पांच दिनी दिवाली उत्सव में धनतेरस के बाद नरक चतुर्दशी का पर्व मनाया जाता है। इस दिन हनुमान, श्रीकृष्ण, यमदेव और कालिका माता की पूजा होती है। इस दिन को छोटी दिवाली भी कहते हैं।
नरक चतुर्दशी 2026 कब है?
इस साल नरक चतुर्दशी 8 नवंबर 2026, रविवार को मनाई जायेगी।
हिन्दू पंचांग के अनुसार:
- चतुर्दशी तिथि प्रारंभ: 7 नवंबर 2026, सुबह 10:47 बजे
- चतुर्दशी तिथि समाप्त: 8 नवंबर 2026, सुबह 11:27 बजे
नरक चतुर्दशी: 8 नवंबर 2026, रविवार
- सूर्योदय: सुबह 6:29 बजे
- सूर्यास्त: शाम 5:22 बजे
- चंद्रमा उदय: नहीं
- चंद्रास्त: शाम 4:26 बजे
इसलिए 7 नवंबर को चतुर्दशी तिथि शुरू होने के बावजूद नरक चतुर्दशी का मुख्य पर्व 8 नवंबर को माना जाएगा। पंचांगों में भी 8 नवंबर को नरक चतुर्दशी दर्ज है।
नरक चतुर्दशी 2026 अभ्यंग स्नान मुहूर्त-
नरक चतुर्दशी पर सूर्योदय से पहले अभ्यंग स्नान का विशेष महत्व है। इस दिन तेल और उबटन लगाकर स्नान करने की परंपरा है।
अभ्यंग स्नान मुहूर्त:
- 8 नवंबर 2026, रविवार
- समय: सुबह 5:32 बजे से 6:29 बजे तक
- अवधि: 57 मिनट
- सूर्योदय: सुबह 6:29 बजे
यानी अभ्यंग स्नान सूर्योदय से पहले पूरा करना है। यही नरक चतुर्दशी के इस विशेष स्नान का मुख्य समय है।
नरक चतुर्दशी पर पूजा और दीपदान कब करें?
नरक चतुर्दशी से जुड़ी पूजा पर 7 और 8 नवंबर को लेकर भ्रम इसलिए है क्योंकि चतुर्दशी तिथि 7 नवंबर की सुबह शुरू हो जाती है और रात में भी रहती है।
7 नवंबर की शाम और रात चतुर्दशी तिथि रहेगी, इसलिए चतुर्दशी से जुड़े यम दीपदान, हनुमान पूजा और काली चौदस के पूजन का समय 7 नवंबर की शाम माना जाता है। वहीं 8 नवंबर की सुबह उदयातिथि में अभ्यंग स्नान किया जाएगा।
नरक चतुर्दशी पर भगवान श्रीकृष्ण, यमराज, हनुमान जी और देवी काली की पूजा की परंपरा अलग-अलग क्षेत्रों में प्रचलित है। इसे छोटी दिवाली, रूप चौदस और काली चौदस के नाम से भी जाना जाता है।
नरक चतुर्दशी 2026 के प्रमुख शुभ समय
- ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 4:44 से 5:37 बजे तक
- प्रातः संध्या: सुबह 5:11 से 6:29 बजे तक
- अभिजीत मुहूर्त: सुबह 11:34 से दोपहर 12:17 बजे तक
- विजय मुहूर्त: दोपहर 1:44 से 2:28 बजे तक
- गोधूलि मुहूर्त: शाम 5:22 से 5:48 बजे तक
- सायाह्न संध्या: शाम 5:22 से 6:41 बजे तक
- अमृत काल: रात 10:02 से 11:44 बजे तक
- निशिता मुहूर्त: रात 11:30 से 12:22 बजे तक
एक नजर में नरक चतुर्दशी 2026
- नरक चतुर्दशी: 8 नवंबर 2026, रविवार
- चतुर्दशी तिथि: 7 नवंबर सुबह 10:47 से 8 नवंबर सुबह 11:27 बजे तक
- अभ्यंग स्नान: सुबह 5:32 से 6:29 बजे तक
- अभिजीत मुहूर्त: 11:34 AM–12:17 PM
- विजय मुहूर्त: 1:44 PM–2:28 PM
- गोधूलि मुहूर्त: 5:22 PM–5:48 PM
नरक चतुर्दशी पर क्या करें?
नरक चतुर्दशी की सुबह सूर्योदय से पहले तेल और उबटन लगाकर अभ्यंग स्नान करें। स्नान के बाद स्वच्छ वस्त्र पहनकर सूर्यदेव को अर्घ्य दें। शाम को यम दीपदान करें और अपनी परंपरा के अनुसार भगवान श्रीकृष्ण, हनुमान जी या देवी काली का पूजन करें।
7 नवंबर की रात चतुर्दशी तिथि होने के कारण यम दीपदान और काली चौदस से जुड़े पूजन का समय उसी शाम रखा जाता है, जबकि 8 नवंबर की सुबह रूप चौदस का अभ्यंग स्नान किया जाता है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
नरक चतुर्दशी 2026 कब है?
नरक चतुर्दशी 8 नवंबर 2026, रविवार को है।
नरक चतुर्दशी पर अभ्यंग स्नान कब करें?
8 नवंबर को सुबह 5:32 बजे से 6:29 बजे तक अभ्यंग स्नान का मुहूर्त है।
क्या नरक चतुर्दशी 7 नवंबर को है या 8 नवंबर को?
उदयातिथि के अनुसार नरक चतुर्दशी 8 नवंबर को है। 7 नवंबर की सुबह चतुर्दशी तिथि शुरू होती है और रात में चतुर्दशी रहने के कारण यम दीपदान व काली चौदस से जुड़े पूजन 7 नवंबर की शाम किए जाते हैं।
नरक चतुर्दशी पर अभ्यंग स्नान सूर्योदय से पहले क्यों किया जाता है?
नरक चतुर्दशी पर चतुर्दशी तिथि के दौरान सूर्योदय से पहले अभ्यंग स्नान करने की परंपरा है। इसलिए स्नान का समय सूर्योदय से पहले रखा जाता है।
नरक चतुर्दशी को और किन नामों से जाना जाता है?
नरक चतुर्दशी को छोटी दिवाली, रूप चौदस, रूप चतुर्दशी और काली चौदस के नाम से भी जाना जाता है।









