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दीपावली पर कितने दीपक जलाने चाहिए? जानें कहां-कहां रखें और दीपक का महत्व

दीपावली पर कितने दीपक जलाने चाहिए और इन्हें घर में कहां रखना शुभ माना जाता है? जानें 13 दीपकों की परंपरा, मुख्य द्वार, तुलसी, पूजा स्थान और दीपदान का धार्मिक महत्व।

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Diwali Par Kitne Deepak Jalaye

दीपावली को दीपों का पर्व कहा जाता है और इस दिन घर के कोने-कोने में दीपक जलाने की परंपरा है। दीपक केवल घर को रोशन करने का साधन नहीं, बल्कि पूजा और शुभता से जुड़ी धार्मिक परंपरा भी है। आइए जानते हैं दीपावली पर कितने दीपक जलाने चाहिए, इन्हें कहां रखना चाहिए और दीपदान का क्या महत्व है।

दीपावली पर कितने दीपक जलाने चाहिए?

दीपावली पर दीपक जलाने की संख्या को लेकर अलग-अलग क्षेत्रों और परिवारों में अलग परंपराएं हैं। कुछ परंपराओं में 5, 7, 13, 14, 17 या 21 दीपक जलाने का विधान मिलता है। इनमें 13 दीपकों की परंपरा भी काफी प्रचलित है। इसलिए इसे पूरे देश के लिए एक ही अनिवार्य संख्या नहीं माना जा सकता।

कई परिवारों में लक्ष्मी-गणेश पूजा के दौरान मुख्य दीपक जलाने के बाद घर के अलग-अलग हिस्सों में छोटे दीपक रखे जाते हैं। दीपों की संख्या घर के आकार, परिवार की परंपरा और पूजा पद्धति के अनुसार बढ़ाई भी जा सकती है। 2026 में दीपावली 8 नवंबर, रविवार को है। लक्ष्मी पूजा प्रदोष काल में की जाएगी।

मुख्य द्वार से तुलसी तक, दीपक कहां-कहां रखें?

दीपावली पर सबसे पहले घर के मुख्य द्वार को दीपकों से सजाया जाता है। मान्यता है कि रोशनी से सजा प्रवेश द्वार शुभता और समृद्धि का स्वागत करता है। मुख्य द्वार पर एक या अधिक दीपक रखे जा सकते हैं। इसके बाद पूजा स्थान पर दीपक जलाएं। लक्ष्मी-गणेश पूजा के समय घी का दीपक जलाने की परंपरा है। पूजा के बाद भी दीपक कुछ समय तक जलता रहे, इसका ध्यान रखा जाता है।

तुलसी के पौधे के पास दीपक जलाना भी दीपावली की प्रमुख परंपराओं में शामिल है। तुलसी के पास दीप रखने से घर के धार्मिक वातावरण में शुभता जुड़ती है।

इसके अलावा रसोई, आंगन, खिड़की, छत या मुंडेर जैसे स्थानों पर भी दीपक रखने की परंपरा है। कुछ परंपराओं में पीपल के पेड़, पानी रखने के स्थान और घर के दूसरे हिस्सों में भी दीप जलाए जाते हैं।

घर के हर हिस्से में दीपक रखते समय यह जरूर ध्यान रखें कि वह सुरक्षित स्थान पर हो और उसके आसपास कपड़ा, कागज या कोई ज्वलनशील वस्तु न हो।

दीपावली पर दीपदान का धार्मिक महत्व क्या है?

दीपदान का संबंध प्रकाश और शुभता से जोड़ा गया है। दीपावली की रात दीपक जलाकर घर को प्रकाशित करने की परंपरा अंधकार पर प्रकाश की विजय की भावना को दर्शाती है।

धार्मिक परंपरा में दीपक को पूजा का महत्वपूर्ण हिस्सा माना गया है। लक्ष्मी पूजा के समय दीपक जलाकर देवी लक्ष्मी का स्वागत किया जाता है। घर के मुख्य द्वार पर दीप रखने से लेकर पूजा स्थान और तुलसी के पास दीप जलाने तक, हर स्थान का अपना धार्मिक भाव है।

दीपदान की परंपरा केवल घर तक सीमित नहीं रहती। कई परिवार मंदिर, नदी, घाट या अन्य धार्मिक स्थानों पर भी दीपदान करते हैं। कुछ परंपराओं में पितरों और यमराज के लिए भी अलग दीप जलाया जाता है।

दीपक क्यों जलाते हैं?

दीपक जलाने के पीछे सबसे प्रमुख धार्मिक भावना प्रकाश, शुभता और समृद्धि की है। दीपावली पर घर की सफाई के बाद दीप जलाने से पूरा वातावरण रोशनी से भर जाता है और लक्ष्मी पूजा के लिए घर को सजाया जाता है।

दीपक की लौ को पूजा में एकाग्रता और सकारात्मक भाव से भी जोड़ा जाता है। इसलिए दीपावली की रात केवल ज्यादा से ज्यादा दीप जलाना ही उद्देश्य नहीं है, बल्कि श्रद्धा के साथ सही स्थान पर दीप रखना भी महत्वपूर्ण माना जाता है।

दीपक जलाते समय परिवार की परंपरा का पालन किया जा सकता है। यदि किसी घर में 13 दीपक जलाने की परंपरा है तो 13 दीपक रखें, वहीं किसी परिवार में 21 या अधिक दीपक जलाने की परंपरा हो तो उसका पालन किया जा सकता है। सबसे जरूरी बात यह है कि दीपक सुरक्षित जगह पर रखें और जलते दीपक को बच्चों या पालतू जानवरों की पहुंच से दूर रखें।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)

1-दीपावली पर कितने दीपक जलाने चाहिए?

दीपावली पर दीपकों की संख्या की एक ही अनिवार्य परंपरा नहीं है। 5, 7, 13, 14, 17 और 21 दीपक जलाने की अलग-अलग परंपराएं मिलती हैं।

2-क्या दीपावली पर 13 दीपक जलाना जरूरी है?

13 दीपकों की परंपरा प्रचलित है, लेकिन इसे सभी परिवारों के लिए अनिवार्य नियम नहीं माना जाता। परिवार की परंपरा के अनुसार दीपक जलाए जा सकते हैं।

3-मुख्य द्वार पर दीपक क्यों जलाते हैं?

मुख्य द्वार पर दीपक जलाकर घर में शुभता और समृद्धि के स्वागत की धार्मिक परंपरा है।

4-क्या दीपावली पर तुलसी के पास दीपक जलाना चाहिए?

हां, तुलसी के पास दीपक जलाने की परंपरा है। इसे घर के धार्मिक वातावरण और शुभता से जोड़ा जाता है।

5-दीपावली पर दीपदान का क्या महत्व है?

दीपदान प्रकाश, शुभता और धार्मिक श्रद्धा से जुड़ी परंपरा है। इस दिन घर के साथ मंदिर और अन्य धार्मिक स्थानों पर भी दीपदान किया जाता है।

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