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गीता शृंखला — अध्याय 2

संख्या योग — अध्याय 2 का सार

डॉ. प्रिया शर्मा6 जून 20267 मिनट पढ़ें

अर्जुन के शोक से स्थितप्रज्ञ तक — द्वितीय अध्याय की प्रमुख शिक्षाएँ संक्षेप में।

संख्या योग — अध्याय 2 का सार

द्वितीय अध्याय में संजय अर्जुन की स्थिति का वर्णन करते हैं और श्रीकृष्ण संन्यास तथा सांख्य योग का प्रारम्भिक उपदेश देते हैं।

शोक और कर्तव्य

युद्ध के मैदान में अर्जुन शरीर-संबंधियों के विनाश से विचलित हो जाते हैं। श्रीकृष्ण उन्हें बताते हैं कि आत्मा नश्वर शरीर से परे है; कर्तव्य त्याग पाप की ओर ले जाता है।

स्थिर बुद्धि के लक्षण

जो व्यक्ति सुख-दुख, लाभ-हानि, जय-पराजय में समान रहता है, वही स्थितप्रज्ञ कहलाता है। यह अध्याय मन के संतुलन की नींव रखता है।

अध्याय का महत्व

संख्या अध्याय गीता की दार्शनिक नींव है। पाठक यहाँ से आत्म-ज्ञान, कर्म और ध्यान के संबंध को समझना शुरू करता है।

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डॉ. प्रिया शर्मा · 8 मिनट पढ़ें