दशहरा यानी विजयादशमी 20 अक्टूबर 2026, मंगलवार को मनाया जाएगा। दशमी तिथि 20 अक्टूबर को दोपहर 12:50 बजे शुरू होकर 21 अक्टूबर को दोपहर 2:11 बजे समाप्त होगी। विजयादशमी का विजय मुहूर्त दोपहर 1:59 बजे से 2:45 बजे तक रहेगा। अपराह्न पूजा का समय दोपहर 1:14 बजे से 3:30 बजे तक रहेगा।
विजयादशमी पर रावण के पुतले का दहन किया जाता है। लेकिन रावण के दस सिरों के पीछे केवल एक ही अर्थ नहीं है। धार्मिक परंपराओं में इनके अलग-अलग अर्थ और व्याख्याएं मिलती हैं।
रावण के दस सिर किसके प्रतीक माने जाते हैं?
विजयादशमी की धार्मिक परंपरा में रावण के दस सिरों को मनुष्य के भीतर मौजूद दस तरह की बुराइयों से जोड़ा जाता है। इनमें काम, क्रोध, लोभ, मोह, मद, मत्सर, वासना, भ्रष्टाचार, अनैतिकता और अहंकार जैसे अवगुण शामिल माने जाते हैं।
इस व्याख्या में रावण केवल लंका के राजा का पात्र नहीं रह जाता, बल्कि मनुष्य के भीतर मौजूद उन प्रवृत्तियों का प्रतीक बन जाता है जो उसे धर्म और सदाचार से दूर ले जाती हैं। इसलिए दशहरे पर रावण दहन के साथ अपने भीतर के अहंकार और बुराइयों को खत्म करने का संकल्प लेने की परंपरा भी जुड़ी है।
रावण को अत्यंत विद्वान और शक्तिशाली बताया गया है। इसके बावजूद उसका अहंकार और अधर्म उसके विनाश का कारण बना। यही वजह है कि रावण के दस सिरों को ज्ञान और शक्ति के साथ गलत प्रवृत्तियों के बढ़ने की चेतावनी के रूप में भी देखा जाता है।
क्या सच में रावण के दस सिर थे?
रावण के दस सिर होने को लेकर धार्मिक और विद्वानों की अलग-अलग व्याख्याएं मिलती हैं। कुछ विद्वान मानते हैं कि रावण के वास्तविक रूप से दस सिर नहीं थे, बल्कि वह अपनी मायावी शक्ति से ऐसा भ्रम पैदा करता था। एक अन्य व्याख्या में उसके छह दर्शनों और चारों वेदों के ज्ञान को दस सिरों से जोड़ा गया है।
जैन परंपरा में भी रावण के दस सिरों को लेकर अलग कथा मिलती है। वहां उसके गले में मौजूद नौ मणियों में सिर का प्रतिबिंब दिखाई देने से दस सिर होने का भ्रम पैदा होने की बात कही गई है।
दूसरी ओर, रामायण की परंपरा में रावण को दशानन और दशग्रीव जैसे नामों से संबोधित किया गया है। इसलिए दस सिरों का प्रसंग भारतीय धार्मिक परंपरा में लंबे समय से जुड़ा हुआ है। इसे लेकर अलग-अलग ग्रंथों और परंपराओं में अलग दृष्टिकोण मिलते हैं।
रावण के दस सिर और दशहरा दहन का क्या संबंध है?
भगवान श्रीराम (Shri Ram) और रावण (Ravana) के युद्ध की कथा में रावण का वध विजयादशमी से जुड़ा है। दशहरे पर रावण का पुतला जलाना धर्म की अधर्म पर और सत्य की असत्य पर विजय का संदेश देता है। रावण के दस सिरों को अगर मनुष्य के दस अवगुणों का प्रतीक माना जाए, तो पुतला दहन उन बुराइयों को समाप्त करने के संकल्प से जुड़ जाता है।
यानी बाहर रावण का पुतला जलाने के साथ व्यक्ति को अपने भीतर के क्रोध, लोभ, अहंकार और गलत प्रवृत्तियों पर भी विजय पाने का प्रयास करना चाहिए। इसीलिए दशहरे का पर्व केवल रावण दहन तक सीमित नहीं है। इसका धार्मिक संदेश अपने आचरण में सत्य, मर्यादा और धर्म को स्थान देना भी है।
रावण के दस सिर का धार्मिक रहस्य क्या है?
रावण के दस सिरों की सबसे लोकप्रिय धार्मिक व्याख्या उन्हें मनुष्य के भीतर मौजूद अवगुणों से जोड़ती है। लेकिन इसके साथ यह बात भी ध्यान रखने योग्य है कि सभी धार्मिक परंपराएं दस सिरों का एक जैसा अर्थ नहीं बतातीं। कुछ परंपराएं इन्हें दस अवगुणों का प्रतीक मानती हैं, तो कुछ में रावण के ज्ञान और उसके दशानन स्वरूप से जुड़ी अलग व्याख्याएं मिलती हैं। इसलिए रावण के दस सिरों को केवल एक ही अर्थ में देखना उचित नहीं है।
एक और महत्वपूर्ण बात यह है कि भारत के अलग-अलग क्षेत्रों में रावण को देखने की परंपरा भी अलग है। कुछ स्थानों पर उसे बुराई के प्रतीक के रूप में जलाया जाता है, जबकि कुछ जगहों पर रावण को विद्वान, शिवभक्त या अपने इष्ट के रूप में सम्मान दिया जाता है।
इस तरह रावण के दस सिर भारतीय धार्मिक परंपरा में एक गहरे संदेश से जुड़े हैं-ज्ञान और शक्ति होने के बावजूद यदि अहंकार और अधर्म बढ़ जाए तो व्यक्ति का पतन हो सकता है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
1-रावण के दस सिर किसके प्रतीक माने जाते हैं?
लोकप्रिय धार्मिक मान्यता में रावण के दस सिर काम, क्रोध, लोभ, मोह, मद, मत्सर, वासना, भ्रष्टाचार, अनैतिकता और अहंकार जैसे अवगुणों के प्रतीक माने जाते हैं।
2-क्या रावण के सच में दस सिर थे?
रावण के दस सिरों को लेकर अलग-अलग धार्मिक परंपराएं हैं। कुछ विद्वान इसे मायावी रूप मानते हैं, जबकि कुछ परंपराओं में उसके दस सिरों को वास्तविक स्वरूप से जोड़ा गया है।
3-रावण को दशानन क्यों कहा जाता है?
रावण को दशानन, दशग्रीव और दशकंठ जैसे नामों से संबोधित किया गया है। दशानन का सामान्य अर्थ दस मुख वाला माना जाता है।
4-दशहरे पर रावण का पुतला क्यों जलाया जाता है?
दशहरे पर रावण दहन भगवान श्रीराम की रावण पर विजय और धर्म की अधर्म पर जीत का प्रतीक है। यह अहंकार और बुराइयों को खत्म करने का संदेश भी देता है।
5-रावण के दस सिर से हमें क्या सीख मिलती है?
रावण के दस सिर यह संदेश देते हैं कि ज्ञान और शक्ति के साथ सदाचार जरूरी है। अहंकार, क्रोध, लोभ और अधर्म पर नियंत्रण रखना ही जीवन की वास्तविक विजय है।









