गणेश चतुर्थी के बाद गणपति विसर्जन भक्तों के लिए भावनाओं से जुड़ा अवसर होता है। कई परिवारों में बप्पा को घर में स्थापित करने के बाद तय परंपरा के अनुसार उनकी विदाई की जाती है। जिस श्रद्धा से गणेश जी की स्थापना और पूजा की जाती है, उसी भाव से विसर्जन की प्रक्रिया पूरी करने की परंपरा भी है।
विसर्जन से पहले अंतिम पूजा, आरती, भोग और क्षमा प्रार्थना की जाती है। इसके बाद गणपति की प्रतिमा को सम्मानपूर्वक विसर्जित किया जाता है। इस दौरान कुछ धार्मिक परंपराओं के साथ पर्यावरण का ध्यान रखना भी जरूरी है।
गणपति विसर्जन के 10 जरूरी नियम और मंत्र-
विसर्जन के लिए सबसे पहले शुभ समय का चयन करें। इसके लिए स्थानीय पंचांग या चौघड़िया देखा जा सकता है और राहुकाल जैसे अशुभ समय से बचने की परंपरा है।
बप्पा को विदा करने से पहले उत्तरपूजा यानी अंतिम पूजा और आरती करें। गणेश जी को दुर्वा, फूल, मोदक और अन्य भोग अर्पित करके कपूर से आरती करें। इसके बाद मंत्र बोलते हुए प्रतिमा को उसके स्थान से थोड़ा आगे खिसकाया जाता है। यह स्थापना पूर्ण होने और विसर्जन की शुरुआत का संकेत माना जाता है।
विसर्जन यात्रा शुरू करने से पहले गणपति पर अक्षत अर्पित करें। फल, मिठाई और सुपारी भी साथ रखी जा सकती है। प्रतिमा को सीधे जमीन पर रखने के बजाय कपड़े या चौकी पर सम्मानपूर्वक रखें। विसर्जन से पहले तीन बार दक्षिणावर्त परिक्रमा करने की परंपरा भी है।
विदाई के समय परिवार के सभी सदस्य गणेश जी के सामने हाथ जोड़कर प्रार्थना करें। पूजा के दौरान जाने-अनजाने हुई भूल के लिए क्षमा मांगें और परिवार की सुख-शांति, स्वास्थ्य और समृद्धि की कामना करें।
यदि नदी, तालाब या समुद्र में विसर्जन किया जा रहा है तो प्रतिमा को पानी में फेंकने के बजाय धीरे-धीरे और सम्मानपूर्वक प्रवाहित करें। मिट्टी की पर्यावरण अनुकूल प्रतिमा होने पर घर में बाल्टी, टब या किसी साफ पात्र में विसर्जन किया जा सकता है। बाद में उस मिट्टी और जल को पौधों या गमलों में इस्तेमाल किया जा सकता है।
पूजा के फूल, माला और अन्य निर्माल्य को इधर-उधर फेंकने के बजाय अलग एकत्र करके उचित स्थान पर रखें। विसर्जन के बाद पीछे मुड़कर देखने की परंपरा कई परिवारों में नहीं है। जल से बाहर आने के बाद हाथ जोड़कर बप्पा को प्रणाम करें और “अगले बरस तू जल्दी आ” कहते हुए घर लौटें। घर पहुंचकर हाथ-पैर धोने की परंपरा है।
गणपति विसर्जन के मंत्र-
विसर्जन के समय इन मंत्रों का जाप किया जा सकता है-
यान्तु देवगणा: सर्वे पूजामादाय मामकीम्। इष्टकामसमृद्धयर्थं पुनर्अपि पुनरागमनाय च॥
गच्छ गच्छ सुरश्रेष्ठ स्वस्थाने परमेश्वर। मम पूजा गृहीत्मेवां पुनरागमनाय च॥
विसर्जन के बाद कलश, नारियल और पूजा सामग्री का क्या करें?
गणपति विसर्जन के बाद घर में बची पूजा सामग्री को लेकर भी कई पारंपरिक मान्यताएं हैं। सबसे पहले कलश के जल को पवित्र मानकर घर में छिड़कने और बचा हुआ जल तुलसी या अन्य पौधों में डालने की परंपरा है। कलश को साफ करके उसमें चावल या अनाज रखकर रसोई में रखने की परंपरा भी कुछ परिवारों में निभाई जाती है।
नारियल को प्रसाद के रूप में परिवार और परिचितों में बांटकर ग्रहण किया जा सकता है। यदि नारियल का तुरंत उपयोग न हो तो उसे पूजा में दोबारा इस्तेमाल करने या पारंपरिक तरीके से विसर्जित करने की बात कही जाती है। सूखे नारियल का उपयोग बाद में पूजा या रसोई में भी किया जा सकता है।
पूजा के बाद बची दीपक की बाती को कूड़े में डालने के बजाय जल में प्रवाहित करने या तुलसी की मिट्टी में रखने की परंपरा है। कुछ मान्यताओं में उसकी राख का तिलक या नजर उतारने में इस्तेमाल किया जाता है।
सुपारी और सिक्कों को लेकर भी अलग-अलग पारिवारिक परंपराएं हैं। सुपारी का दान किया जा सकता है। वहीं कुछ लोग एक सुपारी और पूजा में रखे सिक्के को लाल कपड़े में बांधकर धन स्थान या तिजोरी में रखते हैं।
पूजा में इस्तेमाल किए गए जौ और दूर्वा को पौधों में डालना या किसी पवित्र जल में प्रवाहित करना पारंपरिक रूप से बताया जाता है। गणेश जी को प्रिय मानी जाने वाली दूर्वा को सुख-समृद्धि की भावना से तिजोरी में रखने की परंपरा भी कुछ घरों में है।
इस तरह गणपति विसर्जन केवल प्रतिमा को जल में प्रवाहित करने की प्रक्रिया नहीं है, बल्कि यह पूजा के समापन और बप्पा को श्रद्धापूर्वक विदा करने का अवसर भी है। अलग-अलग क्षेत्रों और परिवारों में विधि में थोड़ा अंतर हो सकता है, इसलिए अपनी पारंपरिक विधि और स्थानीय नियमों का भी ध्यान रखना चाहिए।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
1-गणपति विसर्जन से पहले कौन सी पूजा करनी चाहिए?
विसर्जन से पहले गणेश जी की अंतिम पूजा, आरती और भोग लगाया जाता है। इसके बाद क्षमा प्रार्थना करके प्रतिमा को विसर्जन के लिए ले जाया जाता है।
2-गणपति विसर्जन के समय कौन सा मंत्र पढ़ना चाहिए?
विसर्जन के समय “यान्तु देवगणा: सर्वे...” और “गच्छ गच्छ सुरश्रेष्ठ...” जैसे मंत्रों का जाप करने की परंपरा है।
3-क्या गणेश जी की मिट्टी की प्रतिमा का विसर्जन घर पर किया जा सकता है?
पर्यावरण अनुकूल मिट्टी की प्रतिमा का विसर्जन घर में साफ बाल्टी, टब या किसी उपयुक्त पात्र में किया जा सकता है। बाद में मिट्टी और जल को पौधों में इस्तेमाल किया जा सकता है।
4-गणपति विसर्जन के बाद कलश के जल का क्या करें?
परंपरा के अनुसार कलश के जल को घर में छिड़का जा सकता है और बचा हुआ जल तुलसी या अन्य पौधों में अर्पित किया जा सकता है।
5-गणपति पूजा के बाद बची दूर्वा और जौ का क्या करें?
दूर्वा और जौ को पौधों में डालने या पारंपरिक रूप से पवित्र जल में प्रवाहित करने की मान्यता है। परिवार की परंपरा के अनुसार इसका तरीका अलग हो सकता है।









