करवा चौथ का व्रत सुबह सरगी से शुरू होकर रात में चंद्रमा को अर्घ्य देने के बाद पूरा होता है। इस दिन महिलाएं भगवान शिव, माता पार्वती, गणेश जी और करवा माता की पूजा करती हैं। आइए जानते हैं सरगी खाने से लेकर चंद्रमा को अर्घ्य देने और व्रत खोलने तक की पूरी विधि।
करवा चौथ 2026 कब है और पूजा का समय क्या है?
करवा चौथ का व्रत 29 अक्टूबर 2026, गुरुवार को रखा जाएगा। इस दिन कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि रात 10:09 बजे तक रहेगी। हिन्दू पंचांग के अनुसार पूजा का समय अलग-अलग स्थानों पर कुछ मिनट बदलता है।
करवा चौथ की शाम पूजा के बाद चंद्रमा के दर्शन किए जाते हैं। इसके बाद चंद्रमा को अर्घ्य देकर व्रत खोलने की परंपरा है। चंद्रमा निकलने का समय भी स्थान के अनुसार अलग हो सकता है।
करवा चौथ की सरगी कैसे खाएं?
करवा चौथ के दिन सूर्योदय से पहले सरगी खाने की परंपरा है। कई परिवारों में सास अपनी बहू को सरगी देती हैं। इसमें फल, मिठाई, दूध, मेवे और दूसरी खाद्य सामग्री रखी जाती है। सरगी को व्रत शुरू होने से पहले शांत मन से ग्रहण करें। इसमें ऐसी चीजें लेना बेहतर रहता है जिनसे लंबे समय तक ऊर्जा बनी रहे।
फल, दूध, दही, मेवे, मिठाई और पौष्टिक भोजन सरगी का हिस्सा हो सकते हैं। परिवार और क्षेत्र की परंपरा के अनुसार सरगी की सामग्री अलग हो सकती है। सरगी के बाद व्रत का संकल्प लेकर दिनभर व्रत रखा जाता है। पारंपरिक करवा चौथ व्रत में सूर्योदय के बाद चंद्रमा के दर्शन और अर्घ्य तक अन्न-जल ग्रहण नहीं किया जाता।
शाम को करवा चौथ की पूजा कैसे करें?
शाम को स्नान करके साफ कपड़े पहनें और पूजा की जगह को साफ करें। पूजा की थाली में करवा, दीपक, रोली, अक्षत, फूल, धूप, मिठाई और फल रखें।
इसके बाद भगवान शिव, माता पार्वती, भगवान गणेश और करवा माता की पूजा करें। दीपक जलाकर रोली-अक्षत अर्पित करें और फूल चढ़ाएं। करवा चौथ की कथा पढ़ें या सुनें।
कई जगह महिलाएं समूह में बैठकर कथा सुनती हैं और करवा की पूजा करती हैं। वे करवा में 13 बिंदियां लगाकर गेहूं या चावल के 13 दाने रखने की परंपरा भी निभाती हैं। इसके बाद सास या परिवार की बड़ी महिला से आशीर्वाद लिया जाता है। पूजा पूरी होने के बाद चंद्रमा के निकलने की प्रतीक्षा की जाती है।
चंद्रमा को अर्घ्य कैसे दें?
करवा चौथ की पूजा में चंद्रमा को अर्घ्य देना सबसे महत्वपूर्ण चरणों में से एक है। चंद्रोदय होने पर सबसे पहले चंद्रमा के दर्शन करें। अर्घ्य देने के लिए करवा या लोटे में साफ जल लें। इसमें अक्षत और परंपरा के अनुसार चांदी का सिक्का रखा जा सकता है। चंद्रमा को देखकर श्रद्धापूर्वक जल अर्पित करें।
इसके बाद कई परिवारों में छलनी से पहले चंद्रमा और फिर पति का चेहरा देखने की परंपरा है। पति की ओर से पत्नी को पानी पिलाया जाता है और मिठाई खिलाकर व्रत खुलवाया जाता है।
अर्घ्य देते समय चंद्र मंत्र का जाप भी किया जा सकता है। उदाहरण के लिए : ॐ श्रां श्रीं श्रौं सः चन्द्रमसे नमः।
इसके बाद पति का आशीर्वाद लेकर व्रत का पारण किया जाता है।
सरगी से अर्घ्य तक करवा चौथ की पूरी प्रक्रिया
करवा चौथ की पूरी पूजा-विधि को आसान तरीके से ऐसे समझ सकते हैं—
- सुबह सूर्योदय से पहले : स्नान करके सरगी ग्रहण करें और व्रत का संकल्प लें।
- दिनभर : व्रत रखते हुए भगवान शिव और माता पार्वती का ध्यान करें।
- शाम : पूजा की तैयारी करें और शिव-पार्वती, गणेश जी व करवा माता की पूजा करें।
- पूजा के दौरान : करवा चौथ की कथा सुनें या पढ़ें और पूजा की परंपरा के अनुसार करवा की रस्म पूरी करें।
- चंद्रोदय के बाद : चंद्रमा के दर्शन करें, छलनी से चंद्रमा देखें और जल से अर्घ्य दें।
- इसके बाद : पति का चेहरा छलनी से देखने की परंपरा निभाएं, पति के हाथ से पानी और मिठाई लेकर व्रत खोलें।
इस तरह सरगी से शुरू हुआ करवा चौथ का व्रत चंद्रमा को अर्घ्य देने के बाद पूरा होता है। अलग-अलग परिवारों और क्षेत्रों में पूजा की कुछ रस्मों में अंतर हो सकता है, इसलिए घर की परंपरा को भी महत्व दिया जाता है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
1-करवा चौथ की सरगी कब खानी चाहिए?
करवा चौथ के दिन सूर्योदय से पहले सरगी ग्रहण की जाती है। इसके बाद व्रत शुरू होता है।
2-करवा चौथ की सरगी में क्या-क्या खाना चाहिए?
सरगी में फल, दूध, मेवे, मिठाई और पौष्टिक भोजन लिया जा सकता है। इसकी सामग्री परिवार और क्षेत्र की परंपरा के अनुसार अलग हो सकती है।
3-करवा चौथ की पूजा में किन देवी-देवताओं की पूजा होती है?
करवा चौथ में भगवान शिव, माता पार्वती, भगवान गणेश और करवा माता की पूजा की जाती है।
4-करवा चौथ पर चंद्रमा को अर्घ्य कैसे दिया जाता है?
चंद्रमा के दर्शन के बाद करवा या लोटे में जल लेकर चंद्रमा को अर्घ्य दिया जाता है। इसके बाद छलनी से चंद्रमा और पति का चेहरा देखने की परंपरा है।
5-चंद्रमा को अर्घ्य देने के बाद करवा चौथ का व्रत कैसे खोलें?
अर्घ्य देने के बाद पति के हाथ से पानी और मिठाई लेकर व्रत खोलने की परंपरा है। इसके बाद भोजन किया जाता है।









