धनतेरस यानी धन त्रयोदशी को धन-संपदा के साथ सुख-समृद्धि और परिवार की मंगलकामना से जुड़े कई उपाय किए जाते हैं। इस दिन कुबेर पूजा और यम दीपदान की विशेष परंपरा है। धनतेरस पर नई धातु खरीदना, झाड़ू लेना और शाम के समय घर के बाहर दीपदान करना भी शुभ माना जाता है।
आइए जानते हैं धनतेरस पर कुबेर पूजा कैसे करें, क्या खरीदना शुभ माना जाता है और यम दीपदान किस तरह किया जाता है।
धनतेरस पर कुबेर पूजा कैसे करें?
कुबेर को धन-संपदा का स्वामी और उत्तर दिशा का प्रतिनिधि माना जाता है। इसलिए धनतेरस के दिन कुबेर पूजा का विशेष महत्व है। धनतेरस की शाम या रात्रि में कुबेर यंत्र स्थापित करके पूजा की जा सकती है। पूजा के दौरान कुबेर देव का ध्यान करते हुए दीपक जलाएं और धन-धान्य तथा समृद्धि की कामना करें।
कुबेर पूजा में इस मंत्र का जाप किया जा सकता है-
यक्षाय कुबेराय वैश्रवणाय- धन-धान्य अधिपतये। धन-धान्य समृद्धिं मे देहि दापय स्वाहा।।
धनतेरस पर कुबेर के लिए 13 दीपक धन-धान्य और समृद्धि की कामना से समर्पित करने की परंपरा भी है। कुबेर पूजा के समय धूप नहीं जलाने की परंपरा बताई गई है, इसलिए इस पूजा में धूप का प्रयोग न करें।
धनतेरस पर कौन सी धातु खरीदें?
धनतेरस के दिन नई वस्तु खरीदने की परंपरा है। लोक मान्यता के अनुसार इस दिन की गई खरीदारी धन-धान्य में वृद्धि का प्रतीक मानी जाती है। अपनी क्षमता के अनुसार सोना, चांदी या किसी अन्य धातु की वस्तु खरीदकर उसे पूजा में रखा जा सकता है।
धनतेरस पर खरीदारी करते समय जरूरत और बजट का ध्यान रखना भी जरूरी है। पर्व का उद्देश्य केवल अधिक सामान खरीदना नहीं, बल्कि घर में समृद्धि और शुभता का भाव बनाए रखना है।
परंपरागत मान्यताओं में स्टील को राहु और लोहे को शनि से जोड़ा जाता है, इसलिए धनतेरस की खरीदारी में इन धातुओं को लेने से बचने की सलाह दी जाती है।
धनतेरस पर झाड़ू क्यों खरीदते हैं?
धनतेरस पर झाड़ू खरीदने और उसकी पूजा करने की भी परंपरा है। झाड़ू को घर की साफ-सफाई के साथ-साथ दरिद्रता को बाहर करने के प्रतीक के रूप में देखा जाता है।
इस दिन नई झाड़ू घर में लाकर उसकी पूजा की जाती है। इसका भाव यह है कि घर साफ-सुथरा रहे और नकारात्मकता तथा अभाव दूर हों। धनतेरस पर झाड़ू खरीदते समय भी इसे सामान्य सामान की तरह रखने के बजाय साफ स्थान पर रखना और सम्मानपूर्वक उपयोग करना शुभ माना जाता है।
धनतेरस पर यम दीपदान कैसे करें?
धनतेरस की शाम यम दीपदान की परंपरा निभाई जाती है। इसे भगवान यमराज की प्रसन्नता और परिवार की मंगलकामना से जोड़ा जाता है।
यम दीपदान के समय इस मंत्र का जाप किया जा सकता है-
मृत्युना पाशदण्डाभ्याम् -कालेन श्यामया सह। त्रयोदश्यां दीपदानात्- सूर्यजः प्रीयतां मम।।
इसका भाव है कि धन त्रयोदशी के दीपदान से पाश और दंड धारण करने वाले भगवान यम, काल के अधिष्ठाता और देवी श्यामला सहित प्रसन्न हों।
यम दीपदान के लिए गाय के गोबर, आटे या मिट्टी से बना दीपक लिया जा सकता है। इसमें चौमुखा दीपक लगाकर घर के मुख्य द्वार के बाहर दीपदान करने की परंपरा है। दीपक को गेहूं, धान या चावल जैसे अनाज के ढेर पर रखा जाता है। इसके बाद दीपक जलाकर भगवान धर्मराज से परिवार की मंगलकामना की जाती है।
धनतेरस पर कौन से काम जरूर करें?
धनतेरस के दिन धन-संपदा के साथ स्वास्थ्य, स्वच्छता और परिवार की सुख-समृद्धि का भाव रखना चाहिए।
इस दिन-
- कुबेर पूजा करें।
- उत्तर दिशा की ओर विशेष ध्यान देते हुए पूजा स्थान को स्वच्छ रखें।
- सामर्थ्य के अनुसार सोना, चांदी या अन्य शुभ धातु की वस्तु खरीदें।
- नई झाड़ू खरीदकर उसका सम्मानपूर्वक उपयोग शुरू करें।
- शाम को घर के मुख्य द्वार पर यम दीपदान करें।
- परिवार की सुख-समृद्धि और आरोग्य के लिए प्रार्थना करें।
- खरीदारी में दिखावे के बजाय जरूरत और सामर्थ्य को प्राथमिकता दें।
धनतेरस का पर्व केवल बाजार से नई वस्तुएं खरीदने तक सीमित नहीं है। कुबेर पूजा, स्वच्छता, दीपदान और परिवार के मंगल की कामना इसके धार्मिक पक्ष को पूरा करती है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
धनतेरस पर कुबेर पूजा किस दिशा में की जाती है?
कुबेर को उत्तर दिशा का प्रतिनिधि माना जाता है, इसलिए धनतेरस पर कुबेर पूजा में उत्तर दिशा का विशेष महत्व रखा जाता है।
धनतेरस पर कुबेर पूजा में कितने दीपक जलाए जाते हैं?
धनतेरस पर कुबेर के लिए 13 दीपक धन-धान्य और समृद्धि की कामना से समर्पित करने की परंपरा है।
धनतेरस पर झाड़ू खरीदने का क्या महत्व है?
झाड़ू को घर की स्वच्छता और दरिद्रता को बाहर करने के प्रतीक के रूप में देखा जाता है। इसलिए धनतेरस पर नई झाड़ू खरीदने की परंपरा है।
धनतेरस पर यम दीपदान कहां किया जाता है?
यम दीपदान शाम के समय घर के मुख्य द्वार के बाहर किया जाता है। दीपक को अनाज के ढेर पर रखने की परंपरा भी है।
धनतेरस पर कौन सी धातु खरीदना शुभ माना जाता है?
सामर्थ्य के अनुसार सोना, चांदी या अन्य धातु की वस्तु खरीदकर पूजा में रखने की परंपरा है। खरीदारी हमेशा जरूरत और बजट के अनुसार करनी चाहिए।









