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शारदीय नवरात्रि 2026 : अखंड ज्योत क्यों जलाई जाती है? जानें सही नियम, दिशा और धार्मिक महत्व

नवरात्रि में अखंड ज्योत जलाने की परंपरा है। जानें इसे क्यों जलाते हैं, दीपक किस दिशा में रखें, घी या तेल का इस्तेमाल कैसे करें और ज्योत बुझ जाए तो क्या करें।

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Akhand Jyot Niyam 2026

शारदीय नवरात्रि में मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा के साथ कई घरों में अखंड ज्योत भी जलाई जाती है। घटस्थापना के समय दीपक जलाकर नवरात्रि की पूजा पूरी होने तक उसे लगातार जलाए रखने का संकल्प लिया जाता है।

अखंड ज्योत में दीपक की लौ लगातार जलती रहती है। इसे देवी आराधना, भक्ति और प्रकाश के भाव से जोड़ा जाता है। नवरात्रि के दौरान इसे जलाते समय दीपक की जगह, दिशा, बत्ती और घी या तेल का ध्यान रखना जरूरी होता है।

नवरात्रि में अखंड ज्योत क्यों जलाई जाती है?

अखंड ज्योत का अर्थ है ऐसी ज्योत जो बिना रुके जलती रहे। नवरात्रि में इसे घटस्थापना के साथ जलाने की परंपरा है। नौ दिनों तक लगातार जलती लौ भक्त के संकल्प और मां दुर्गा की आराधना का हिस्सा बनती है। दीपक का प्रकाश पूजा में अंधकार से प्रकाश की ओर बढ़ने का भाव रखता है।

अखंड ज्योत जलाकर भक्त मां दुर्गा के सामने अपनी श्रद्धा और भक्ति प्रकट करते हैं। नवरात्रि 2026 में अखंड ज्योत 11 अक्टूबर को घटस्थापना के समय जलाई जा सकती है। घटस्थापना का शुभ समय सुबह 6:19 बजे से 10:12 बजे तक रहेगा।

अखंड ज्योत जलाने की सही विधि-

अखंड ज्योत जलाने से पहले पूजा स्थान को साफ करें। मां दुर्गा की प्रतिमा या तस्वीर के सामने चौकी पर पूजा की व्यवस्था करें। दीपक को स्थिर और सुरक्षित स्थान पर रखें। दीपक को सीधे जमीन पर रखने के बजाय उसके नीचे चावल, जौ या गेहूं की छोटी ढेरी रख सकते हैं। इसके ऊपर दीपक रखें। इससे दीपक स्थिर भी रहता है और पूजा की पारंपरिक व्यवस्था भी बनी रहती है।

दीपक में घी या तेल डालकर साफ सूती बत्ती रखें। इसके बाद मां दुर्गा का ध्यान करते हुए दीप प्रज्वलित करें और पूजा शुरू करें।

दीप जलाते समय यह मंत्र पढ़ सकते हैं-

शुभं करोति कल्याणमारोग्यं धनसंपदाम्। शत्रुबुद्धिविनाशाय दीपज्योतिर्नमोऽस्तुते॥

अखंड ज्योत किस दिशा में रखें?

अखंड ज्योत के लिए दक्षिण-पूर्व दिशा यानी आग्नेय कोण को प्रमुख स्थान माना जाता है। पूजा स्थान में यह जगह उपलब्ध हो तो दीपक वहां रखा जा सकता है। दीपक की लौ का मुख पूर्व या उत्तर दिशा की ओर रखना भी प्रचलित है। दीपक को ऐसी जगह रखें जहां हवा का तेज झोंका सीधे लौ पर न आए। पंखे, एसी, पर्दे और दूसरे ज्वलनशील सामान से दीपक को दूर रखना जरूरी है।

अखंड ज्योत घी की जलाएं या तेल की?

अखंड ज्योत के लिए देसी घी का इस्तेमाल किया जाता है। घी उपलब्ध न होने पर तिल के तेल का दीपक भी जलाया जा सकता है। अलग-अलग पूजा परंपराओं में दोनों का इस्तेमाल मिलता है। घी की ज्योत रखने में मां की प्रतिमा के दाहिनी ओर दीपक रखने की परंपरा है, जबकि तेल का दीपक बाईं ओर रखने की बात कही जाती है। एक ही दीपक में घी और तेल को मिलाकर नहीं जलाना चाहिए।

अखंड ज्योत को लगातार जलाए रखने के लिए क्या करें?

नौ दिनों तक दीपक जलाना है तो उसकी नियमित देखभाल जरूरी है। दीपक में घी या तेल खत्म न होने दें और बत्ती की स्थिति भी देखते रहें। दीपक को हवा के सीधे संपर्क में न रखें। पूजा स्थान के आसपास कपड़े, कागज, पर्दे या दूसरी ज्वलनशील वस्तुएं न हों। घर में बच्चे या पालतू जानवर हों तो दीपक को उनकी पहुंच से दूर रखें।

अगर घर से सभी लोग कुछ समय के लिए बाहर जा रहे हैं तो जलती हुई ज्योत को अकेला छोड़ने के बजाय किसी जिम्मेदार व्यक्ति को उसकी देखभाल की जिम्मेदारी दें। यह पूजा के साथ-साथ आग की सुरक्षा के लिए भी जरूरी है।

अखंड ज्योत बुझ जाए तो क्या करें?

अखंड ज्योत कभी हवा, कम घी-तेल या बत्ती की समस्या के कारण बुझ सकती है। ऐसी स्थिति में घबराने की जरूरत नहीं है। दीपक को साफ करके नई बत्ती लगाएं और घी या तेल डालकर दोबारा ज्योत जला दें। इसके बाद मां दुर्गा का ध्यान करके पूजा आगे जारी रखें। धार्मिक परंपराओं में ऐसी स्थिति को लेकर अलग-अलग नियम मिलते हैं, इसलिए इसे लेकर मन में डर रखने की जरूरत नहीं है।

नवरात्रि में अखंड ज्योत का धार्मिक महत्व

नवरात्रि की पूजा में दीपक का अपना विशेष स्थान है। ज्योत का प्रकाश पूजा स्थल को रोशन करता है और भक्त के लिए मां दुर्गा की आराधना के दौरान भक्ति और साधना का केंद्र बनता है। अखंड ज्योत को लगातार जलाए रखना नौ दिनों की पूजा और संकल्प से जुड़ा होता है। इसकी लौ नवरात्रि के दौरान लगातार भक्ति बनाए रखने के भाव को दर्शाती है।

अखंड ज्योत जलाते समय इन बातों का रखें ध्यान-

दीपक को सीधे जमीन पर न रखें। दीपक के नीचे चावल, जौ या गेहूं रख सकते हैं। दीपक को स्थिर और सुरक्षित जगह पर रखें। दक्षिण-पूर्व दिशा को अखंड ज्योत के लिए उपयुक्त माना जाता है।

लौ का मुख पूर्व या उत्तर की ओर रखा जा सकता है।घी और तेल को एक ही दीपक में न मिलाएं। दीपक को पर्दे, कागज और कपड़ों से दूर रखें। पंखे या एसी की सीधी हवा से ज्योत को बचाएं। घी या तेल खत्म होने से पहले उसकी मात्रा जांचते रहें।

बच्चों और पालतू जानवरों की पहुंच से दीपक दूर रखें। नवरात्रि समाप्त होने के बाद ज्योत को सुरक्षित तरीके से शांत होने दें।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)

1-नवरात्रि में अखंड ज्योत क्यों जलाई जाती है?

नवरात्रि में अखंड ज्योत मां दुर्गा की आराधना, भक्ति और नौ दिनों के संकल्प के साथ जलाई जाती है।

2-अखंड ज्योत किस दिशा में रखनी चाहिए?

अखंड ज्योत के लिए दक्षिण-पूर्व दिशा यानी आग्नेय कोण को प्रमुख माना जाता है। दीपक की लौ पूर्व या उत्तर दिशा की ओर रखी जा सकती है।

3-अखंड ज्योत घी की जलाएं या तेल की?

अखंड ज्योत घी या तिल के तेल से जलाई जा सकती है। घर की पूजा परंपरा के अनुसार इनमें से किसी एक का इस्तेमाल करें।

4-अगर अखंड ज्योत बुझ जाए तो क्या करें?

बुझने पर घबराएं नहीं। दीपक को व्यवस्थित करके नई बत्ती और घी या तेल डालें और दोबारा ज्योत जला दें।

5-क्या अखंड ज्योत को सीधे जमीन पर रख सकते हैं?

अखंड ज्योत को सीधे जमीन पर रखने के बजाय चावल, जौ या गेहूं की ढेरी अथवा किसी सुरक्षित आधार पर रखना बेहतर है।

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