान अन्न और चावल का सेवन नहीं किया जाता। मांसाहार, मद्यपान और दूसरे तामसिक पदार्थों से दूर रहना चाहिए। क्रोध, विवाद और गलत आचरण से भी बचना चाहिए। व्रत का उद्देश्य केवल भोजन छोड़ना नहीं, बल्कि मन, वाणी और कर्म में संयम रखना भी है।
पापांकुशा एकादशी का धार्मिक महत्व-
पौराणिक मान्यता के अनुसार, पापांकुशा एकादशी का व्रत करने से मनुष्य को अनेक तीर्थों के पुण्य के समान फल प्राप्त होता है। कथा में गंगा, गया, काशी, कुरुक्षेत्र और पुष्कर जैसे तीर्थों के पुण्य से भी इस व्रत की महिमा को जोड़ा गया है।
एकादशी व्रत के साथ हरिवासर में भगवान विष्णु का स्मरण और रात्रि जागरण करने की भी परंपरा है। धार्मिक मान्यता में इससे भगवान विष्णु के धाम की प्राप्ति का पुण्य मिलता है।
कथा में इस व्रत के प्रभाव से मातृ पक्ष, पितृ पक्ष, स्त्री पक्ष और मित्र पक्ष की कई पीढ़ियों के उद्धार की भी बात कही गई है। भक्त को दिव्य स्वरूप प्राप्त होकर भगवान विष्णु के धाम जाने का फल मिलने की पौराणिक मान्यता है।
इस तरह पापांकुशा एकादशी केवल व्रत का दिन नहीं, बल्कि भगवान विष्णु की भक्ति, आत्मसंयम, दान और अपने कर्मों में सुधार का अवसर भी है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
1-पापांकुशा एकादशी 2026 कब है?
पापांकुशा एकादशी का व्रत 22 अक्टूबर 2026, गुरुवार को रखा जाएगा।
2-पापांकुशा एकादशी 2026 का पारण कब करें?
23 अक्टूबर 2026 को सुबह 6:19 बजे से 8:38 बजे के बीच पारण किया जा सकता है।
3-पापांकुशा एकादशी पर क्या करना चाहिए?
भगवान विष्णु की पूजा, तुलसी अर्पित करना, मंत्र जाप, भजन-कीर्तन, दान और सामर्थ्य के अनुसार व्रत करना चाहिए।
4-पापांकुशा एकादशी पर क्या नहीं खाना चाहिए?
एकादशी व्रत में अनाज और चावल का सेवन नहीं किया जाता। मांसाहार और मद्यपान से भी बचना चाहिए।
5-पापांकुशा एकादशी की व्रत कथा क्या है?
कथा में क्रोधन नाम के एक पापी बहेलिए का प्रसंग आता है, जिसने महर्षि अंगिरा के कहने पर पापांकुशा एकादशी का व्रत किया। पौराणिक मान्यता के अनुसार व्रत के प्रभाव से उसके पाप नष्ट हुए और उसे मोक्ष मिला।









