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शारदीय नवरात्रि 2026 : तीसरे दिन मां चंद्रघंटा की पूजा क्यों होती है? जानें स्वरूप, कथा और पूजा विधि

नवरात्रि के तीसरे दिन मां चंद्रघंटा की पूजा होती है। जानें देवी का स्वरूप, चंद्रघंटा नाम की कथा, पूजा विधि, मंत्र, भोग, शुभ मुहूर्त और धार्मिक महत्व।

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Maa Chandraghanta Puja 2026

शारदीय नवरात्रि के तीसरे दिन मां चंद्रघंटा की पूजा की जाती है। नवदुर्गा के तीसरे स्वरूप में मां का रूप शांत भी है और तेजस्वी भी। उनके मस्तक पर घंटे के आकार का अर्धचंद्र सुशोभित रहता है, इसी कारण उन्हें चंद्रघंटा कहा जाता है।

मां चंद्रघंटा का स्वरूप साहस और शक्ति से जुड़ा है। उनका वाहन सिंह है और देवी के दस हाथ बताए गए हैं। उनके हाथों में त्रिशूल, गदा, तलवार, कमल, धनुष-बाण, जप माला और कमंडल सहित कई अस्त्र-शस्त्र रहते हैं। उनका स्वरूप भक्तों को निर्भय रहने की प्रेरणा देता है।

मां चंद्रघंटा की पूजा कब होगी?

साल 2026 में शारदीय नवरात्रि का तीसरा दिन 13 अक्टूबर, मंगलवार को है। इस दिन तृतीया तिथि रहेगी और मां चंद्रघंटा की पूजा की जाएगी। नवरात्रि कैलेंडर में इस दिन सिंदूर तृतीया और चंद्रघंटा पूजा का उल्लेख है।

मां चंद्रघंटा पूजा का शुभ मुहूर्त-

13 अक्टूबर को पूजा के लिए सुबह का समय अच्छा रहेगा। इस दिन ब्रह्म मुहूर्त सुबह 4:46 बजे से 5:36 बजे तक और अभिजित मुहूर्त सुबह 11:49 बजे से दोपहर 12:36 बजे तक रहेगा। पूजा के लिए अभिजित मुहूर्त का समय भी लिया जा सकता है। स्थानीय पंचांग के अनुसार मुहूर्त में कुछ मिनट का अंतर हो सकता है।

मां चंद्रघंटा का नाम कैसे पड़ा?

मां के मस्तक पर अर्धचंद्र घंटे के आकार में सुशोभित रहता है। इसी विशेष स्वरूप के कारण देवी को चंद्रघंटा नाम मिला। मां का यह रूप देखने में अत्यंत सुंदर और शांत है, लेकिन जरूरत पड़ने पर यही देवी युद्ध के लिए भी तैयार होती हैं। सिंह पर सवार मां चंद्रघंटा के हाथों में अस्त्र-शस्त्र उनकी शक्ति और पराक्रम को दर्शाते हैं।

उनके स्वरूप में शांति और वीरता दोनों दिखाई देती हैं। इसलिए नवरात्रि के तीसरे दिन मां की पूजा में भक्त साहस, आत्मबल और मन की शांति की प्रार्थना करते हैं।

मां चंद्रघंटा की कथा-

पौराणिक कथा के अनुसार, मां चंद्रघंटा का संबंध देवी पार्वती से है। भगवान शिव से विवाह के बाद देवी पार्वती ने अपने मस्तक पर अर्धचंद्र धारण किया। यही अर्धचंद्र घंटे के आकार में दिखाई देता है, जिसके कारण उनका नाम चंद्रघंटा पड़ा। देवी का यह स्वरूप दुष्ट शक्तियों के विनाश और भक्तों की रक्षा के लिए प्रकट हुआ। सिंह पर सवार होकर मां युद्ध के लिए निकलती हैं और अपने अस्त्र-शस्त्रों से असुरों का सामना करती हैं।

मां के घंटे की ध्वनि को भी विशेष महत्व दिया जाता है। इस ध्वनि से नकारात्मक शक्तियों का नाश और वातावरण में सकारात्मकता आने का भाव जुड़ा है।

मां चंद्रघंटा का स्वरूप यह संदेश देता है कि शांति के साथ शक्ति और साहस भी जरूरी है। भक्त उनकी पूजा करके जीवन के डर और परेशानियों से लड़ने का आत्मबल मांगते हैं।

मां चंद्रघंटा की पूजा विधि-

नवरात्रि के तीसरे दिन सुबह स्नान करके साफ कपड़े पहनें और पूजा स्थान को स्वच्छ करें। मां चंद्रघंटा की तस्वीर या प्रतिमा को पूजा स्थान पर स्थापित करें।

सबसे पहले गणेश जी और कलश का पूजन करें। इसके बाद मां को जल, अक्षत, रोली, कुमकुम और फूल अर्पित करें। दीपक और धूप जलाएं। मां को लाल या पीले फूल चढ़ाए जा सकते हैं।

इसके बाद मां के मंत्र का जाप करें और अपनी मनोकामना के लिए प्रार्थना करें। मां को भोग लगाकर आरती करें। पूजा समाप्त होने के बाद प्रसाद परिवार के सदस्यों में बांटें।

मां चंद्रघंटा का मंत्र-

मां चंद्रघंटा की पूजा में इस मंत्र का जाप करें- ॐ देवी चन्द्रघण्टायै नमः॥

ध्यान मंत्र-पिण्डजप्रवरारूढ़ा चण्डकोपास्त्रकेर्युता। प्रसादं तनुते मह्यं चन्द्रघण्टेति विश्रुता॥

मां की आराधना के समय श्रद्धा और एकाग्रता के साथ मंत्र का जाप करना चाहिए।

मां चंद्रघंटा को क्या भोग लगाएं?

मां चंद्रघंटा को दूध और दूध से बनी मिठाइयों का भोग लगाया जाता है। खीर, दूध से बनी मिठाई या पंचामृत का भोग भी लगाया जा सकता है। भोग के साथ फल और अन्य सात्विक सामग्री भी रख सकते हैं। पूजा के बाद भोग को प्रसाद के रूप में सभी में बांटना चाहिए।

मां चंद्रघंटा की पूजा का महत्व-

मां चंद्रघंटा की पूजा में साहस, शक्ति और शांति का विशेष महत्व है। उनका स्वरूप भक्तों को डर और कठिन परिस्थितियों का सामना मजबूती से करने की प्रेरणा देता है। नवरात्रि के तीसरे दिन मां की आराधना करते समय मन की अशांति दूर करने, आत्मविश्वास बढ़ाने और जीवन में सकारात्मकता बनाए रखने की प्रार्थना की जाती है।

मां का सिंह पर सवार स्वरूप शक्ति का प्रतीक है, जबकि मस्तक पर सुशोभित चंद्रमा शीतलता और संतुलन का भाव देता है। इसलिए मां चंद्रघंटा का स्वरूप शक्ति और शांति का सुंदर मेल माना जाता है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)

1-नवरात्रि के किस दिन मां चंद्रघंटा की पूजा होती है?

नवरात्रि के तीसरे दिन मां चंद्रघंटा की पूजा की जाती है।

2-मां चंद्रघंटा का नाम कैसे पड़ा?

मां के मस्तक पर घंटे के आकार का अर्धचंद्र सुशोभित रहता है। इसी कारण उन्हें चंद्रघंटा कहा जाता है।

3-मां चंद्रघंटा का वाहन क्या है?

मां चंद्रघंटा का वाहन सिंह है।

4-मां चंद्रघंटा का पूजा मंत्र क्या है?

“ॐ देवी चन्द्रघण्टायै नमः॥” मां चंद्रघंटा का प्रमुख पूजा मंत्र है।

5-मां चंद्रघंटा को क्या भोग लगाना चाहिए?

मां को दूध, खीर, दूध से बनी मिठाई या पंचामृत का भोग लगाया जा सकता है।

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