|| ज्ञान का महासागर ||

कुरुक्षेत्र में अर्जुन अपने स्वजनों को देखकर गहरे विषाद में डूब जाते हैं।

युद्धभूमि में दोनों सेनाओं को देखकर अर्जुन मोह और शोक से व्याकुल हो जाते हैं। वे श्रीकृष्ण से युद्ध न करने की इच्छा व्यक्त करते हैं।

अर्जुन विषाद योग
श्रीमद्भगवद्गीता, अध्याय 1, श्लोक 34 : अर्जुन ने युद्धभूमि में किन संबंधियों को देखा?

भगवद्गीता

श्रीमद्भगवद्गीता, अध्याय 1, श्लोक 34 : अर्जुन ने युद्धभूमि में किन संबंधियों को देखा?

भगवद्गीता के अध्याय 1 के श्लोक 34 में अर्जुन युद्धभूमि में उपस्थित आचार्य, पिता, पुत्र, पितामह, मामा, ससुर और अन्य संबंधियों को देखकर युद्ध करने के धर्म पर प्रश्न उठाते हैं।

श्रीमद्भगवद्गीता, अध्याय 1, श्लोक 33 : अर्जुन ने कहा, जिनके लिए राज्य चाहिए वही युद्ध में खड़े हैं

भगवद्गीता

श्रीमद्भगवद्गीता, अध्याय 1, श्लोक 33 : अर्जुन ने कहा, जिनके लिए राज्य चाहिए वही युद्ध में खड़े हैं

भगवद्गीता अध्याय 1 श्लोक 33 में अर्जुन कृष्ण से कहते हैं कि जिन कुटुम्बियों के सुख के लिए राज्य, भोग और सुख चाहिए, वही अपने प्राण और धन त्यागकर युद्ध में खड़े हैं।

श्रीमद्भगवद्गीता, अध्याय 1, श्लोक 32 : अर्जुन ने क्यों कहा - न विजय चाहिए, न राज्य और न सुख?

भगवद्गीता

श्रीमद्भगवद्गीता, अध्याय 1, श्लोक 32 : अर्जुन ने क्यों कहा - न विजय चाहिए, न राज्य और न सुख?

भगवद्गीता अध्याय 1 श्लोक 32 में अर्जुन कहते हैं कि उन्हें विजय, राज्य, सुख, भोग और जीवन की इच्छा नहीं है। इस लेख में जानिए युद्ध में अर्जुन के वैराग्य और मोह का भाव।

श्रीमद्भगवद्गीता, अध्याय 1, श्लोक 31: अर्जुन द्वारा युद्ध के विपरीत परिणाम का वर्णन करना

भगवद्गीता

श्रीमद्भगवद्गीता, अध्याय 1, श्लोक 31: अर्जुन द्वारा युद्ध के विपरीत परिणाम का वर्णन करना

श्रीमद्भगवद्गीता के अध्याय 1,श्लोक 31 में अर्जुन युद्ध के विपरीत शकुन, स्वजनों के वध, अनिष्ट परिणाम और कल्याण न दिखाई देने की बात भगवान श्रीकृष्ण से कहते हैं।

श्रीमद्भगवद्गीता, अध्याय 1, श्लोक 30 : अर्जुन का गाण्डीव हाथ से क्यों छूटने लगा?

भगवद्गीता

श्रीमद्भगवद्गीता, अध्याय 1, श्लोक 30 : अर्जुन का गाण्डीव हाथ से क्यों छूटने लगा?

अर्जुन का विषाद अब इतनी गहरी अवस्था में पहुंच चुका है कि उसका असर उनके शरीर और मन दोनों पर दिखाई देने लगा है। जिस गाण्डीव धनुष को अर्जुन अपने पराक्रम और वीरता का प्रतीक मानते थे, वही अब उनके हाथ से छूटने लगा है।

श्रीमद्भगवद्गीता, अध्याय 1, श्लोक 29 : अर्जुन के अंग शिथिल और शरीर कांपने क्यों लगा?

भगवद्गीता

श्रीमद्भगवद्गीता, अध्याय 1, श्लोक 29 : अर्जुन के अंग शिथिल और शरीर कांपने क्यों लगा?

श्रीमद्भगवद्गीता,अध्याय 1, श्लोक 29 में अर्जुन युद्धभूमि में अंगों के शिथिल होने, मुख सूखने, शरीर कांपने और रोमांच होने की स्थिति बताते हैं। यह उनके विषाद और द्वंद्व को दर्शाता है।

श्रीमद्भगवद्गीता, अध्याय 1, श्लोक 28 : अर्जुन का करुणा और शोक से भर जाना

भगवद्गीता

श्रीमद्भगवद्गीता, अध्याय 1, श्लोक 28 : अर्जुन का करुणा और शोक से भर जाना

भगवद्गीता अध्याय 1 श्लोक 28 में अर्जुन अपने स्वजनों को युद्ध के लिए सामने देखकर करुणा और शोक से भर जाते हैं। जानिए श्लोक का अर्थ और विस्तृत व्याख्या।

श्रीमद्भगवद्गीता, अध्याय 1, श्लोक 27 : अर्जुन का श्वसुरों और हितैषियों सहित उन सभी बन्धुओं को देखना

भगवद्गीता

श्रीमद्भगवद्गीता, अध्याय 1, श्लोक 27 : अर्जुन का श्वसुरों और हितैषियों सहित उन सभी बन्धुओं को देखना

भगवद्गीता अध्याय 1 श्लोक 27 में अर्जुन दोनों सेनाओं में अपने श्वसुर, हितैषी और सभी बन्धुओं को युद्ध के लिए खड़ा देखते हैं, जिससे उनका विषाद और गहरा हो जाता है।

श्रीमद्भगवद्गीता, अध्याय 1, श्लोक 26 : अर्जुन ने अपने रिश्तेदारों को युद्धभूमि में देखकर क्या अनुभव किया?

भगवद्गीता

श्रीमद्भगवद्गीता, अध्याय 1, श्लोक 26 : अर्जुन ने अपने रिश्तेदारों को युद्धभूमि में देखकर क्या अनुभव किया?

भगवद्गीता अध्याय 1 श्लोक 26 में अर्जुन युद्धभूमि में अपने चाचों, पितामहों, गुरुओं, भाइयों, पुत्रों, पौत्रों और मित्रों को सामने देखकर भावुक हो जाते हैं।

श्रीमद्भगवद्गीता, अध्याय 1, श्लोक 24, 25 : अर्जुन के रथ को दोनों सेनाओं के बीच ले जाकर श्रीकृष्ण ने क्या दिखाया?

भगवद्गीता

श्रीमद्भगवद्गीता, अध्याय 1, श्लोक 24, 25 : अर्जुन के रथ को दोनों सेनाओं के बीच ले जाकर श्रीकृष्ण ने क्या दिखाया?

श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 1 के श्लोक 24-25 में श्रीकृष्ण अर्जुन का रथ दोनों सेनाओं के बीच खड़ा कर भीष्म, द्रोण और कुरुवंशियों को देखने के लिए कहते हैं।

श्रीमद्भगवद्गीता, अध्याय 1, श्लोक 23 : अर्जुन का, युद्ध करने आये योद्धाओं को देखने का निश्चय

भगवद्गीता

श्रीमद्भगवद्गीता, अध्याय 1, श्लोक 23 : अर्जुन का, युद्ध करने आये योद्धाओं को देखने का निश्चय

भगवद्गीता अध्याय 1 श्लोक 23 में अर्जुन युद्ध के लिए आए योद्धाओं को देखना चाहते हैं और दुर्योधन की दुर्बुद्धि का साथ देने वाले राजाओं के बारे में अपना भाव प्रकट करते हैं।

श्रीमद्भगवद्गीता, अध्याय 1, श्लोक 22 : अर्जुन के द्वारा रथ को वही खड़ा करके सबको देखने की इच्छा प्रकट करना

भगवद्गीता

श्रीमद्भगवद्गीता, अध्याय 1, श्लोक 22 : अर्जुन के द्वारा रथ को वही खड़ा करके सबको देखने की इच्छा प्रकट करना

भगवद्गीता अध्याय 1 श्लोक 22 में अर्जुन युद्धभूमि में खड़े योद्धाओं को ध्यान से देखने की इच्छा व्यक्त करते हैं। जानिए अर्जुन के निरीक्षण, विवेक और विषाद से जुड़ा गहरा अर्थ।