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देवउठनी एकादशी 2026 पूजा विधि : भगवान विष्णु को कैसे जगाएं? जानें पूरी विधि और मंत्र

देवउठनी एकादशी 2026 पर भगवान विष्णु को जगाने की सही विधि जानें। चौक, विष्णु चरण, दीपक, शंख-घंटी, मंत्र, पूजा और तुलसी विवाह से जुड़ी जरूरी जानकारी पढ़ें।

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Dev Uthani Ekadashi 2026 Puja Vidhi

देवउठनी एकादशी 2026 में 20 नवंबर, शुक्रवार को मनाई जाएगी। इस दिन भगवान विष्णु के योगनिद्रा से जागने की परंपरा है। इस अवसर पर घर में चौक बनाकर भगवान विष्णु के चरण अंकित किए जाते हैं और शाम-रात में पूजा की जाती है। शंख और घंटी बजाकर भगवान विष्णु को जगाया जाता है और इसके बाद विधिवत पूजा तथा आरती की जाती है।

देवउठनी एकादशी 2026 पर भगवान विष्णु को कैसे जगाएं?

देवउठनी एकादशी के दिन सुबह स्नान करके पूजा स्थल और घर की सफाई करें। आंगन या पूजा स्थान पर चौक बनाएं और भगवान विष्णु के चरणों की आकृति बनाएं। इन चरणों को दिन के समय ढककर रखा जाता है। शाम के समय पूजा स्थल को फूल, पत्तियों और वंदनवार से सजाएं। भगवान विष्णु के सामने दीपक जलाएं और फल, मिठाई, गन्ना, सिंघाड़े तथा अन्य नैवेद्य अर्पित करें।

रात में भगवान विष्णु की पूजा के बाद शंख, घंटी और अन्य वाद्य बजाकर उन्हें जगाने की परंपरा है। इस दौरान भजन, भगवान की कथा और स्तोत्र का पाठ भी किया जाता है।

भगवान को जगाते समय यह मंत्र बोला जा सकता है-

“उत्तिष्ठ गोविन्द त्यज निद्रां जगत्पतये।”

इसके बाद भगवान विष्णु से जागकर संसार के कल्याण का आशीर्वाद देने की प्रार्थना करें।

देवउठनी एकादशी की पूजा विधि क्या है?

भगवान विष्णु को जगाने के बाद विधिवत पूजा करें। पूजा स्थल पर भगवान विष्णु की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करके उन्हें फूल, तुलसी दल, फल और नैवेद्य अर्पित करें। इसके बाद धूप और दीप जलाएं। कपूर से आरती करें और भगवान विष्णु की स्तुति करें।

पूजा पूरी होने के बाद परिवार के सभी सदस्य भगवान से सुख, शांति और समृद्धि की प्रार्थना कर सकते हैं। देवउठनी एकादशी की पूजा में भगवान विष्णु के साथ तुलसी का पूजन भी किया जाता है। इस दिन तुलसी विवाह की परंपरा भी जुड़ी हुई है।

देवउठनी एकादशी पर कौन-कौन सी सामग्री चाहिए?

पूजा के लिए सामग्री पहले से तैयार कर लें। इसमें मुख्य रूप से ये चीजें रखी जा सकती हैं—

  • भगवान विष्णु की प्रतिमा या तस्वीर
  • तुलसी का पौधा या तुलसी दल
  • पूजा की चौकी
  • गेरू या रंगोली
  • पीले या लाल वस्त्र
  • फूल
  • फल
  • गन्ना
  • सिंघाड़ा
  • मिठाई या नैवेद्य
  • दीपक
  • घी
  • कपूर
  • धूप
  • रोली या कुमकुम
  • अक्षत
  • चंदन
  • पान
  • सुपारी
  • दूध
  • दही
  • शहद
  • पंचामृत

पूजा सामग्री की पारंपरिक सूचियों में गंगाजल, कुश, सप्तधान्य, हल्दी, पंचरत्न, लाल वस्त्र, हवन सामग्री और विष्णु प्रतिमा का भी उल्लेख मिलता है।

देवउठनी एकादशी पर तुलसी विवाह और विशेष पूजा-

देवउठनी एकादशी के दिन भगवान विष्णु और तुलसी के विवाह की परंपरा भी है। कई घरों में तुलसी के पौधे के चारों ओर मंडप बनाकर उसे सजाया जाता है और भगवान विष्णु के स्वरूप शालिग्राम के साथ तुलसी विवाह कराया जाता है।

इस दिन पूजा स्थल पर दीपक जलाना, भगवान विष्णु की आरती करना और तुलसी की पूजा करना विशेष रूप से किया जाता है। देवउठनी एकादशी के साथ चातुर्मास की अवधि पूरी होने और भगवान विष्णु के जागने की धार्मिक परंपरा जुड़ी है।

देवउठनी एकादशी 2026 की तिथि : 20 नवंबर 2026, शुक्रवार।

एकादशी तिथि : 20 नवंबर सुबह 7:15 बजे से 21 नवंबर सुबह 6:31 बजे तक।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)

1-देवउठनी एकादशी 2026 कब है?

देवउठनी एकादशी 20 नवंबर 2026, शुक्रवार को है। एकादशी तिथि 20 नवंबर सुबह 7:15 बजे शुरू होकर 21 नवंबर सुबह 6:31 बजे समाप्त होगी।

2-देवउठनी एकादशी पर भगवान विष्णु को कैसे जगाएं?

भगवान विष्णु के चरणों की आकृति बनाकर पूजा स्थल सजाएं। रात में दीपक जलाकर शंख और घंटी बजाएं, भजन-कीर्तन करें और भगवान विष्णु को जागने का मंत्र बोलें।

3-भगवान विष्णु को जगाने के लिए कौन सा मंत्र बोलें?

“उत्तिष्ठ गोविन्द त्यज निद्रां जगत्पतये” मंत्र का उच्चारण भगवान विष्णु को जगाने के लिए किया जाता है।

4-देवउठनी एकादशी पर तुलसी विवाह क्यों किया जाता है?

देवउठनी एकादशी पर तुलसी और भगवान विष्णु के शालिग्राम स्वरूप के विवाह की परंपरा है। इसी कारण इस दिन तुलसी विवाह भी कराया जाता है।

5-देवउठनी एकादशी की पूजा में क्या चढ़ाएं?

भगवान विष्णु को तुलसी दल, फूल, फल, गन्ना, सिंघाड़ा, मिठाई और नैवेद्य अर्पित करें। पूजा में दीपक, धूप, कपूर, चंदन, रोली और अन्य पारंपरिक सामग्री भी रखें।

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