भगवान शिव को पुराणों में वैराग्य, तप और आत्मसंयम का स्वरूप बताया गया है। उनका मन संसार के मोह से परे रहता है और वे गहन योग में लीन रहते हैं। इसी कारण देवताओं के लिए भी उन्हें किसी सांसारिक बंधन में लाना आसान नहीं था।
एक समय ब्रह्मा जी शिव की माया के प्रभाव में आ गए। उस समय उनके मन में यह विचार आया कि महादेव का विवाह किसी योग्य और सुंदर स्त्री से होना चाहिए। लेकिन समस्या यह थी कि शिव जैसे योगी और निर्विकार देव को विवाह के लिए कैसे तैयार किया जाए।
तब यह जिम्मेदारी कामदेव को दी गई। कामदेव ने शिव को मोहित करने का प्रयास किया, लेकिन जब उन्हें सफलता नहीं मिली तो ब्रह्मा जी को एक नई योजना बनानी पड़ी। इसी प्रसंग में वसंत ऋतु के जन्म की कथा आती है।
ब्रह्मा ने कामदेव को शिव के पास क्यों भेजा और वसंत का जन्म कैसे हुआ?
एक समय ब्रह्मा जी दक्षराज और अपने अन्य मानस पुत्रों के पास पहुंचे। वहां कामदेव अपनी पत्नी रति के साथ मौजूद थे। बातचीत के दौरान ब्रह्मा जी ने कहा कि ऐसा उपाय किया जाना चाहिए जिससे भगवान शिव किसी सुंदर और कामनीय स्त्री को अपनी सहधर्मिणी के रूप में स्वीकार करें।
महादेव को इस दिशा में आकर्षित करने की जिम्मेदारी कामदेव और उनकी पत्नी रति को दी गई। कामदेव ने ब्रह्मा जी के सामने अपनी बात रखते हुए कहा कि सुंदर स्त्री ही उनके प्रभाव का प्रमुख साधन है। इसलिए यदि शिव को मोहित करना है तो पहले ऐसी स्त्री की सृष्टि करनी होगी।
कामदेव की बात सुनकर ब्रह्मा जी ने एक विशेष शक्ति का सृजन किया। उन्होंने अपनी सांस भीतर खींची और उसी निश्वास से पुष्पों से सजा हुआ वसंत प्रकट हुआ। उसके साथ मलयानिल, यानी सुगंधित और मन को प्रसन्न करने वाली हवा भी प्रकट हुई।
वसंत और मलयानिल को कामदेव का सहायक बनाया गया। इसके बाद कामदेव ने रति और इन दोनों सहायकों के साथ भगवान शिव को मोहित करने का प्रयास किया।
वसंत की सुंदरता, पुष्पों की सुगंध और मलयानिल की मंद गति के बावजूद शिव पर कोई प्रभाव नहीं पड़ा। कामदेव ने बार-बार प्रयास किया, लेकिन हर बार उन्हें असफलता ही मिली।
आखिरकार निराश होकर कामदेव अपने स्थान पर लौट आए। जब ब्रह्मा जी को पता चला कि इतने प्रयासों के बाद भी शिव अपने ध्यान से विचलित नहीं हुए तो उन्हें बहुत चिंता हुई।
इसके बाद ब्रह्मा जी के मुख से निकली निश्वास-वायु से मारगणों की उत्पत्ति हुई। उन्होंने उन सभी को कामदेव की सहायता करने का आदेश दिया और फिर शिव के पास भेज दिया।
लेकिन इस बार भी परिणाम नहीं बदला। कामदेव और उनके साथ गए सभी प्रयास भगवान शिव के मन को विचलित नहीं कर सके। अंततः कामदेव अपने परिवार सहित ब्रह्मा जी के पास लौटे, उन्हें प्रणाम किया और अपने स्थान पर चले गए।
ब्रह्मा ने विष्णु से सलाह क्यों ली और शिवा के अवतार की योजना कैसे बनी?
कामदेव के चले जाने के बाद ब्रह्मा जी के मन में एक प्रश्न उठने लगा। उन्होंने सोचा कि जो भगवान शिव अपने मन और इंद्रियों को पूरी तरह अपने वश में रखते हैं और संसार के मोह से दूर रहकर योग में लीन रहते हैं, वे किसी स्त्री को अपनी पत्नी के रूप में कैसे स्वीकार करेंगे?
इस समस्या का समाधान उन्हें दिखाई नहीं दे रहा था। तब ब्रह्मा जी ने भगवान विष्णु का स्मरण किया और उनसे अपनी चिंता बताई। भगवान विष्णु ने ब्रह्मा जी की बात सुनकर कहा कि यदि उनका उद्देश्य यह है कि भगवान शंकर विवाह करें, तो केवल कामदेव के माध्यम से उन्हें मोहित करने का प्रयास पर्याप्त नहीं होगा। इसके लिए स्वयं शिवा देवी को प्रसन्न करना होगा।
विष्णु ने ब्रह्मा जी को समझाया कि यदि देवी शिवा सगुण रूप धारण करके पृथ्वी पर किसी की पुत्री के रूप में अवतार लें और मानव शरीर स्वीकार करें, तो वे महादेव की सहधर्मिणी बन सकती हैं।
इसके लिए उन्होंने ब्रह्मा जी को दक्ष से तपस्या करवाने की सलाह दी। दक्ष को देवी शिवा की आराधना करनी थी और अपने मन में यही संकल्प रखना था कि देवी प्रसन्न होकर पृथ्वी पर अवतार लें तथा भगवान शिव को पति के रूप में स्वीकार करें।
यहीं से उस कथा की अगली कड़ी शुरू होती है जिसमें दक्ष की तपस्या, देवी शिवा का अवतरण और आगे चलकर सती के रूप में उनका जन्म सामने आता है। इस प्रकार वसंत का प्रकट होना केवल ऋतु परिवर्तन की कथा नहीं, बल्कि उस पौराणिक प्रसंग का हिस्सा है जिसमें महादेव और देवी के पुनर्मिलन की भूमिका तैयार होती है।
पौराणिक कथाओं में वसंत को कामदेव का सहायक बनाया गया है। फूलों की सुगंध, मधुर हवा और प्रकृति का आकर्षक रूप कामभावना को जगाने वाले वातावरण के रूप में इस कथा में सामने आता है, लेकिन शिव का तप इतना गहरा था कि इन सभी प्रभावों के बावजूद उनका मन विचलित नहीं हुआ।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
1-वसंत ऋतु का जन्म कैसे हुआ?
पौराणिक कथाओं के अनुसार ब्रह्मा जी के निश्वास से पुष्पों से सुसज्जित वसंत का प्रादुर्भाव हुआ। उसे कामदेव का सहायक बनाया गया।
2-ब्रह्मा ने कामदेव को भगवान शिव के पास क्यों भेजा?
ब्रह्मा जी चाहते थे कि भगवान शिव विवाह करें। शिव को सांसारिक आकर्षण की ओर लाने की जिम्मेदारी कामदेव को दी गई थी।
3-कामदेव के साथ कौन भगवान शिव को मोहित करने गया था?
कामदेव के साथ उनकी पत्नी रति, वसंत और मलयानिल गए थे। बाद में ब्रह्मा जी ने मारगणों को भी उनकी सहायता के लिए भेजा।
4-भगवान शिव कामदेव के प्रयास से क्यों प्रभावित नहीं हुए?
पुराणों में भगवान शिव को अत्यंत संयमी, निर्विकार और योग में लीन बताया गया है। इसलिए कामदेव के आकर्षण और वसंत के वातावरण का भी उन पर प्रभाव नहीं पड़ा।
5-भगवान विष्णु ने ब्रह्मा जी को क्या उपाय बताया?
विष्णु जी ने ब्रह्मा जी से कहा कि देवी शिवा को प्रसन्न करने के लिए तपस्या की जाए। उनके सगुण रूप में अवतार लेने से शिव के विवाह का मार्ग प्रशस्त हो सकता है।