|| ज्ञान का महासागर ||

कुरुक्षेत्र में अर्जुन अपने स्वजनों को देखकर गहरे विषाद में डूब जाते हैं।

युद्धभूमि में दोनों सेनाओं को देखकर अर्जुन मोह और शोक से व्याकुल हो जाते हैं। वे श्रीकृष्ण से युद्ध न करने की इच्छा व्यक्त करते हैं।

अर्जुन विषाद योग
श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 1 श्लोक 4,5,6 : पाण्डवों की सेना में कौन-कौन से महारथी थे?

भगवद्गीता

श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 1 श्लोक 4,5,6 : पाण्डवों की सेना में कौन-कौन से महारथी थे?

गीता के श्लोक 4 से 6 में दुर्योधन पाण्डवों की सेना के प्रमुख योद्धाओं का वर्णन करता है। जानिए सात्यकि, विराट, द्रुपद, अभिमन्यु और अन्य महारथियों की विशेषताएं।

श्रीमद्भगवद्गीता, अध्याय 1, श्लोक 3 : दुर्योधन ने द्रोणाचार्य को धृष्टद्युम्न की याद क्यों दिलाई?

भगवद्गीता

श्रीमद्भगवद्गीता, अध्याय 1, श्लोक 3 : दुर्योधन ने द्रोणाचार्य को धृष्टद्युम्न की याद क्यों दिलाई?

गीता के तीसरे श्लोक में दुर्योधन द्रोणाचार्य को पाण्डवों की विशाल सेना और उनके शिष्य धृष्टद्युम्न की ओर संकेत करता है। जानिए इसके पीछे छिपी रणनीति और मनोवृत्ति।

श्रीमद्भगवद्गीता, अध्याय 1, श्लोक 2 : पाण्डवों की सेना देखकर द्रोणाचार्य के पास क्यों गए दुर्योधन?

भगवद्गीता

श्रीमद्भगवद्गीता, अध्याय 1, श्लोक 2 : पाण्डवों की सेना देखकर द्रोणाचार्य के पास क्यों गए दुर्योधन?

गीता के दूसरे श्लोक में संजय बताते हैं कि पाण्डवों की सुव्यवस्थित सेना देखकर दुर्योधन अपने गुरु द्रोणाचार्य के पास गया। जानिए इस प्रसंग का अर्थ और गूढ़ भाव।

श्रीमद्भगवद्गीता ,अध्याय 1, श्लोक 1 : धृतराष्ट्र ने संजय से क्या सवाल पूछा?

भगवद्गीता

श्रीमद्भगवद्गीता ,अध्याय 1, श्लोक 1 : धृतराष्ट्र ने संजय से क्या सवाल पूछा?

भगवद्गीता के प्रथम अध्याय के पहले श्लोक में धृतराष्ट्र संजय से कुरुक्षेत्र में एकत्र कौरवों और पाण्डवों की स्थिति पूछते हैं। जानिए इस श्लोक का अर्थ और गूढ़ भाव।