24 नवंबर 2026, मंगलवार को कार्तिक पूर्णिमा मनाई जाएगी। कार्तिक पूर्णिमा पर स्नान, दान, दीपदान और भगवान विष्णु की आराधना का विशेष महत्व है। इस दिन कुछ ऐसे नियम भी हैं, जिनका ध्यान रखकर पर्व की धार्मिक परंपराओं का पालन किया जाता है।
कार्तिक पूर्णिमा 2026 पर क्या करना चाहिए?
कार्तिक पूर्णिमा के दिन सुबह स्नान करके भगवान का स्मरण करना और पूजा-अर्चना करना शुभ माना जाता है। संभव हो तो पवित्र नदी या सरोवर में स्नान किया जाता है। घर पर स्नान करने वाले लोग भी श्रद्धा के साथ पूजा कर सकते हैं। कार्तिक मास में स्नान, दीपदान, विष्णु आराधना और दान की परंपरा विशेष रूप से जुड़ी है।
इस दिन भगवान विष्णु का पूजन करें, तुलसी के पास दीप जलाएं और अपनी क्षमता के अनुसार अन्न, वस्त्र या जरूरत की वस्तुओं का दान करें। शाम के समय घर, पूजा स्थान और तुलसी के पास दीपक जलाना भी इस दिन की प्रमुख धार्मिक परंपराओं में शामिल है।
कार्तिक पूर्णिमा पर भगवान का नाम जाप, धार्मिक पाठ और भक्ति में समय बिताना भी अच्छा माना जाता है। यदि पूरे कार्तिक मास के नियमों का पालन नहीं कर पाए हैं, तब भी इस दिन स्नान, पूजा, दीपदान और दान-पुण्य किया जा सकता है।
कार्तिक पूर्णिमा पर क्या नहीं करना चाहिए?
कार्तिक पूर्णिमा के दिन मन और वाणी पर संयम रखना चाहिए। किसी से विवाद, कटु व्यवहार, अपशब्द और अनावश्यक क्रोध से बचना चाहिए। यह दिन पूजा, दान और भक्ति के साथ शांत और सात्त्विक दिनचर्या रखने का है।
खान-पान में मांसाहार, मदिरा और तामसिक भोजन से बचने की परंपरा है। कई धार्मिक परंपराओं में प्याज और लहसुन से भी परहेज किया जाता है। व्रत रखने वाले व्यक्ति को अपनी व्रत परंपरा के अनुसार फलाहार या सात्त्विक भोजन करना चाहिए।
इस दिन दिखावे के लिए जरूरत से ज्यादा खर्च करने के बजाय अपनी सामर्थ्य के अनुसार पूजा और दान करना बेहतर है। किसी जरूरतमंद व्यक्ति को खाली हाथ लौटाने के बजाय यथासंभव सहायता करना भी कार्तिक पूर्णिमा की सेवा भावना के अनुरूप है।
कार्तिक पूर्णिमा पर कौन से उपाय करें?
तुलसी के पास दीप जलाएं : कार्तिक मास में तुलसी पूजन और तुलसी के पास दीप जलाने की परंपरा है। कार्तिक पूर्णिमा पर शाम के समय तुलसी के पास दीप जलाकर भगवान विष्णु और माता तुलसी का स्मरण कर सकते हैं।
दीपदान करें : कार्तिक पूर्णिमा पर दीपदान का विशेष महत्व है। घर के पूजा स्थान, मुख्य द्वार, मंदिर या तुलसी के पास दीप जलाया जा सकता है। नदी या जलाशय में दीपदान करने की परंपरा भी कई स्थानों पर प्रचलित है।
भगवान विष्णु का नाम जाप करें : इस दिन भगवान विष्णु का स्मरण, मंत्र जाप या विष्णु सहस्रनाम का पाठ किया जा सकता है। कार्तिक मास में विष्णु आराधना से जुड़ी यह परंपरा पूरे महीने चलती है और पूर्णिमा को इसका विशेष महत्व माना जाता है।
जरूरतमंद को दान करें : अन्न, वस्त्र, तिल, दीपक या जरूरत की दूसरी वस्तुओं का अपनी क्षमता के अनुसार दान किया जा सकता है। दान में वस्तु की कीमत से ज्यादा सेवा और सहायता का भाव महत्वपूर्ण है।
स्नान के बाद सूर्य को अर्घ्य दें : सुबह स्नान के बाद सूर्यदेव को जल अर्पित करके दिन की शुरुआत कर सकते हैं। कार्तिक मास में स्नान के बाद सूर्य पूजा की परंपरा भी बताई गई है।
कार्तिक पूर्णिमा पर व्रत और खान-पान के नियम-
कार्तिक पूर्णिमा पर कुछ लोग पूर्णिमा व्रत रखते हैं, जबकि कई श्रद्धालु केवल स्नान, पूजा, दीपदान और दान-पुण्य करते हैं। पूरे दिन उपवास करना हर व्यक्ति के लिए जरूरी नहीं है। व्रत रखने वाले लोग अपनी परंपरा के अनुसार फलाहार या सात्त्विक भोजन कर सकते हैं।
इस दिन मांसाहार, मदिरा और तामसिक भोजन से बचना चाहिए। भोजन को सरल और सात्त्विक रखना कार्तिक मास की धार्मिक दिनचर्या के अनुरूप है। कार्तिक पूर्णिमा की तिथि 23 नवंबर की रात 11:42 बजे शुरू होकर 24 नवंबर की रात 8:23 बजे तक रहेगी। पर्व 24 नवंबर को मनाया जाएगा।
कार्तिक पूर्णिमा पर इन बातों का रखें ध्यान-
कार्तिक पूर्णिमा केवल स्नान और दीपदान तक सीमित पर्व नहीं है। इस दिन पूजा के साथ व्यवहार में भी संयम रखना महत्वपूर्ण है। घर में शांत वातावरण रखें, भगवान का स्मरण करें और जरूरतमंदों की मदद करें।
यदि नदी या तालाब में स्नान के लिए जाएं तो सुरक्षित स्थान का ही इस्तेमाल करें। दान अपनी सामर्थ्य के अनुसार करें और पूजा-पाठ को दिखावे के बजाय श्रद्धा से करें।
कार्तिक पूर्णिमा पर मुख्य रूप से स्नान, भगवान विष्णु की आराधना, तुलसी पूजन, दीपदान, दान और सात्त्विक दिनचर्या पर ध्यान देना चाहिए। वहीं क्रोध, विवाद, तामसिक भोजन और अनुचित व्यवहार से बचना चाहिए।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
कार्तिक पूर्णिमा 2026 कब है?
कार्तिक पूर्णिमा 24 नवंबर 2026, मंगलवार को है। पूर्णिमा तिथि 23 नवंबर की रात से शुरू होकर 24 नवंबर की रात तक रहेगी।
कार्तिक पूर्णिमा पर क्या करना चाहिए?
इस दिन स्नान, भगवान विष्णु की पूजा, तुलसी पूजन, दीपदान, सूर्य को अर्घ्य और अपनी क्षमता के अनुसार दान करना चाहिए।
कार्तिक पूर्णिमा पर क्या नहीं करना चाहिए?
इस दिन मांसाहार, मदिरा और तामसिक भोजन से बचना चाहिए। क्रोध, विवाद, कटु वचन और किसी का अपमान करने से भी बचना चाहिए।
कार्तिक पूर्णिमा पर कौन से उपाय कर सकते हैं?
तुलसी के पास दीप जलाना, दीपदान करना, भगवान विष्णु का नाम जाप करना, सूर्य को अर्घ्य देना और जरूरतमंद को दान करना प्रमुख धार्मिक उपाय हैं।
क्या कार्तिक पूर्णिमा पर व्रत रखना जरूरी है?
व्रत रखना अनिवार्य नहीं है। जो लोग व्रत नहीं रख सकते, वे स्नान, पूजा, दीपदान, भगवान का स्मरण और दान-पुण्य कर सकते हैं।









