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नरक चतुर्दशी 2026 में कब है? अभ्यंग स्नान, दीपदान और पूजा विधि क्या है?

नरक चतुर्दशी 2026 में कब है? जानें अभ्यंग स्नान का शुभ समय, दीपदान की विधि, पूजा सामग्री, यम दीपक और रूप चौदस से जुड़ी धार्मिक मान्यताएं।

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Narak Chaturdashi 2026 Date

नरक चतुर्दशी 2026 में 8 नवंबर, रविवार को मनाई जाएगी। इस दिन सूर्योदय से पहले अभ्यंग स्नान और शाम को यम दीपक जलाने की परंपरा है। नरक चतुर्दशी को छोटी दिवाली, रूप चौदस और रूप चतुर्दशी के नाम से भी जाना जाता है।

नरक चतुर्दशी 2026 कब है? जानें अभ्यंग स्नान का समय-

नरक चतुर्दशी 8 नवंबर 2026, रविवार को है। कार्तिक कृष्ण चतुर्दशी तिथि 7 नवंबर को सुबह 10:47 बजे शुरू होगी और 8 नवंबर को सुबह 11:27 बजे समाप्त होगी। नरक चतुर्दशी पर अभ्यंग स्नान सूर्योदय से पहले करना शुभ माना जाता है। इसके लिए सुबह 5:21 बजे से 6:19 बजे तक का समय रहेगा।

इस दौरान चंद्रमा के रहते और सूर्योदय से पहले स्नान करने की परंपरा है। अभ्यंग स्नान में शरीर पर तिल का तेल लगाकर उबटन किया जाता है। इसके बाद स्नान करके स्वच्छ वस्त्र पहनें और भगवान का पूजन करें।

अभ्यंग स्नान कैसे करें? जानें सही विधि-

नरक चतुर्दशी के दिन सुबह जल्दी उठकर सबसे पहले शरीर पर तिल का तेल लगाएं। इसके बाद उबटन लगाकर स्नान करें। धार्मिक परंपरा में अपामार्ग का भी विशेष महत्व बताया गया है। स्नान के समय इसे सिर के ऊपर से घुमाने की परंपरा है।

स्नान के बाद स्वच्छ कपड़े पहनकर भगवान विष्णु और श्रीकृष्ण का स्मरण करें। इसके बाद अपने घर के पूजा स्थान में दीपक जलाएं। अभ्यंग स्नान का उद्देश्य शरीर की शुद्धि के साथ धार्मिक रूप से नरक के भय से मुक्ति और पापों के नाश की कामना करना है।

नरक चतुर्दशी पर दीपदान क्यों किया जाता है?

नरक चतुर्दशी की शाम यमराज के लिए दीपदान करने की परंपरा है। घर के बाहर यम दीपक जलाकर अकाल मृत्यु से रक्षा और परिवार की सुख-शांति की प्रार्थना की जाती है। पूजा विधि में चार बत्तियों वाला दीपक जलाने की परंपरा भी मिलती है।

इसके बाद घर के अलग-अलग स्थानों जैसे रसोई और स्नानघर में दीपक जलाए जाते हैं। कई परिवारों में घर का बड़ा सदस्य दीपक लेकर पूरे घर में जाता है और उसे घर से बाहर रख आता है। इसे यम दीपक की परंपरा से जोड़ा जाता है।

नरक चतुर्दशी की पूजा विधि और सामग्री-

पूजा के लिए तिल का तेल, दीपक, रूई की बत्ती, रोली, अक्षत, फूल, धूप, कपूर, मिठाई और जल रख सकते हैं। अभ्यंग स्नान के लिए तिल का तेल और उबटन की व्यवस्था करें। शाम को सबसे पहले घर के बाहर यम दीपक जलाएं। इसके बाद पूजा स्थान पर दीपक जलाकर भगवान का स्मरण करें।

रोली और अक्षत अर्पित करें, फूल चढ़ाएं और मिठाई का भोग लगाएं। यमराज के नामों का स्मरण करके जल अर्पित करने की परंपरा भी है। इसके बाद घर में दीपक जलाएं और परिवार की सुख-शांति के लिए प्रार्थना करें।

नरक चतुर्दशी को छोटी दिवाली और रूप चौदस क्यों कहते हैं?

नरक चतुर्दशी को छोटी दिवाली, रूप चौदस और रूप चतुर्दशी भी कहा जाता है। यह दीपावली से ठीक पहले आने वाला पर्व है। धार्मिक परंपरा में इस दिन सूर्योदय से पहले स्नान, शरीर पर तेल लगाने और दीपदान को विशेष महत्व दिया जाता है। अभ्यंग स्नान को स्वास्थ्य, सौंदर्य और शुद्धि से भी जोड़ा जाता है।

नरक चतुर्दशी को कई स्थानों पर काली चौदस भी कहा जाता है, हालांकि दोनों की धार्मिक परंपराएं अलग हो सकती हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)

1-नरक चतुर्दशी 2026 में कब है?

नरक चतुर्दशी 8 नवंबर 2026, रविवार को मनाई जाएगी।

2-नरक चतुर्दशी 2026 में अभ्यंग स्नान का समय क्या है?

अभ्यंग स्नान का समय सुबह 5:21 बजे से 6:19 बजे तक रहेगा।

3-अभ्यंग स्नान में कौन सा तेल लगाना चाहिए?

अभ्यंग स्नान में तिल का तेल लगाने की परंपरा है।

4-नरक चतुर्दशी पर यम दीपक कब जलाना चाहिए?

यम दीपक नरक चतुर्दशी की शाम घर के बाहर जलाया जाता है।

5-नरक चतुर्दशी को और किन नामों से जाना जाता है?

नरक चतुर्दशी को छोटी दिवाली, रूप चौदस और रूप चतुर्दशी के नाम से भी जाना जाता है।

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