धनतेरस यानी धन त्रयोदशी को केवल खरीदारी का दिन मानना उचित नहीं है। यह पर्व अच्छे स्वास्थ्य, आरोग्य, सुख-सौभाग्य और समृद्धि की कामना से भी जुड़ा है।
भगवान धन्वंतरि की पूजा इस दिन विशेष रूप से आरोग्य के लिए की जाती है। साथ ही झाड़ू खरीदने, कुबेर पूजन और घर के द्वार पर यमदीपदान की भी परंपरा है।
धनतेरस पर भगवान धन्वंतरि की पूजा क्यों करें?
धनतेरस पर भगवान धन्वंतरि की पूजा उत्तम स्वास्थ्य और आरोग्य की कामना से की जाती है। इस दिन भगवान धन्वंतरि को औषधियों और स्वास्थ्य से जुड़ी वस्तुओं के साथ श्रद्धापूर्वक पूजा जाता है।
पूजन में ब्राह्मी, शंखपुष्पी, तुलसी, शतावरी, अश्वगंधा, सहदेई और अपामार्ग जैसे पूजनीय पौधों एवं औषधियों को शामिल किया जा सकता है। पूजा में सप्तधान्य का भी प्रयोग किया जाता है।
इसमें गेहूं, चना, जौ, उड़द, चावल, मूंग और कांगनी शामिल हैं। प्रसाद के लिए सफेद मिठाई अर्पित की जा सकती है।
धनतेरस का संदेश यही है कि जीवन में धन के साथ अच्छा स्वास्थ्य भी जरूरी है। इसलिए इस पर्व को केवल बाजार की खरीदारी तक सीमित न रखते हुए आरोग्य और परिवार के सुख की कामना से जोड़ना चाहिए।
भगवान धन्वंतरि की पूजा कैसे करें?
सबसे पहले भगवान धन्वंतरि का चित्र या प्रतिमा स्थापित करें। इसके बाद आचमन करके पूजा का संकल्प लें। शुद्ध घी का दीपक जलाएं और पूजा की सामग्री भगवान को अर्पित करें।
आचमन के समय इन मंत्रों का उच्चारण किया जा सकता है-
आत्म-तत्त्वं शोधयामि स्वाहा। विद्या-तत्त्वं शोधयामि स्वाहा। शिव-तत्त्वं शोधयामि स्वाहा।
इसके बाद भगवान धन्वंतरि का ध्यान करें-
चतुर्भुजं पीत वस्त्रं सर्वालङ्कार-शोभितम्। ध्याये धन्वन्तरिं देवं सुरासुर-नमस्कृतम्।।
युवानं पुण्डरीकाक्षं सर्वाभरण-भूषितम्। दधानममृतस्यैव कमण्डलुं श्रिया-युतम्।।
यज्ञ-भोग-भुजं देवं सुरासुर-नमस्कृतम्। ध्याये धन्वन्तरिं देवं श्वेताम्बरधरं शुभम्।।
इसके बाद भगवान धन्वंतरि को पुष्प, धूप, गंध और नैवेद्य अर्पित करें। पूजा पूरी होने पर क्षमा-प्रार्थना करें और अपने तथा परिवार के अच्छे स्वास्थ्य, आरोग्य और सुख की प्रार्थना करें।
संस्कृत मंत्रों का सही उच्चारण न कर पाएं तो अपनी भाषा में भी भगवान से प्रार्थना कर सकते हैं। पूजा में श्रद्धा और भाव को महत्व दिया जाता है।
धनतेरस पर झाड़ू, कुबेर पूजा और उत्तर दिशा का महत्व-
धनतेरस पर झाड़ू खरीदने की भी परंपरा है। झाड़ू को घर की स्वच्छता से जोड़ा जाता है और इस दिन इसकी खरीद को शुभ माना जाता है। धनतेरस पर कुबेर पूजा का भी विशेष महत्व है। कुबेर को धन और समृद्धि से जोड़ा जाता है। पूजा में उत्तर दिशा का भी विशेष महत्व माना गया है।
इस पर्व पर घर की स्वच्छता और धन-संपत्ति के प्रति सम्मान का भाव रखना चाहिए। धनतेरस का उद्देश्य केवल अधिक से अधिक सामान खरीदना नहीं, बल्कि घर में सुख, स्वास्थ्य और समृद्धि की कामना करना भी है।
धनतेरस पर घर के द्वार पर यमदीपदान-
धनतेरस की एक महत्वपूर्ण परंपरा यमदीपदान है। इस दिन घर के मुख्य द्वार पर दीपक जलाकर यमराज के नाम से दीपदान किया जाता है। यमदीपदान धनतेरस की धार्मिक परंपराओं में शामिल है।
इसे परिवार की मंगलकामना और अकाल मृत्यु से रक्षा की प्रार्थना के भाव से किया जाता है। इसलिए धनतेरस पर भगवान धन्वंतरि की पूजा के साथ घर के द्वार पर यमदीपदान की परंपरा को भी निभाया जाता है।
भगवान धन्वंतरि से जुड़ी कथा और धनतेरस का संदेश-
धन्वंतरि भगवान को आरोग्य और चिकित्सा से जोड़ा जाता है। गरुड़ पुराण में रोगों का नाश करने वाले भगवान धन्वंतरि से जुड़ी कथा का उल्लेख मिलता है। इसमें भगवान विष्णु स्वयं को धन्वंतरि अवतार बताते हैं।
धनतेरस का वास्तविक भाव केवल धन-संपत्ति जुटाने तक सीमित नहीं है। अच्छा स्वास्थ्य भी जीवन की सबसे बड़ी संपत्तियों में शामिल है। इसलिए इस दिन भगवान धन्वंतरि का स्मरण करते हुए अपने और परिवार के आरोग्य की प्रार्थना करनी चाहिए।
पर्व के नाम पर अनावश्यक खरीदारी और दिखावे से बचते हुए जरूरत और सामर्थ्य के अनुसार ही वस्तुएं खरीदना बेहतर है। धनतेरस का पर्व सुख, सौभाग्य, स्वास्थ्य और समृद्धि के संतुलन का संदेश देता है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
धनतेरस पर भगवान धन्वंतरि की पूजा क्यों की जाती है?
धनतेरस पर भगवान धन्वंतरि की पूजा अच्छे स्वास्थ्य, आरोग्य और परिवार के सुख की कामना से की जाती है।
धनतेरस की पूजा में किन औषधीय पौधों को शामिल किया जा सकता है?
ब्राह्मी, शंखपुष्पी, तुलसी, शतावरी, अश्वगंधा, सहदेई और अपामार्ग जैसे पूजनीय पौधों एवं औषधियों को पूजा में शामिल किया जा सकता है।
धनतेरस पर कौन से सप्तधान्य पूजन में रखे जाते हैं?
गेहूं, चना, जौ, उड़द, चावल, मूंग और कांगनी को सप्तधान्य के रूप में पूजा में रखा जाता है।
धनतेरस पर झाड़ू क्यों खरीदी जाती है?
धनतेरस पर झाड़ू खरीदने की परंपरा घर की स्वच्छता और सुख-समृद्धि से जुड़ी हुई है।
धनतेरस पर यमदीपदान कहां किया जाता है?
धनतेरस पर घर के मुख्य द्वार पर यमराज के नाम से दीपक जलाकर यमदीपदान किया जाता है।









