दीपावली हिंदू धर्म के प्रमुख त्योहारों में से एक है। इस दिन घरों में दीप जलाकर मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा की जाती है। दीपावली की रात लक्ष्मी पूजा के लिए शुभ मुहूर्त का विशेष महत्व होता है। इस दिन घर की साफ-सफाई और पूजा की तैयारी पहले से कर ली जाती है। अगर आप घर पर दीपावली की लक्ष्मी पूजा करना चाहते हैं, तो यहां तिथि से लेकर सामग्री और पूरी पूजा विधि आसान तरीके से जान सकते हैं।
दीपावली 2026 कब है? लक्ष्मी पूजा का शुभ मुहूर्त-
दीपावली 2026 में 8 नवंबर, रविवार को मनाई जाएगी। कार्तिक अमावस्या तिथि 8 नवंबर को सुबह 11:27 बजे शुरू होगी और 9 नवंबर को दोपहर 12:31 बजे समाप्त होगी। लक्ष्मी पूजा के लिए प्रदोष काल को विशेष महत्व दिया जाता है। पंचांग गणना के अनुसार शाम 5:54 बजे से 7:50 बजे तक लक्ष्मी पूजा का शुभ मुहूर्त रहेगा। इसी अवधि में वृषभ लग्न भी रहेगा। जिस शहर में पूजा करनी हो, वहां के स्थानीय पंचांग के अनुसार अंतिम मुहूर्त देखना उचित रहेगा।
दीपावली लक्ष्मी पूजा की सामग्री-
पूजा की तैयारी पहले से कर लेने पर पूजा के समय परेशानी नहीं होती। घर में सामान्य रूप से उपलब्ध सामग्री से भी सरल लक्ष्मी-गणेश पूजा की जा सकती है।
मुख्य पूजा सामग्री : - मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की प्रतिमा या चित्र - पूजा की चौकी - लाल या पीला कपड़ा - कलश और जल - नारियल और आम के पत्ते - रोली, कुमकुम, हल्दी और चंदन - अक्षत यानी साबुत चावल - फूल और फूलों की माला - कमल का फूल उपलब्ध हो तो - पान और सुपारी - मौली या कलावा - धूप और अगरबत्ती - कपूर - घी या तेल का दीपक - रुई की बत्ती - फल - मिठाई
खील-बताशे - पंचमेवा - दक्षिणा या सिक्के - चांदी का सिक्का, (यदि उपलब्ध हो) - बही-खाता या व्यापार से जुड़ी सामग्री, (यदि पूजा में शामिल करनी हो)
पारंपरिक विस्तृत पूजन में कमलगट्टा, धनिया, दूर्वा, पंचपल्लव, पंचामृत और अन्य सामग्री भी रखी जाती है। घर की परंपरा और सामर्थ्य के अनुसार सामग्री कम या अधिक रखी जा सकती है।
दीपावली पर लक्ष्मी-गणेश की पूजा कैसे करें?
सबसे पहले पूजा स्थल को अच्छी तरह साफ करें। चौकी पर लाल या पीला कपड़ा बिछाकर मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की प्रतिमा स्थापित करें। पास में कलश रखें और उसमें स्वच्छ जल भरकर सुपारी, अक्षत और सिक्का डालें। कलश के ऊपर आम के पत्ते और नारियल रखा जा सकता है। इसके बाद दीपक जलाकर पूजा शुरू करें। हाथ में जल, अक्षत और पुष्प लेकर पूजा का संकल्प लें।
सबसे पहले भगवान गणेश की पूजा करें। उन्हें रोली, अक्षत, दूर्वा और फूल अर्पित करें। इसके बाद मां लक्ष्मी का ध्यान करके उनके सामने पुष्प और अक्षत अर्पित करें। अब दोनों देवी-देवताओं को चंदन, रोली, अक्षत और फूल अर्पित करें। उपलब्ध होने पर मां लक्ष्मी को कमल का फूल चढ़ाएं। देवी-देवताओं को वस्त्र या चुनरी अर्पित की जा सकती है।
इसके बाद धूप और दीप अर्पित करें। फल, मिठाई, खील-बताशे और अन्य नैवेद्य भगवान को अर्पित करें। पूजा में रखे धन, सिक्के, बही-खाते या व्यापार से जुड़ी वस्तुओं की भी पूजा करें।
मां लक्ष्मी के मंत्र का जाप करें। सरल रूप से “ॐ श्रीं महालक्ष्म्यै नमः” का जाप किया जा सकता है। इसके बाद लक्ष्मी-गणेश की आरती करें और परिवार के सभी सदस्य भगवान को प्रणाम करके प्रसाद ग्रहण करें। पूजा की सामान्य क्रमबद्ध विधि में गणेश पूजन, लक्ष्मी पूजन, नैवेद्य और आरती प्रमुख चरण हैं।
पूजा समाप्त होने के बाद घर के मुख्य स्थानों और अन्य हिस्सों में दीपक जलाएं। दीपावली पर दीप जलाने की परंपरा पूजा के साथ पूरे घर को प्रकाश से भरने से जुड़ी है।
दीपावली लक्ष्मी पूजा में किन बातों का ध्यान रखें?
दीपावली की लक्ष्मी पूजा के लिए सबसे पहले पूजा स्थल और घर की साफ-सफाई रखें। पूजा के समय सभी सामग्री पास में व्यवस्थित रखें ताकि बार-बार उठना न पड़े। मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा श्रद्धा से करें और अपनी पारिवारिक परंपरा के अनुसार मंत्र, कथा और आरती शामिल करें। पूजा में चढ़ाई जाने वाली सामग्री ताजा और साफ होनी चाहिए।
यदि घर में व्यापार या व्यवसाय से जुड़े लोग हैं तो बही-खाता, कलम, तिजोरी या व्यापार से संबंधित वस्तुओं को भी पूजा में शामिल कर सकते हैं। कई परंपराओं में इन्हें लक्ष्मी पूजा का हिस्सा बनाया जाता है।
सबसे जरूरी बात यह है कि पूजा को केवल दिखावे तक सीमित न रखें। दीपावली का पर्व घर की स्वच्छता, प्रकाश, भक्ति और परिवार के साथ मिलकर उत्सव मनाने का अवसर है।
दीपावली पर लक्ष्मी पूजा का धार्मिक महत्व-
दीपावली की अमावस्या की रात मां लक्ष्मी की पूजा करने की परंपरा है। घर को साफ करके दीपों से सजाया जाता है और लक्ष्मी-गणेश की पूजा के साथ सुख-समृद्धि और बुद्धि की प्रार्थना की जाती है। भगवान गणेश को पूजा में सबसे पहले स्थान देने की परंपरा है, जबकि मां लक्ष्मी को धन, ऐश्वर्य और समृद्धि की देवी के रूप में पूजा जाता है।
इसी कारण दीपावली की पूजा में दोनों को साथ स्थापित करके पूजा करने की परंपरा प्रचलित है। दीपावली की रात जलने वाला दीपक अंधकार पर प्रकाश की विजय का संदेश देता है। इसलिए पूजा के साथ घर में दीप जलाना भी इस पर्व का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
1-दीपावली 2026 कब मनाई जाएगी?
दीपावली 2026 में 8 नवंबर, रविवार को मनाई जाएगी।
2-दीपावली 2026 में लक्ष्मी पूजा का शुभ मुहूर्त क्या है?
प्रमुख पंचांग गणना के अनुसार दिल्ली में शाम 5:54 बजे से 7:50 बजे तक लक्ष्मी पूजा का शुभ मुहूर्त है। अन्य शहरों में समय कुछ मिनट अलग हो सकता है।
3-लक्ष्मी पूजा में कौन-कौन सी सामग्री चाहिए?
लक्ष्मी-गणेश की प्रतिमा, चौकी, लाल या पीला कपड़ा, कलश, नारियल, रोली, अक्षत, फूल, दीपक, धूप, कपूर, फल, मिठाई, खील-बताशे और सिक्के जैसी प्रमुख सामग्री रखी जाती है।
4-दीपावली पर लक्ष्मी पूजा कैसे शुरू करें?
सबसे पहले पूजा स्थल की सफाई करके चौकी सजाएं, लक्ष्मी-गणेश की प्रतिमा स्थापित करें, कलश रखें और संकल्प के बाद पहले गणेश जी तथा फिर मां लक्ष्मी की पूजा करें।
5-दीपावली पर लक्ष्मी के साथ गणेश जी की पूजा क्यों की जाती है?
धार्मिक परंपरा में मां लक्ष्मी को धन-समृद्धि और भगवान गणेश को बुद्धि, शुभता तथा विघ्नों को दूर करने वाला माना जाता है। इसलिए दीपावली की पूजा में दोनों को साथ पूजा जाता है।









