|| ज्ञान का महासागर ||

गोवर्धन पूजा 2026 : जानें अन्नकूट का शुभ मुहूर्त, सामग्री और पूरी पूजा विधि

गोवर्धन पूजा 2026 में कब है? जानें अन्नकूट पूजा का शुभ मुहूर्त, पूजा सामग्री, गोबर से गोवर्धन बनाने की विधि, भोग, परिक्रमा और धार्मिक महत्व।

साझा करें:

Govardhan Puja 2026 Date

दीपावली के बाद कार्तिक शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा को गोवर्धन पूजा और अन्नकूट का पर्व मनाया जाता है। इस दिन भगवान श्रीकृष्ण के गोवर्धन स्वरूप की पूजा की जाती है और तरह-तरह के पकवान बनाकर अन्नकूट का भोग लगाया जाता है। अगर आप घर पर गोवर्धन पूजा करना चाहते हैं, तो गोवर्धन बनाने से लेकर पूजा, भोग और परिक्रमा तक की पूरी विधि समझ लीजिये।

गोवर्धन पूजा 2026 कब है? जानें शुभ मुहूर्त-

गोवर्धन पूजा 2026 में 10 नवंबर, मंगलवार को मनाई जाएगी। कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा तिथि 9 नवंबर को दोपहर 12:31 बजे शुरू होकर 10 नवंबर को दोपहर 2:00 बजे समाप्त होगी। गोवर्धन पूजा के लिए प्रातःकाल का शुभ मुहूर्त सुबह 6:40 बजे से 8:50 बजे तक रहेगा। इस दौरान गोवर्धन पूजा और अन्नकूट का पूजन किया जा सकता है। हालांकि अलग-अलग क्षेत्रों में पर्व की तारीख में अंतर मिल सकता है।

गोवर्धन पूजा की सामग्री क्या-क्या चाहिए?

घर पर पूजा करने के लिए बहुत ज्यादा सामग्री की जरूरत नहीं होती। मुख्य रूप से ये चीजें रखी जा सकती हैं-

गाय का गोबर - साफ मिट्टी या पूजा का स्थान - रोली और कुमकुम - अक्षत - फूल और माला - धूप और दीपक - जल - फल - मिठाई - पंचामृत - तुलसी दल - नैवेद्य - अन्नकूट के लिए अलग-अलग सब्जियां और पकवान - दूध, दही, घी, शहद और शक्कर - भगवान श्रीकृष्ण की प्रतिमा या चित्र - गाय और बछड़े की पूजा के लिए पुष्प और रोली अन्नकूट में चावल, दाल, कढ़ी, सब्जियां, पूरी, खीर, मिठाई, मक्खन, मिश्री और दूसरे घर में बने पकवान शामिल किए जा सकते हैं। 56 या 108 प्रकार के व्यंजन बनाने की परंपरा भी कई स्थानों पर है।

गोबर से गोवर्धन कैसे बनाएं और पूजा कैसे करें?

सुबह स्नान करके साफ कपड़े पहनें और पूजा का स्थान साफ कर लें। घर के आंगन या किसी स्वच्छ स्थान पर गाय के गोबर से गोवर्धन पर्वत की आकृति बनाएं। इसके साथ गाय और बछड़े की छोटी आकृति भी बनाई जा सकती है। गोवर्धन की आकृति को फूल, पत्तियों और अन्य उपलब्ध प्राकृतिक सामग्री से सजाएं। इसके बाद भगवान श्रीकृष्ण का ध्यान करें और गोवर्धन स्वरूप के सामने दीपक जलाएं।

सबसे पहले रोली, अक्षत और पुष्प अर्पित करें। इसके बाद धूप और दीप दिखाएं। गोवर्धन पर जल चढ़ाएं और फल, मिठाई तथा अन्य नैवेद्य अर्पित करें। इसके बाद भगवान श्रीकृष्ण की पूजा करें। तुलसी दल अर्पित करें और श्रीकृष्ण के नाम का जाप करें।

पूजा के बाद तैयार किए गए अन्नकूट के सभी पकवान भगवान को भोग के रूप में अर्पित करें। अन्नकूट में अलग-अलग प्रकार के अनाज, सब्जियां, मिठाई और दूसरे शाकाहारी पकवान रखे जा सकते हैं।

अंत में भगवान श्रीकृष्ण और गोवर्धन महाराज की आरती करें। परंपरा के अनुसार गोवर्धन की परिक्रमा भी की जाती है। पूजा और आरती के बाद अन्नकूट का प्रसाद परिवार के सदस्यों में बांटें।

अन्नकूट क्यों लगाया जाता है? जानें धार्मिक महत्व-

पौराणिक कथाओं के अनुसार ब्रज में भगवान श्रीकृष्ण ने इंद्र पूजा के स्थान पर गोवर्धन पर्वत की पूजा करने की प्रेरणा दी थी। इससे इंद्र नाराज हो गए और भारी वर्षा करने लगे। ब्रजवासियों की रक्षा के लिए श्रीकृष्ण ने गोवर्धन पर्वत को अपनी कनिष्ठिका अंगुली पर उठा लिया। कई दिनों तक ब्रजवासी गोवर्धन के नीचे सुरक्षित रहे। इसके बाद इंद्र का अभिमान समाप्त हुआ।

इसी प्रसंग की स्मृति में गोवर्धन पूजा की परंपरा जुड़ी है। अन्नकूट में बड़ी संख्या में पकवान बनाकर भगवान श्रीकृष्ण को भोग लगाया जाता है। यह प्रकृति, अन्न और गोवर्धन के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का पर्व भी है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)

1-गोवर्धन पूजा 2026 में कब है?

गोवर्धन पूजा 2026 में मुख्य रूप से 10 नवंबर, मंगलवार को मनाई जाएगी। कुछ क्षेत्रों की पंचांग गणना में 9 नवंबर की तिथि भी मिलती है।

2-गोवर्धन पूजा 2026 का शुभ मुहूर्त क्या है?

प्रमुख पंचांग गणना के अनुसार 10 नवंबर को सुबह 6:40 बजे से 8:50 बजे तक गोवर्धन पूजा का शुभ समय है।

3-गोवर्धन पूजा में गोबर से क्या बनाया जाता है?

गोबर से गोवर्धन पर्वत की आकृति बनाई जाती है। इसके साथ गाय और बछड़े की आकृति बनाने की भी परंपरा है।

4-अन्नकूट में क्या-क्या चढ़ाया जाता है?

अन्नकूट में चावल, दाल, कढ़ी, अलग-अलग सब्जियां, पूरी, खीर, मिठाई, मक्खन, मिश्री और अन्य शाकाहारी पकवान चढ़ाए जाते हैं।

5-गोवर्धन पूजा में 56 भोग क्यों लगाया जाता है?

धार्मिक परंपरा में भगवान श्रीकृष्ण को 56 प्रकार के व्यंजनों का भोग लगाने की परंपरा प्रसिद्ध है। इसे अन्नकूट कहा जाता है और यह श्रीकृष्ण के प्रति भक्ति व कृतज्ञता से जुड़ा है।

नवीनतम लेख

सभी लेख देखें
12 नवंबर को मंगल का सिंह राशि में गोचर : 12 राशियों पर क्या होगा असर?

ज्योतिष

12 नवंबर को मंगल का सिंह राशि में गोचर : 12 राशियों पर क्या होगा असर?

12 नवंबर 2026 को मंगल सिंह राशि में प्रवेश करेंगे। गुरु और केतु के साथ मंगल की स्थिति से 12 राशियों के करियर, धन, रिश्ते, साहस और निर्णय क्षमता पर असर पड़ेगा।

श्रीमद्भगवद्गीता, अध्याय 1, श्लोक 31: अर्जुन द्वारा युद्ध के विपरीत परिणाम का वर्णन करना

भगवद्गीता

श्रीमद्भगवद्गीता, अध्याय 1, श्लोक 31: अर्जुन द्वारा युद्ध के विपरीत परिणाम का वर्णन करना

श्रीमद्भगवद्गीता के अध्याय 1,श्लोक 31 में अर्जुन युद्ध के विपरीत शकुन, स्वजनों के वध, अनिष्ट परिणाम और कल्याण न दिखाई देने की बात भगवान श्रीकृष्ण से कहते हैं।

श्रुत और श्रोतव्य भोगों का त्याग क्यों जरूरी है? समझिये

आध्यात्म

श्रुत और श्रोतव्य भोगों का त्याग क्यों जरूरी है? समझिये

भगवद्गीता में श्रुत और श्रोतव्य भोगों के त्याग का महत्व, मन की चंचलता, इच्छाओं, आसक्ति, समता, निष्काम कर्म और आत्मज्ञान के मार्ग को सरलता से समझाया गया है।

एक बालक की जिद ! पिता की उदासीनता और विष्णु का प्रसन्न होना ! अमर हुआ ध्रुव

पौराणिक कथाएं

एक बालक की जिद ! पिता की उदासीनता और विष्णु का प्रसन्न होना ! अमर हुआ ध्रुव

भगवान के भक्त ध्रुव महाराज की इस कथा में पांच वर्ष के बालक ध्रुव का अपमान, भगवान विष्णु को प्रसन्न करने के लिए कठोर तपस्या, नारद से मंत्र प्राप्ति और ध्रुव तारा बनने का प्रसंग है।