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भाई दूज पर तिलक लगाने की परंपरा क्यों शुरू हुई? जानें यमराज-यमुना की पूरी कथा

भाई दूज पर भाई को तिलक लगाने की परंपरा यमराज और यमुना की कथा से जुड़ी है। जानें यम द्वितीया, तिलक, भोजन, वरदान और भाई की लंबी आयु की धार्मिक मान्यता भी।

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यमराज यमुना की पौराणिक कथा

भाई दूज पर बहन भाई के माथे पर तिलक लगाकर उसकी सुख-समृद्धि और लंबी आयु की कामना करती है। इस परंपरा का संबंध सूर्यपुत्र यमराज और उनकी बहन यमुना की पौराणिक कथा से जुड़ा है। आखिर यमुना ने यमराज को घर क्यों बुलाया और इसी कथा से भाई दूज की परंपरा कैसे जुड़ी, आइए जानते हैं।

यमराज और यमुना की पूरी कथा-

पौराणिक कथाओं के अनुसार यमराज और यमुना भाई-बहन थे। दोनों के बीच बहुत स्नेह था, लेकिन समय बीतने के साथ दोनों अलग हो गए और लंबे समय तक उनकी मुलाकात नहीं हो सकी।

एक दिन यमराज की यमुना से भेंट हुई। भाई को सामने देखकर यमुना बहुत प्रसन्न हुईं और उन्हें अपने घर आने का निमंत्रण दिया। यमराज उनके घर पहुंचे तो यमुना ने प्रेम से उनका स्वागत किया।

यमुना ने भाई के माथे पर तिलक लगाया, आरती की और उन्हें भोजन कराया। बहन के इस स्नेह और आतिथ्य से यमराज बहुत प्रसन्न हुए। इसके बाद उन्होंने यमुना से वरदान मांगने के लिए कहा। यही प्रसंग भाई दूज की कथा का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है और इसी से भाई के तिलक तथा बहन के घर भोजन कराने की परंपरा जुड़ी है।

यमुना ने यमराज से क्या वरदान मांगा?

प्रचलित कथा के अनुसार यमुना ने इच्छा जताई कि यमराज हर वर्ष कार्तिक शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि पर उनसे मिलने आएं। यमराज ने उनकी बात स्वीकार की। इसी मिलन की स्मृति में हर साल भाई दूज मनाने की परंपरा जुड़ी हुई है।

भाई दूज को यम द्वितीया कहने का संबंध भी इसी कथा से है। यह पर्व कार्तिक शुक्ल द्वितीया को मनाया जाता है। इस दिन भाई अपनी बहन के घर जाकर तिलक करवाता है और बहन उसे भोजन कराती है। धार्मिक मान्यता में इस दिन भाई-बहन के प्रेम और मंगलकामना को विशेष महत्व दिया गया है।

भाई दूज पर भाई को तिलक और भोजन क्यों कराया जाता है?

यमुना ने जिस तरह यमराज का स्वागत करके तिलक किया और उन्हें भोजन कराया था, उसी परंपरा की स्मृति में भाई दूज पर बहन भाई का तिलक करती है।

बहन भाई के माथे पर रोली या कुमकुम का तिलक लगाती है, आरती करती है और मिठाई या भोजन कराती है। कई परिवारों में तिलक के बाद भाई की कलाई पर कलावा भी बांधा जाता है।

भाई अपनी बहन को उपहार देता है और उसके सुख-समृद्धि की कामना करता है। इस परंपरा का भाव केवल रस्म निभाना नहीं, बल्कि भाई-बहन के बीच प्रेम, स्नेह और एक-दूसरे के मंगल की कामना करना है।

भाई दूज को यम द्वितीया क्यों कहते हैं?

भाई दूज का दूसरा प्रमुख नाम यम द्वितीया है। इसका संबंध कार्तिक शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि और यमराज-यमुना की कथा से है। धार्मिक मान्यता में इस दिन बहन द्वारा भाई का तिलक करने और उसे भोजन कराने को शुभ माना गया है। भाई के लिए दीर्घायु, सुख और मंगल की कामना की जाती है। यमुना स्नान का भी इस दिन विशेष धार्मिक महत्व बताया गया है।

2026 में भाई दूज 11 नवंबर, बुधवार को है। इस दिन भाई दूज तिलक का समय दोपहर 1:16 बजे से 3:27 बजे तक रहेगा। द्वितीया तिथि 10 नवंबर दोपहर 2 बजे से 11 नवंबर दोपहर 3:53 बजे तक है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)

1-भाई दूज पर भाई को तिलक क्यों लगाया जाता है?

पौराणिक कथा में यमुना ने अपने भाई यमराज का तिलक और स्वागत किया था। इसी परंपरा की स्मृति में भाई दूज पर बहन भाई को तिलक करती है।

2-यमराज और यमुना की भाई दूज की कथा क्या है?

यमराज एक दिन अपनी बहन यमुना के घर पहुंचे। यमुना ने उनका तिलक किया, भोजन कराया और प्रेम से स्वागत किया। इससे प्रसन्न होकर यमराज ने उन्हें वर मांगने को कहा।

3-यमराज ने यमुना को कौन सा वरदान दिया था?

प्रचलित कथा के अनुसार यमुना ने इच्छा जताई कि यमराज हर वर्ष कार्तिक शुक्ल द्वितीया को उनसे मिलने आएं। इसी परंपरा को भाई दूज से जोड़ा जाता है।

4-भाई दूज को यम द्वितीया क्यों कहा जाता है?

यह पर्व कार्तिक शुक्ल द्वितीया को मनाया जाता है और इसकी पौराणिक कथा यमराज तथा यमुना के मिलन से जुड़ी है। इसलिए इसे यम द्वितीया भी कहते हैं।

5-भाई दूज पर भाई की लंबी आयु की कामना क्यों की जाती है?

धार्मिक मान्यता में बहन भाई के तिलक और पूजा के दौरान उसके दीर्घायु, सुख और मंगल की कामना करती है। इसी भावना से भाई दूज पर लंबी आयु का आशीर्वाद मांगा जाता है।

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