|| ज्ञान का महासागर ||

दीपावली पर लक्ष्मी जी के साथ गणेश जी की पूजा क्यों होती है? जानें धार्मिक महत्व

दीपावली पर लक्ष्मी जी के साथ गणेश जी की पूजा क्यों होती है? जानें धन-समृद्धि, बुद्धि-विवेक और शुभता से जुड़े धार्मिक महत्व के साथ कुबेर पूजा का संबंध।

साझा करें:

Diwali Lakshmi Ganesh Puja

दीपावली की रात मां लक्ष्मी के साथ भगवान गणेश की पूजा करने की परंपरा है। लक्ष्मी जी को धन-समृद्धि और गणेश जी को बुद्धि, विवेक और शुभता से जोड़ा जाता है। आखिर दोनों की पूजा एक साथ क्यों होती है, इसके पीछे की धार्मिक मान्यता समझते हैं।

लक्ष्मी-गणेश साथ क्यों पूजे जाते हैं?

दीपावली पर मां लक्ष्मी की पूजा धन, ऐश्वर्य और समृद्धि की कामना से की जाती है। वहीं भगवान गणेश को बुद्धि, विवेक और विघ्नों को दूर करने वाला देवता माना जाता है। इसी कारण दोनों की पूजा एक साथ करने की परंपरा है।

धार्मिक मान्यता का सीधा अर्थ है कि जीवन में केवल धन होना पर्याप्त नहीं है। धन का सही उपयोग करने के लिए बुद्धि और विवेक भी जरूरी है। इसलिए लक्ष्मी जी से समृद्धि और गणेश जी से सद्बुद्धि की कामना की जाती है।

दीपावली पर गणेश जी को पहले पूजने की परंपरा भी इसी से जुड़ी है। उन्हें प्रथम पूज्य माना जाता है और किसी भी शुभ कार्य की शुरुआत गणेश पूजन से करने की परंपरा है।

गणेश जी का संबंध बुद्धि और शुभता से-

भगवान गणेश को बुद्धि और ज्ञान का देवता माना जाता है। धार्मिक परंपरा में उन्हें विघ्नहर्ता और मंगलकर्ता का स्थान मिला है। इसलिए शुभ काम शुरू करने से पहले गणेश जी का स्मरण किया जाता है।

दीपावली की पूजा में इसका एक खास अर्थ निकलता है। घर में धन और समृद्धि आए, लेकिन उसके साथ व्यक्ति के पास सही निर्णय लेने की क्षमता भी रहे। धन का उपयोग अच्छे कामों में हो और जीवन में गलत रास्ते से बचने की बुद्धि मिले-इसी भावना से गणेश जी की पूजा की जाती है।

लक्ष्मी जी का धन-समृद्धि से क्या संबंध है?

मां लक्ष्मी को धन, ऐश्वर्य, वैभव और समृद्धि की देवी माना जाता है। दीपावली पर विशेष रूप से लक्ष्मी पूजन किया जाता है और घर में सुख-समृद्धि की कामना की जाती है। 2026 में दीपावली 8 नवंबर, रविवार को है। इस दिन लक्ष्मी-गणेश पूजन किया जाएगा।

पंचांग के अनुसार लक्ष्मी पूजा प्रदोष काल में करना शुभ माना जाता है। अलग-अलग स्थानों के अनुसार पूजा का समय बदलता है। दीपावली की पूजा में लक्ष्मी जी के साथ गणेश जी का होना इसी विचार को मजबूत करता है कि समृद्धि के साथ सद्बुद्धि भी बनी रहे।

दीपावली की पूजा में कुबेर का क्या महत्व है?

दीपावली की समृद्धि से जुड़ी पूजा परंपरा में भगवान कुबेर का भी स्थान है। धार्मिक मान्यता में कुबेर को धन का देवता और देवताओं के कोषाध्यक्ष के रूप में जाना जाता है। कुछ परिवार दीपावली पर लक्ष्मी-गणेश के साथ कुबेर की भी पूजा करते हैं। इसका उद्देश्य धन-संपदा और समृद्धि की कामना करना है। इस तरह दीपावली की पूजा में लक्ष्मी, गणेश और कुछ परंपराओं में कुबेर का स्मरण धन, बुद्धि और समृद्धि से जुड़ी कामना को पूरा करता है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)

1-दीपावली पर लक्ष्मी जी के साथ गणेश जी की पूजा क्यों होती है?

लक्ष्मी जी को धन-समृद्धि और गणेश जी को बुद्धि-विवेक तथा शुभता से जोड़ा जाता है। इसलिए दोनों की पूजा साथ की जाती है।

2-गणेश जी का लक्ष्मी पूजा से क्या संबंध है?

गणेश जी को बुद्धि और विघ्नहर्ता माना जाता है। धार्मिक मान्यता में धन के साथ सही बुद्धि और विवेक को जरूरी माना गया है।

3-मां लक्ष्मी किसकी देवी मानी जाती हैं?

मां लक्ष्मी को धन, ऐश्वर्य, वैभव और समृद्धि की देवी माना जाता है।

4-दीपावली पर गणेश जी को पहले क्यों पूजा जाता है?

गणेश जी को प्रथम पूज्य और विघ्नहर्ता माना जाता है। इसलिए शुभ कार्य और पूजा की शुरुआत गणेश पूजन से करने की परंपरा है।

5-क्या दीपावली पर लक्ष्मी-गणेश के साथ कुबेर की पूजा भी की जाती है?

हां, कई परिवारों में लक्ष्मी-गणेश के साथ भगवान कुबेर की भी पूजा की जाती है। इसका संबंध धन और समृद्धि की कामना से है।

नवीनतम लेख

सभी लेख देखें
12 नवंबर को मंगल का सिंह राशि में गोचर : 12 राशियों पर क्या होगा असर?

ज्योतिष

12 नवंबर को मंगल का सिंह राशि में गोचर : 12 राशियों पर क्या होगा असर?

12 नवंबर 2026 को मंगल सिंह राशि में प्रवेश करेंगे। गुरु और केतु के साथ मंगल की स्थिति से 12 राशियों के करियर, धन, रिश्ते, साहस और निर्णय क्षमता पर असर पड़ेगा।

श्रीमद्भगवद्गीता, अध्याय 1, श्लोक 31: अर्जुन द्वारा युद्ध के विपरीत परिणाम का वर्णन करना

भगवद्गीता

श्रीमद्भगवद्गीता, अध्याय 1, श्लोक 31: अर्जुन द्वारा युद्ध के विपरीत परिणाम का वर्णन करना

श्रीमद्भगवद्गीता के अध्याय 1,श्लोक 31 में अर्जुन युद्ध के विपरीत शकुन, स्वजनों के वध, अनिष्ट परिणाम और कल्याण न दिखाई देने की बात भगवान श्रीकृष्ण से कहते हैं।

श्रुत और श्रोतव्य भोगों का त्याग क्यों जरूरी है? समझिये

आध्यात्म

श्रुत और श्रोतव्य भोगों का त्याग क्यों जरूरी है? समझिये

भगवद्गीता में श्रुत और श्रोतव्य भोगों के त्याग का महत्व, मन की चंचलता, इच्छाओं, आसक्ति, समता, निष्काम कर्म और आत्मज्ञान के मार्ग को सरलता से समझाया गया है।

एक बालक की जिद ! पिता की उदासीनता और विष्णु का प्रसन्न होना ! अमर हुआ ध्रुव

पौराणिक कथाएं

एक बालक की जिद ! पिता की उदासीनता और विष्णु का प्रसन्न होना ! अमर हुआ ध्रुव

भगवान के भक्त ध्रुव महाराज की इस कथा में पांच वर्ष के बालक ध्रुव का अपमान, भगवान विष्णु को प्रसन्न करने के लिए कठोर तपस्या, नारद से मंत्र प्राप्ति और ध्रुव तारा बनने का प्रसंग है।