गोवर्धन पूजा में भगवान श्रीकृष्ण के स्वरूप माने जाने वाले गिरिराज जी की पूजा के साथ परिक्रमा करने की परंपरा है। ब्रज में गोवर्धन परिक्रमा श्रद्धा, भक्ति और गिरिराज जी के प्रति समर्पण से जुड़ी मानी जाती है। आइए जानते हैं गोवर्धन की परिक्रमा क्यों की जाती है, कितनी परिक्रमा करनी चाहिए और इस दौरान किन बातों का ध्यान रखें।
गोवर्धन पूजा की परिक्रमा क्यों की जाती है?
पौराणिक कथा के अनुसार, जब ब्रज में इंद्रदेव की पूजा की तैयारी हो रही थी, तब भगवान श्रीकृष्ण ने ब्रजवासियों को गोवर्धन पर्वत की पूजा करने के लिए प्रेरित किया। श्रीकृष्ण ने बताया कि गोवर्धन पर्वत ब्रजवासियों और उनके पशुओं को भोजन, जल और आश्रय देता है। इसके बाद इंद्र ने भारी वर्षा कर दी। ब्रजवासियों की रक्षा के लिए श्रीकृष्ण ने गोवर्धन पर्वत को अपनी कनिष्ठा उंगली पर उठा लिया और सभी को उसके नीचे आश्रय दिया।
इसी कथा से गोवर्धन पूजा और गिरिराज जी की परिक्रमा की परंपरा जुड़ी है। भक्त परिक्रमा करते हुए गिरिराज महाराज के प्रति श्रद्धा प्रकट करते हैं और भगवान श्रीकृष्ण का स्मरण करते हैं।
गोवर्धन पूजा के बाद सात परिक्रमा करने की परंपरा का उल्लेख पूजा विधि में भी मिलता है। परिक्रमा के दौरान गिरिराज जी की जय-जयकार और भगवान श्रीकृष्ण का नाम लेने की परंपरा है।
गोवर्धन की कितनी परिक्रमा करनी चाहिए?
गोवर्धन पूजा के दिन घर में बनाए गए गोवर्धन की सात परिक्रमा करने की परंपरा है। परिक्रमा के समय जल का लोटा लेकर चलने और कुछ स्थानों पर जौ बोने की परंपरा भी बताई गई है।
वहीं ब्रज में गिरिराज पर्वत की सप्तकोसीय परिक्रमा अलग और विस्तृत धार्मिक यात्रा है। गोवर्धन की पूरी परिक्रमा लगभग 21 किलोमीटर यानी 7 कोस की है।
इसलिए घर में पूजा के दौरान की जाने वाली सात परिक्रमा और गोवर्धन की 21 किलोमीटर की सप्तकोसीय परिक्रमा को एक ही चीज नहीं समझना चाहिए।
ब्रज की इस परिक्रमा में मानसी गंगा, दानघाटी, राधाकुंड, कुसुम सरोवर, गोविंद कुंड और पूंछरी का लौठा जैसे प्रमुख धार्मिक स्थल आते हैं।
गोवर्धन परिक्रमा का धार्मिक महत्व क्या है?
गोवर्धन परिक्रमा को भगवान श्रीकृष्ण और ब्रजभूमि के प्रति भक्ति से जोड़ा जाता है। भक्त गिरिराज जी को प्रणाम करते हुए परिक्रमा पूरी करते हैं और परिवार के सुख, शांति तथा समृद्धि की प्रार्थना करते हैं।
ब्रज की धार्मिक परंपरा में गोवर्धन पर्वत को विशेष स्थान प्राप्त है। यहां देश-विदेश से कृष्ण भक्त और वैष्णव श्रद्धालु परिक्रमा के लिए पहुंचते हैं। गोवर्धन की 7 कोस यानी करीब 21 किलोमीटर की परिक्रमा लंबे समय से ब्रज की प्रमुख धार्मिक यात्राओं में शामिल है। गोवर्धन पूजा के अवसर पर अन्नकूट का भोग लगाने, गोसेवा करने और गिरिराज जी की पूजा के साथ परिक्रमा करने से इस पर्व की धार्मिक परंपरा पूरी होती है।
परिक्रमा करते समय किन बातों का ध्यान रखें?
गोवर्धन परिक्रमा श्रद्धा और अनुशासन के साथ करनी चाहिए। परिक्रमा के दौरान गिरिराज जी को अपने दाहिनी ओर रखते हुए दक्षिणावर्त दिशा में चलने की परंपरा है।
- परिक्रमा शांत मन और श्रद्धा के साथ करें।
- भगवान श्रीकृष्ण और गिरिराज जी का नाम स्मरण करते रहें।
- रास्ते में कूड़ा न फैलाएं और धार्मिक स्थलों की स्वच्छता बनाए रखें।
- गिरिराज जी और ब्रजभूमि के प्रति सम्मान रखें।
- भीड़ में धैर्य रखें और दूसरे श्रद्धालुओं को परेशानी न दें।
- लंबी परिक्रमा अपनी शारीरिक क्षमता के अनुसार करें।
- बुजुर्ग या अस्वस्थ व्यक्ति अपनी सुविधा और स्वास्थ्य को ध्यान में रखकर परिक्रमा करें।
कुछ परंपराओं में नंगे पैर परिक्रमा करने का विशेष महत्व बताया जाता है, लेकिन इसे अपनी क्षमता और परिस्थिति के अनुसार ही अपनाना चाहिए।
गोवर्धन पूजा और ब्रज परंपरा का क्या संबंध है?
गोवर्धन पूजा का ब्रज से गहरा धार्मिक संबंध है। मथुरा, वृंदावन और गोवर्धन क्षेत्र में यह पर्व विशेष श्रद्धा से मनाया जाता है। गिरिराज जी की पूजा, अन्नकूट, गोसेवा और परिक्रमा इस परंपरा के प्रमुख हिस्से हैं।
ब्रज में होने वाली सप्तकोसीय परिक्रमा केवल एक धार्मिक यात्रा नहीं, बल्कि भगवान श्रीकृष्ण की लीलाभूमि से जुड़ने का अवसर भी मानी जाती है। भक्त रास्ते में आने वाले प्रमुख कुंडों और मंदिरों के दर्शन करते हुए परिक्रमा पूरी करते हैं।
गोवर्धन पूजा के दिन घर में बनाए गए गोवर्धन की सात परिक्रमा हो या ब्रज में गिरिराज पर्वत की सप्तकोसीय परिक्रमा, दोनों के पीछे मुख्य भाव श्रद्धा, भक्ति और गिरिराज जी के प्रति समर्पण का है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
1-गोवर्धन की परिक्रमा क्यों की जाती है?
गिरिराज जी के प्रति श्रद्धा और भगवान श्रीकृष्ण की भक्ति प्रकट करने के लिए गोवर्धन की परिक्रमा की जाती है।
2-गोवर्धन पूजा के दिन कितनी परिक्रमा करनी चाहिए?
घर में बनाए गए गोवर्धन की पूजा के बाद सात परिक्रमा करने की परंपरा है।
3-गोवर्धन की सप्तकोसीय परिक्रमा कितनी लंबी है?
गोवर्धन की सप्तकोसीय परिक्रमा लगभग 21 किलोमीटर यानी 7 कोस की है।
4-गोवर्धन परिक्रमा किस दिशा में करनी चाहिए?
परिक्रमा दक्षिणावर्त दिशा में की जाती है और गिरिराज जी को दाहिनी ओर रखा जाता है।
5-क्या गोवर्धन परिक्रमा नंगे पैर करनी चाहिए?
कई धार्मिक परंपराओं में नंगे पैर परिक्रमा की जाती है, लेकिन व्यक्ति को अपनी शारीरिक क्षमता और परिस्थिति के अनुसार निर्णय लेना चाहिए।









