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शारदीय नवरात्रि 2026 : मां ब्रह्मचारिणी की पूजा कैसे करें? जानें मंत्र, भोग और पूजा की पूरी विधि

नवरात्रि के दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी की पूजा होती है। जानें देवी का स्वरूप, भगवान शिव को पाने की तपस्या, पूजा विधि, मंत्र, भोग और धार्मिक महत्व की पूरी जानकारी।

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Maa Brahmacharini Puja 2026

शारदीय नवरात्रि के दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी की पूजा की जाती है। नवदुर्गा में मां ब्रह्मचारिणी को दूसरा स्वरूप माना जाता है। देवी का यह रूप तप, संयम, धैर्य और साधना से जुड़ा है। उनके एक हाथ में जप की माला और दूसरे हाथ में कमंडल रहता है। उनका स्वरूप शांत, तेजस्वी और सरल है। 2026 में शारदीय नवरात्रि की शुरुआत 11 अक्टूबर से होगी और दूसरे दिन यानी 12 अक्टूबर को मां ब्रह्मचारिणी की पूजा की जाएगी।

मां ब्रह्मचारिणी का नाम कैसे पड़ा?

‘ब्रह्मचारिणी’ शब्द दो शब्दों से मिलकर बना है। यहां ‘ब्रह्म’ का अर्थ तपस्या और ‘चारिणी’ का अर्थ तप का आचरण करने वाली है। इसलिए मां ब्रह्मचारिणी का स्वरूप कठिन तपस्या, त्याग और दृढ़ संकल्प से जुड़ा है।

देवी के दाहिने हाथ में जप की माला और बाएं हाथ में कमंडल होता है। उनका शांत स्वरूप साधना और आत्मसंयम का भाव दिखाता है। नवरात्रि के दूसरे दिन उनकी पूजा करने से मन को एकाग्र रखने और अपने संकल्प पर टिके रहने की प्रेरणा मिलती है।

भगवान शिव को पाने के लिए मां ने की कठोर तपस्या-

मां ब्रह्मचारिणी की कथा भगवान शिव से जुड़ी है। पिछले जन्म में देवी सती ने भगवान शिव को पति के रूप में प्राप्त किया था। बाद में देवी ने हिमालय की पुत्री के रूप में जन्म लिया और भगवान शिव को फिर से पति रूप में पाने के लिए कठोर तपस्या शुरू की।

नारद जी के मार्गदर्शन में देवी ने लंबे समय तक कठिन साधना की। उन्होंने पहले फल और शाक का सेवन किया। इसके बाद तपस्या और कठोर होती गई और उन्होंने भोजन का त्याग कर दिया। यहां तक कि सूखे बेलपत्र भी छोड़ दिए। इसी कारण उनका एक नाम ‘अपर्णा’ भी पड़ा।

देवी की कठोर तपस्या से प्रसन्न होकर ब्रह्मा जी ने उन्हें आशीर्वाद दिया और उनकी मनोकामना पूरी होने का वर दिया। बाद में भगवान शिव ने उन्हें पत्नी के रूप में स्वीकार किया। मां ब्रह्मचारिणी की कथा धैर्य और दृढ़ संकल्प की सीख देती है। कठिन परिस्थितियों में भी अपने लक्ष्य से पीछे न हटना उनके स्वरूप का मुख्य संदेश है।

मां ब्रह्मचारिणी की पूजा विधि-

नवरात्रि के दूसरे दिन सुबह स्नान करके साफ कपड़े पहनें और पूजा स्थान को साफ करें। मां ब्रह्मचारिणी की तस्वीर या प्रतिमा को पूजा स्थान पर रखें। सबसे पहले गणेश जी और कलश का पूजन करें।

इसके बाद मां को फूल, अक्षत, कुमकुम, चंदन और धूप-दीप अर्पित करें। मां को सफेद और सुगंधित फूल चढ़ाना शुभ माना जाता है। कमल का फूल भी अर्पित किया जा सकता है।

मां का ध्यान करते हुए उनका मंत्र बोलें और अपनी मनोकामना के लिए प्रार्थना करें। इसके बाद भोग लगाएं, आरती करें और अंत में क्षमा प्रार्थना करें। पूजा के बाद प्रसाद परिवार के सदस्यों में बांटें।

मां ब्रह्मचारिणी का मंत्र-

पूजा के समय इस मंत्र का जाप किया जा सकता है- ॐ देवी ब्रह्मचारिण्यै नमः॥

मां के ध्यान के लिए यह श्लोक भी पढ़ा जाता है-

दधाना करपद्माभ्यामक्षमाला कमण्डलू। देवी प्रसीदतु मयि ब्रह्मचारिण्यनुत्तमा॥

इसके अलावा मां की स्तुति में यह मंत्र भी पढ़ा जाता है-

या देवी सर्वभूतेषु मां ब्रह्मचारिणी रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥

मां ब्रह्मचारिणी पूजा का शुभ मुहूर्त-

नवरात्रि के दूसरे दिन 12 अक्टूबर 2026, सोमवार को मां ब्रह्मचारिणी की पूजा होगी। पूजा के लिए सुबह का समय सबसे अच्छा रहता है। इस दिन ब्रह्म मुहूर्त सुबह 4:46 बजे से 5:35 बजे तक और अभिजित मुहूर्त सुबह 11:49 बजे से दोपहर 12:36 बजे तक रहेगा। शहर के स्थानीय पंचांग के अनुसार समय में कुछ मिनट का अंतर हो सकता है।

मां ब्रह्मचारिणी को क्या भोग लगाएं?

नवरात्रि के दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी को चीनी, मिश्री या पंचामृत का भोग लगाया जा सकता है। पूजा में सफेद रंग के फूल भी चढ़ाए जाते हैं। भोग लगाने के बाद प्रसाद सभी लोगों में बांटें। पूजा में सात्विक भोजन और साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखें।

मां ब्रह्मचारिणी की पूजा का महत्व-

मां ब्रह्मचारिणी का स्वरूप तपस्या और संयम से जुड़ा है। इसलिए उनकी पूजा में धैर्य, आत्मसंयम और मन की एकाग्रता का विशेष महत्व होता है। नवरात्रि के दूसरे दिन मां की आराधना करते समय भक्त अपने जीवन में दृढ़ता और सही रास्ते पर बने रहने की प्रार्थना करते हैं। मां की कथा यह सिखाती है कि कठिन लक्ष्य के लिए धैर्य और लगातार प्रयास जरूरी है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)

1-नवरात्रि के किस दिन मां ब्रह्मचारिणी की पूजा होती है?

नवरात्रि के दूसरे दिन यानी द्वितीया तिथि को मां ब्रह्मचारिणी की पूजा की जाती है।

2-मां ब्रह्मचारिणी के हाथों में क्या रहता है?

मां के दाहिने हाथ में जप की माला और बाएं हाथ में कमंडल रहता है।

3-मां ब्रह्मचारिणी का पूजा मंत्र क्या है?

पूजा के दौरान “ॐ देवी ब्रह्मचारिण्यै नमः॥” मंत्र का जाप किया जाता है।

4-मां ब्रह्मचारिणी को कौन सा भोग लगाएं?

मां को चीनी, मिश्री या पंचामृत का भोग लगाया जा सकता है।

5-मां ब्रह्मचारिणी की पूजा से क्या लाभ होता है?

मां की पूजा से तप, संयम, धैर्य और आत्मबल की भावना मजबूत होती है। उनकी कथा जीवन में दृढ़ संकल्प के साथ आगे बढ़ने की प्रेरणा देती है।

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