20 नवंबर 2026, शुक्रवार को देवउठनी एकादशी का व्रत रखा जाएगा। यह दिन भगवान विष्णु की आराधना, व्रत, दान और संयम के लिए विशेष माना जाता है। जानें इस दिन कौन से काम करने चाहिए और किन गलतियों से बचना जरूरी है।
देवउठनी एकादशी 2026 पर क्या करना चाहिए?
देवउठनी एकादशी के दिन सुबह स्नान करके स्वच्छ वस्त्र पहनें और भगवान विष्णु का स्मरण करते हुए व्रत का संकल्प लें। घर के पूजा स्थान की सफाई करके भगवान विष्णु के सामने दीप जलाएं। दिनभर अपनी श्रद्धा के अनुसार भगवान विष्णु के नाम का जाप, विष्णु सहस्रनाम, भगवद्गीता या धार्मिक पाठ किया जा सकता है।
जरूरतमंद व्यक्ति को अन्न, वस्त्र या अपनी क्षमता के अनुसार दान करना भी अच्छा माना जाता है। शाम के समय दीप जलाकर भगवान विष्णु की आराधना करें और भक्ति में समय बिताएं। इस दिन मन, वाणी और व्यवहार में संयम रखना भी व्रत का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
देवउठनी एकादशी पर खान-पान के क्या नियम हैं?
एकादशी व्रत में सामान्य रूप से चावल, गेहूं, दाल और दूसरे अनाज से बचने की परंपरा है। व्रत रखने वाले लोग अपनी परंपरा के अनुसार फल, दूध, सूखे मेवे, मखाना, साबूदाना, सिंघाड़ा, शकरकंद या अन्य फलाहारी चीजें ले सकते हैं।
कुछ श्रद्धालु निर्जल व्रत रखते हैं, जबकि कई लोग फलाहार या हल्का व्रत रखते हैं। व्रत का तरीका अपनी क्षमता और पारिवारिक परंपरा के अनुसार रखा जा सकता है।
भोजन में मांसाहार, शराब और तामसिक चीजों से बचना चाहिए। व्रत के नाम पर जरूरत से ज्यादा कठिन नियम अपनाना जरूरी नहीं है। श्रद्धा के साथ संयम रखना इस दिन का मुख्य भाव है।
देवउठनी एकादशी पर क्या नहीं करना चाहिए?
देवउठनी एकादशी के दिन झूठ बोलने, किसी से विवाद करने, कटु शब्द बोलने और किसी जीव को कष्ट पहुंचाने से बचना चाहिए। धार्मिक मान्यता में इस दिन मन को शांत रखने और भगवान विष्णु की भक्ति में समय लगाने पर जोर दिया जाता है।
व्रत के दौरान सामान्य भोजन, चावल, अनाज और तामसिक भोजन से बचना चाहिए। दिन को केवल खान-पान के नियमों तक सीमित रखने के बजाय व्यवहार में भी संयम रखना चाहिए। क्रोध, चुगली, अपशब्द और अनावश्यक विवाद से दूरी बनाना व्रत की भावना के अनुरूप है।
देवउठनी एकादशी पर तुलसी को लेकर क्या नियम हैं?
देवउठनी एकादशी भगवान विष्णु की पूजा से जुड़ी होने के कारण तुलसी का विशेष महत्व है। पूजा में पहले से तोड़े गए तुलसी दल का उपयोग किया जा सकता है। एकादशी के दिन तुलसी की पत्तियां तोड़ने से बचने की परंपरा है, इसलिए पूजा के लिए तुलसी दल पहले ही रख लेना बेहतर माना जाता है। भगवान विष्णु को तुलसी अर्पित करते समय श्रद्धा से पूजा करें और तुलसी के पौधे के पास दीप भी जला सकते हैं।
देवउठनी एकादशी के व्रत में किन जरूरी नियमों का ध्यान रखें?
देवउठनी एकादशी पर व्रत रखने वाले व्यक्ति को पूरे दिन सात्त्विक दिनचर्या रखने का प्रयास करना चाहिए। जरूरत से ज्यादा सोने, क्रोध करने, झूठ बोलने और मन को अशांत करने वाले कामों से बचें। भगवान विष्णु का नाम जाप, भजन, धार्मिक पाठ और दान-पुण्य में समय बिताना अच्छा माना जाता है।
यदि किसी कारण से व्रत में भूल हो जाए तो घबराने के बजाय भगवान विष्णु से क्षमा मांगकर पूजा और भक्ति जारी रखनी चाहिए। व्रत समाप्त करने के लिए अगले दिन द्वादशी तिथि में पारण किया जाता है। पंचांग के अनुसार 21 नवंबर को पारण का समय दोपहर 1:11 बजे से 3:18 बजे तक है।
व्रत के दौरान अपनी शारीरिक क्षमता का भी ध्यान रखना चाहिए। कठोर निर्जल व्रत हर व्यक्ति के लिए जरूरी नहीं है। श्रद्धा, संयम और भगवान विष्णु की भक्ति को व्रत का मूल भाव मानकर नियमों का पालन करना चाहिए।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
देवउठनी एकादशी 2026 कब है?
देवउठनी एकादशी 20 नवंबर 2026, शुक्रवार को है।
देवउठनी एकादशी पर क्या खाना चाहिए?
व्रत में फल, दूध, सूखे मेवे, मखाना, साबूदाना, सिंघाड़ा और शकरकंद जैसी फलाहारी चीजें ली जा सकती हैं। चावल और सामान्य अनाज से बचने की परंपरा है।
क्या देवउठनी एकादशी के दिन तुलसी तोड़ सकते हैं?
परंपरा के अनुसार एकादशी के दिन तुलसी की पत्तियां नहीं तोड़ी जातीं। पूजा के लिए तुलसी दल पहले ही तोड़कर रख लेना चाहिए।
देवउठनी एकादशी पर क्या नहीं करना चाहिए?
इस दिन चावल और सामान्य अनाज खाने, तामसिक भोजन करने, झूठ बोलने, क्रोध करने, विवाद करने और किसी को कष्ट पहुंचाने से बचना चाहिए।
देवउठनी एकादशी 2026 का पारण कब होगा?
2026 में देवउठनी एकादशी व्रत का पारण 21 नवंबर को दोपहर 1:11 बजे से 3:18 बजे तक किया जाएगा।









